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जी-सेक में रकम लगाएं, 40 साल तक उसी दर पर ब्याज पाएं

संजय कुमार सिंह /  November 20, 2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रिटेल डायरेक्ट स्कीम (आरडीएस) की शुरुआत की। इसके जरिये खुदरा निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए सीधा रास्ता हासिल हो रहा है। इन प्रतिभूतियों में केंद्र सरकार की प्रतिभूतियां, ट्रेजरी, राज्य विकास ऋण (एसडीएल) और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड शामिल हैं।

रखें मनचाही अवधि

विशेषज्ञ कहते हैं कि आरडीएस में निवेशकों को बेहतर तरलता हासिल हो जाएगी। आईफास्ट ग्लोबल मार्केट्स में निवेश सलाहकार उद्भव राजेशभाई शाह कहते हैं, 'इस योजना का इस्तेमाल करने से खुदरा निवेशकों के लिए खरीदी गई सरकारी प्रतिभूतियां बेचना आसान हो जाएगा। ब्रोकर और एक्सचेंज की प्रणाली में द्वितीयक बाजार की तरलता काफी कम थी।'

सरकारी प्रतिभूतियों यानी जी-सेक में आम तौर पर 10, 15, 30 या 40 साल की परिपक्वता अवधि होती है। शाह कहते हैं, 'कोई व्यक्ति जी-सेक में बची हुई अवधि जैसे 11, 16 या ऐसे ही साल के लिए भी रकम लगाने की इच्छा रख सकता है, जो उसकी निवेश की योजना के हिसाब से हों। ऐसे निवेशक को ये प्रतिभूतियां द्वितीयक बाजार से ही खरीदनी पड़ेंगी।'

इस रास्ते से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने पर किसी तरह का खर्च नहीं होता। कॉरपोरेट ट्रेनर और लेखक जयदीप सेन कहते हैं, 'जब आप एक्सचेंज और ब्रोकर के जरिये बॉन्ड खरीदते हैं तो आपको ब्रोकरेज शुल्क देना पड़ता है। गिल्ट म्युचुअल फंड में भी एक्सपेंस रेश्यो की शक्ल में हर साल कुछ शुल्क भरना पड़ता है। मगर सीधे निवेश की योजना आरडीएस में कुछ भी नहीं देना पड़ता।'

लंबी अवधि के लिए रोकें दरें

स्थिर आय वाली बहुत कम योजनाओं की अवधि 10 साल से ज्यादा होती है। उनमें से कुछ लंबी अवधि के लिए दरें रोकने या लॉक-इन करने की सुविधा देते हैं। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने वाले निवेशक लंबी अवधि के लिए ब्याज दरें लॉक-इन करने के उद्देश्य से इन प्रतिभूतियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह उन्हें बाजार की तयशुदा गिरावट से बचने का मौका मिल जाता है। शाह कहते हैं कि जी-सेक का इस्तेमाल ब्याज दरों को 40 साल तक के लिए लॉक-इन करने में किया जा सकता है।

जो लोग सेवानिवृत्ति के लिए योजना बना रहे हैं या जो लोग पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वे इनका फायदा उठा सकते हैं। जी-सेक में छमाही भुगतान मिलता है और उन निवेशकों के लिए ये कारगर साबित होंगे, जो नियमित रूप से नकदी प्रवाह चाहते हैं।

निवेशक ब्याज दरें लॉक-इन करने के लिए सरकार के समर्थन वाले आरबीआई बचत बॉन्ड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें 7.15 फीसदी की दर से ब्याज दिया जाता है, मगर उस पर कर लगता है।

ट्रस्ट एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड प्रबंधक आनंद नेवतिया कहते हैं, 'ये बॉन्ड पूरी तरह लॉक-इन व्यवस्था के साथ आते हैं मगर आप इनके नाम पर कर्ज ले सकते हैं। हां, आप सरकारी प्रतिभूतियों को द्वितीयक बाजार में बेच सकते हैं और उन्हें गिरवी भी रखा जा सकता है।'

चूंकि विभिन्न परिपक्वता अवधियों वाली सरकारी प्रतिभूतियां मौजूद हैं, इसलिए अपने निवेश को विभिन्न चरणों में बांट सकते हैं। सेन कहते हैं, 'आपको जिस तरह नकदी की जरूरत पडऩे जा रही है, उसी हिसाब से आप अलग-अलग परिपक्वता अवधियों वाली जी-सेक में निवेश कर सकते हैं।'

राज्य विकास ऋण में जी-सेक के मुकाबले बेहतर प्रतिफल (50 से 100 आधार अंक) मिलता है। निवेशक इसका फायदा उठा सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जारी हुए राज्य विकास ऋण के बारे में जानकारी जैसे उनकी बकाया संख्या, उनकी परिपक्वता की तारीख आदि आसानी से नहीं मिल पाती।

सरकारी प्रतिभूतियां तोहफे में भी दी जा सकती हैं। आज से दो दशक बाद यदि ब्याज दरें नीचे चली गईं तो आपकी संतानें आपका धन्यवाद अदा करेंगी क्योंकि उस समय भी उन्हें ऊंची दर पर ब्याज देने वाले सरकारी बॉन्ड आपकी तरफ से तोहफे में मिले होंगे।

ब्याज दर का जोखिम

आम धारणा यही है कि सरकारी प्रतिभूतियों में किसी तरह का जोखिम नहीं होता। लेकिन असल में यह धारणा पूरी तरह भ्रामक है। क्वांटम म्युचुअल फंड में फंड प्रबंधक - स्थिर आय पंकज पाठक बताते हैं, 'सरकारी प्रतिभूतियों में किसी तरह का क्रेडिट जोखिम नहीं होता मगर मार्क-टु-मार्केट जोखिम इसमें बिल्कुल होता है।' मान लीजिए कि आप 10 साल की अवधि के बॉन्ड खरीदते हैं मगर दो साल बाद ही इन्हें बेचकर बाहर निकलने का फैसला लेते हैं। बेशक उस समय ब्याज दरें पहले के मुकाबले ऊपर चल रही हों मगर आपको जो कीमत मिलेगी, उससे पिछले दो साल में आपके पास जमा हुई ब्याज आय पूरी तरह साफ हो जाएगी।

चूंकि आरडीएस एकदम नई योजना है, इसलिए शुरुआती सालों में तरलता की समस्या दिख सकती है। नेवतिया कहते हैं, 'यह एकदम नया मंच है। खुदरा या छोटे निवेशकों के बीच लोकप्रिय होने में इसे कुछ वक्त लगना स्वाभाविक है। शुरू में तरलता चाहे दिक्कत हो मगर जैसे-जैसे इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी, तरलता की स्थिति भी बेहतर होती जाएगी।'

अंत में आपके लिए सबसे काम की बात। यह समझ लेना जरूरी है कि इन योजनाओं में ब्याज दर का जोखिम लेने से आप कैसे बच सकते हैं। नेवतिया समझाते हैं, 'आप जिस सरकारी प्रतिभूति में निवेश कर रहे हैं, उसकी परिपक्वता अवधि हमेशा अपनी निवेश की अवधि और योजना देखकर ही चुनें। यानी आपको किसी भी लक्ष्य के लिहाज से जितने साल के लिए निवेश करना है उसके आसपास की ही परिपक्वता अवधि रखें। इस तरह आप रुक-रुक कर लगने वाले मार्क-टु-मार्केट झटकों से बच जाएंगे।' पाठक भी समझाते हैं कि जी-सेक उन निवेशकों के लिए निवेश के अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं, जो खरीदने और निवेश बनाए रखने का तरीका अपनाते हैं।

Keyword: जी-सेक, ब्याज, आरबीआई, रिटेल डायरेक्ट स्कीम, आरडीएस, खुदरा निवेशक, एसडीएल,
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