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निर्यात स्तर पर पहुंचा लौह अयस्क आयात

जयजित दास / भुवनेश्वर June 30, 2019

पिछले तीन वर्षों का रुख देखकर पता चलता है देश का लौह अयस्क आयात धीरे-धीरे निर्यात के निकट पहुंच रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 19 के अंत में आयात बढ़कर 1.28 करोड़ टन हो गया है जो 2015-16 में 70.9 लाख टन था। इसके विपरीत इस्पात निर्माण की इस प्रमुख सामग्री का निर्यात इस अवधि में 46.88 प्रतिशत घटकर 3.048 करोड़ टन से 1.619 करोड़ टन रह गया। लौह अयस्क आयात को तटों के पास स्थित इस्पात संयंत्रों से बढ़ावा मिला है। जब कच्चे माल की घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय दामों के पास पहुंच रही थीं, तब इसकी आयात लागत लगभग घरेलू कीमतों के बराबर हो गई थी। उस समय इन संयंत्रों ने ऊंचे दर्जे वाले अयस्क का अधिक आयात करना पसंद किया थी। कुछ दिनों की गिरावट के बाद चीन के दलियान स्टॉक एक्सचेंज में लौह अयस्क के दामों में हाल ही में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। एक्सचेंज का सबसे सक्रिय लौह अयस्क अनुबंध 5.4 प्रतिशत बढ़कर 121.93 डॉलर प्रति टन हो गया।

 
आयात के उलट अंतरराष्ट्रीय व्यापार में निचले दर्जे के चूरे की कमजोर मांग की वजह से लौह अयस्क निर्यात में कमी आई है। चीन की इस्पात मिलों ने निचले दर्जे का अयस्क आयात रोक दिया था क्योंकि वहां सरकार ने उत्सर्जन नियमों को पूरा करने के लिए पर्यावरण नियमों को कड़ा कर दिया था। 30 प्रतिशत शुल्क लगने की वजह से भारतीय उत्पादकों के लिए भी ऊंचे दर्जे का अयस्क निर्यात करना अव्यावहारिक हो गया। हालांकि जनवरी 2019 में ब्राजील में वेल की एक खदान में बांध टूटने के बाद से वैश्विक लौह अयस्क की आपूर्ति में दिक्कत हुई है। इस संकट के कारण वेल की खदानों से सात करोड़ टन की वार्षिक आपूर्ति रुक गई। ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय चक्रवात ने प्रमुख खदानों में उत्पादन को प्रभावित करते हुए आपूर्ति संकट को और बढ़ा दिया। चीन वेल के लौह अयस्क का सबसे बड़ा खरीदार है और इस नुकसान की भरपाई के लिए उसने भारत सहित अन्य बाजारों से खरीद बढ़ा दी।
 
लौह अयस्क के एक खनिक ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति की दिक्कत के कारण अब चीन भारत से निचले दर्जे वाले चूरे की ज्यादा खरीद कर रहा है। चीन के बंदरगाहों पर स्टॉक कई वर्षों के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है और देश की इस्पात मिलों की विस्तार योजनाओं से स्टॉक बढ़ रहा है। इससे निचले दर्जे के अयस्क की निर्यात मांग फिर से बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय लौह अयस्क के दाम पांच साल के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के कारण भारतीय निर्यातकों को भी अपनी खेप फायदेमंद लग रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्यात का परिदृश्य आकर्षक हो गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की दिक्कत जल्द नहीं सुधरेगी।
 
आयात नरम रहने के आसार हैं क्योंकि घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति की जाएगी। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 19 में भारत ने 22 करोड़ टन लौह अयस्क उत्पादन किया। इस वित्त वर्ष में उत्पादन में आठ प्रतिशत वृद्धि की संभावना है क्योंकि व्यापारी खनिक 31 मार्च, 2020 तक खदानों की पट्टा अवधि समाप्त होने से पहले उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
Keyword: iron ore, export, import, steel,,
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