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बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों पर होगा जोर

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली June 30, 2019

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है और इसके मद्देनजर आम बजट में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण पर प्रोत्साहन दिए जाने की उम्मीद है। इससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भी तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अगले चार साल में इलेक्ट्रिक वाहनों की योजना के अनुरूप बजट में निर्माता कंपनियों को परिचालन स्थापित करने के लिए किए गए पूंजीगत खर्च के संबंध में निवेश आधारित प्रोत्साहन की घोषणा की जा सकती है।
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए समय सीमा तय कर दी गई है और हम ऐसे वाहन बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए उन्हें कर प्रोत्साहन देने की योजना पर विचार कर रहे हैं। परिचालन के अलावा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और शोध एवं विकास को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत होगी।' वित्त वर्ष 2020 के बजट में पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को अपना कारोबार स्थापित करने में हुए पूंजीगत खर्च पर आय कर कानून की धारा 35एडी (1) के तहत छूट दी जा सकती है। इस कदम से इन कंपनियों पर कर का बोझ कम होगा और उनके पास प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में निवेश करने के लिए ज्यादा पैसा होगा।  इसके अलावा ईवी को बढ़ावा देने के लिए अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिनमें इस पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना और इनकी बैटरी पर कर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत करना शामिल है। इस माले पर फिटमेंट समिति विचार कर रही है और इस पर जीएसटी परिषद की अगली बैठक में फैसला किया जा सकता है।
 
सरकार कुछ क्षेत्रों की इकाइयों के लिए कर छूट की अवधि बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, जो विशेष आर्थिक क्षेत्र में परिचालन कर रहे हैं या वहां इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं। इसमें ईवी भी शामिल है। अभी इन क्षेत्रों की इकाइयों को 2020 तक कर छूट मिली हुई है। इस कदम से विदेशी ईवी कारोबारियों को इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के साथ भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने और वहां से विभिन्न देशों में निर्यात के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे घरेलू कारोबारियोंं को तेजी से कौशल हस्तांतरण में भी मदद मिलेगी। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10 एए के मुताबिक सेज में स्थापित इकाइयों से निर्यात से होने वाले मुनाफे पर कर छूट मिली हुई है। इस छूट में पहले 5 साल तक निर्यात से जुड़े मुनाफे पर 100 प्रतिशत छूट और अगले 5 साल तक 50 प्रतिशत छूट दिया जाना शामिल है। 
 
एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'विनिर्माण गतिविधियां पर सुस्त हैं और घरेलू निवेश कमजोर है, ऐसे में सेज में सनसेट क्लॉज का विस्तार अहम हो जाता है।' ईवी क्षेत्र में तकनीक  को तेजी से स्वीकार किए जाने को विदहोल्डिंग कर दरों को घटाकर 5 प्रतिशत या तकनीकी हस्तांतरण पर कर कम करके किया जा सकता है।  अधिकारी ने कहा, 'तकनीक और ज्ञान का हस्तांतरण इलेक्ट्रिक वादनों के विनिर्माण में अहम होने जा रहा है।  आखिरी उत्पाद के दाम तार्किक बनाकर मात्रा की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है।' सरकार ईवी उपकरणों जैसे ब्रेक सिस्टम, इलेक्ट्रिक कंप्रेशर, चार्जर, बैटरी पैक आदि पर सीमा शुल्क को तार्किक बना सकती है, जो अभी करीब 15 प्रतिशत है। नांगिया एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर राकेश नांगिया ने कहा, 'ईवी क्षेत्र को कर प्रोत्साहन देने से दो मकसद पूरे हो सकते हैं। विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाग इससे भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दुरुस्त की जा सकती है और रोजगार बढ़ाया जा सकता है। दूसरे, पर्यावरण संबंधी संकट का भी समाधान किया जा सकता है। निवेश के फैसले लेने में कर की लागत अहम होती है। यह उचित समय है कि कर प्रोत्साहनों के साथ ईवी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाए।' 
 
वहीं सोसाइटी आफ मैन्युफैक्चरर्स आफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (एसएमईवी) के महानिदेशक सोहिंदर गिल ने कहा, 'बजट में कर प्रोत्साहन दिए जाने से मूल उपकरण विनिर्माता औक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स इस क्षेत्र मेंं निवेश करने को प्रोत्साहित होंगे।'  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बैटरी से चलने वाले वाहनों को पंजीकरण से छूट दिए जाने का प्रस्ताव किया है, जिससे कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वातावरण तैयार हो सके। प्रस्ताव के मुताबिक बैटरी से चलने वाले दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों को नवीकरण पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।  नीति आयोग ने 2030 तक सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री अनिवार्य करने का खाका तैयार किया है। 
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