बिजनेस स्टैंडर्ड - पारंपरिक और पोषक भोजन से समृद्ध फस्र्ट फूड का संस्करण
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पारंपरिक और पोषक भोजन से समृद्ध फस्र्ट फूड का संस्करण

जमीनी हकीकत
सुनीता नारायण /  August 26, 2019

जंक फूड नहीं बल्कि अच्छा भोजन ही प्राथमिक भोजन यानी फस्र्ट फूड है। यह वह भोजन है जो प्रकृति और पोषण को आजीविकाओं के साथ जोड़ता है। यह भोजन हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है, यह हमारी समृद्ध जैव विविधता से प्राप्त होता है और लोगों को रोजगार प्रदान करता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसे पकाने और खाने से हमें न केवल खुशी, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य भी मिलता है। सन 2013 में सेंटर फॉर साइंस ऐंड एन्वॉयरनमेंट, यानी वह संस्थान जिसके साथ मैं काम करती हूं, ने फस्र्ट फूड (प्राथमिक खाद्य) का पहला संस्करण प्रकाशित किया था। उस वक्त मैंने लिखा था कि भोजन का संबंध संस्कृति और सबसे अधिक जैव विविधता से है। हम अक्सर इस बारे में विचार नहीं करते कि जैव विविधता और सांस्कृतिक विविधता का संबंध जैव जगत की विविधता से है। हमने दलील दी कि हमें पौधों के बारे में जानकारी और उनके गुणों को पहचानते हुए इस बेहतरी के साथ भोजन पकाना चाहिए कि खाद्य पदार्थों  की खुशबू बरकरार रहे। अगर हम अपने खाने की थाली में मौजूद जैव विविधता की कीमत समझेंगे तभी तो वनों की जैव विविधता की रक्षा करेंगे। 

 
सन 2017 में फस्र्ट फूड: कल्चर ऑफ टेस्ट का प्रकाशन किया गया। पहली पुस्तक की तरह इस पुस्तक में भी हमने उन खाद्य पदार्थों को बनाने की विधि संकलित की हैं जो हमें जैव विविधता की जानकारी देती हैं। हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि तब तक यह पता चल चुका था कि दुनिया मोटापे की समस्या से जूझ रही है। यह बात स्पष्ट है कि हम जो भोजन कर रहे हैं वह हमारे स्वास्थ्य के लिए खराब है। इसमें कोई पोषण या अच्छाई नहीं है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात, अब यह स्पष्ट है कि हमारे भोजन में आया यह बदलाव यानी घर में पके पौष्टिक खाने से दूरी बनाने और सदियों पुरानी खाद्य परंपराओं से दूर जाने का यह सिलसिला संयोगवश नहीं है। हम उस पीढ़ी से आते हैं जो प्रसंस्कृत और फैक्टरी निर्मित खाना खाने वाली है, जिन्हें मार्केटिंग के बल पर बढ़ावा दिया गया। इसने हमारी आदत और खाद्य संस्कृति में बदलाव लाया।
 
सवाल यह है कि हम खराब भोजन की इस संस्कृति में बदलाव कैसे लाएं? क्या ऐसा करना संभव है? प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग बहुत ताकतवर है। उनके पास लोगों, खासकर युवाओं को अपने साथ जोडऩे की क्षमता है। वे खानपान के रंग, गंध और खुशबू के सहारे लोगों को लुभाते हैं। उन्हें पता है कि हमें कैसे लुभाना है। यह जानते हुए भी कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बुरा है। सबसे अहम बात यह है कि प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग ने अब हमारी व्यस्त जीवनशैली का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। यह आसान है क्योंकि यह उपलब्ध है और इसे बनाना आसान है। कोई समस्या ही नहीं।
 
सबसे अहम बात यह है कि खानपान की उनकी दुनिया उनका कारोबार है। यह इसलिए चलता है क्योंकि उन्हें मुनाफा कमाना है। यही वजह है कि कंपनियां भोजन को हम तक पहुंचाने की आपूर्ति शृंखला तैयार करती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अच्छे भोजन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाए? क्या आजीविका का यह कारोबार मुख्य धारा के खाद्य उद्योग का हिस्सा बन सकता है या इसे अपने बचाव के लिए समांतर बाजार की आवश्यकता है? यह कैसे होगा? यही कारण है कि फस्र्ट फूड के 2019 के संस्करण में हम ऐसी आजीविका की जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं जो फस्र्ट फूड से जुड़ी हो। इसका संबंध कारोबार से है जो अदृश्य और एक तरह से नवजात है। परंतु इसका संबंध एक ऐसे कारोबार से भी है जिसे भरपूर ढंग से विकसित होना चाहिए। हम जानते हैं कि ऐसा संभव है। इथियोपिया का एक मोटा अनाज है टेफ जिसके बहुत छोटे-छोटे बीज होते हैं। यह ग्लूटेन रहित होता है और यही इसका सबसे बड़ा गुण है। इस बीज को कॉफी के बाद दुनिया को इथियोपिया का दूसरा तोहफा माना जाता है। लंदन में टेफ के एक किलो आटे की कीमत करीब 7 पाउंड है यानी करीब 614 रुपये प्रति किलो। इथियोपिया में यह इससे आधे से भी कम कीमत पर मिलता है।
 
भारत में भी इसके उदाहरण हैं। रागी और ब्राउन टॉप मिलेट अब हमारे खाद्य बाजारों में प्रमुखता से नजर आ रहा है। हम अब इन्हें खा रहे हैं क्योंकि ये उपलब्ध हैं। परंतु अच्छे खाद्य पदार्थ की इस वृद्धि को बढ़ावा देना होगा ताकि यह हमारे जीवन में रच बस जाए। हमने इस खाद्यान्न के कारोबार की संभावनाओं को भी तलाशा। ठीक उसी तरह जैसे चाय उद्योग छोटे किसानों को साथ लेकर रोजेल्ले फ्लावर्स (लाल अंबारी) एकत्रित कर रहा है या फिर जैसे कटहल का कारोबार इस तरह विकसित हुआ कि अब यह साल भर उपलब्ध रहता है। ये बातें बहुत अहम हैं। हो सकता है कि ये आज हमारी बुरे खानपान की आदतों को बदलने के लिहाज से पर्याप्त न हों लेकिन ये हमें भविष्य की राह तो दिखाती हैं।
 
भोजन के इस नए कारोबार में बदलाव लाने का काम शेफ यानी रसोइये कर सकते हैं। वे हमारे लिए भोजन तैयार करते हैं और समाज को यह बताते हैं कि कौन सा भोजन बेहतर है। यही कारण है कि ये वे लोग हैं जो भोजन, पोषण, प्रकृति और आजीविका के बीच के इस नए संबंध को आकार दे सकते हैं। यही कारण है कि फस्र्ट फूड के इस विशेष संस्करण में हमने पाक कला में महारत रखने वाले स्त्री-पुरुषों के ज्ञान का इस्तेमाल किया है। भोजन का यह फैशन हमारे लिए अच्छा होगा। 
Keyword: fast food, junk food, health,,
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