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मजबूत खरीदार बने रहे म्युचुअल फंड

सुंदर सेतुरामन और चिराग मडिया / मुंबई August 30, 2021

घरेलू म्युचुअल फंड (एमएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) अगस्त में शेयरों के शुद्घ खरीदार रहे। घरेलू फंड हाउसों ने इक्विटी में लगातार निवेश किया है, क्योंकि कई नई फंड पेशकशों (एनएफओ) की सफलता और इक्विटी फंडों में मजबूत पूंजी प्रवाह की वजह से उनकी निवेश को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। बाजार नियामक सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े के अनुसार, म्युचुअल फंडों ने 23 अगस्त तक 8,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे। 

क्वांटम एएमसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी जिमी पटेल ने कहा, 'एमएफ द्वारा इक्विटी निवेश में तेजी की दो मुख्य वजह हैं। पहली, इक्विटी एनएफओ को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और फंड हाउसों को वह पूंजी बाजारों में लगाने की जरूरत है। दूसरी, इक्विटी बाजारों में तेजी की वजह से लोग लाभ उठाने का अवसर गंवाना नहीं चाहते हैं।'

इक्विटी फंडों ने पिछले कुछ महीनों में बाजार में तेजी के बीच शुद्घ प्रवाह लगातार आकर्षित किया। इस साल मार्च से, इक्विटी फंडों में 51,000 करोड़ रुपये का शुद्घ पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें से 22,583 करोड़ रुपये अगस्त में आए। पिछले महीने, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड ने अपने एनएफ में 9,808 करोड़ रुपये जुटाए और रिकॉर्ड कायम किया था। पिछले सप्ताह एसबीआई बैलेंस्ड एडवांटेज फंड ने अपने एनएफ में 14,500 करोड़ रुपये हासिल कर यह रिकॉर्ड तोड़ दिया। म्युचुअल फंडों ने इक्विटी में जुलाई में 21,502 करोड़ रुपये का निवेश किया। अगस्त में, एमएफ कंपनियों द्वारा इक्विटी फंडों में मजबूत पूंजी निवेश की उम्मीद जताई गई है। 

दूसरी तरफ, वित्त वर्ष 2022 की शुरुआत के बाद से जहां एफपीआई ने जनवरी-मार्च अवधि में घरेलू इक्विटी (55,742 करोड़ रुपये) में भारी निवेश किया, वहीं उन्होंने 5,720 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली भी की है। उन्होंने जुलाई में 11,308 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अगस्त में अब तक शुद्घ एफपीआई खरीदारी दर्ज की गई है, हालांकि यह सिर्फ 986 करोड़ रुपये है। एफपीआई ने पिछले सप्ताह सभी कारोबारी सत्रों में इक्विटी की बिकवाली की। एक्सचेंजों के आंकड़े के अनुसार, शुक्रवार को उन्होंने 778 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों से पूंजी प्रवाह इस पर निर्भर है कि भारत कैसे आगामी त्योहारी सीजन में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करेगा। एवेंडस कैपिटल मार्केट अल्टरनेट स्ट्रेटेजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड का कहना है, 'पूंजी प्रवाह इस पर निर्भर करेगा कि हम महामारी के प्रसार को किस तरह से प्रभावी ढंग से रोक सकते हैं। हमारे आंकड़े बढ़े हैं। वहीं त्योहारी सीजन आने से लोगों की चिंता बढ़ सकती है। शायद इसलिए विदेशी निवेशक दूरी बनाए हुए हैं।'

हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि एफपीआई आक्रामक तौर पर बिकवाली नहीं करेंगे। कोटक महिंद्रा ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह के अनुसार, एफपीआई इससे पहले सेकंडरी बाजार में बिकवाल बने हुए थे, उन्होंने आईपीओ और अन्य प्राथमिक निर्गमों में निवेश किया है। शाह कहते हैं, 'हमारा मानना है कि एफपीआई आखिरकार खरीदार बने रहेंगे। पूंजी प्रवाह के जरिये से बाजार को अच्छी तरह समर्थन हासिल है। कॉरपोरेट परिणाम भी निवेशकों की उम्मीदों के अनुरूप हैं।' कोविड चिंताओं के बारे में शाह का कहना है, 'अप्रैल और मई में नकारात्मक खबरों की कमी नहीं थी, और उसके बावजूद बाजार मजबूत बने रहे। भविष्य में कॉरपोरेट मुनाफा बाजार अनुमान के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।'

बाजार विश्लेषकों का यह भी मानना है कि भले ही अमेरिकी फेडरल की घोषणा का भारतीय बाजारों में ज्यादा प्रभाव नहीं बड़ेगा। कार्नेलियन कैपिटल एडवायजर्स के संस्थापक विकास खेमानी ने कहा, 'बाजारों की नजर भविष्य में फेडरल द्वारा रियायत वापस लिए जाने की रफ्तार पर रहेगी। इस संदर्भ में अच्छी बात यह है कि फेडरल राहत वापस लेना शुरू करेगा, लेकिन यह कम ब्याज दरों के साथ किया जाएगा।'

खेमानी का कहना है, 'भारतीय बाजार गिर सकते हैं, क्योंकि वे बेहद तेजी से चढ़े हैं। लेकिन मैं नहीं मानता कि एफपीआई द्वारा बड़ी निकासी की जाएगी, और साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों से भी बाजार को लगातार समर्थन मिलता रहेगा।'

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