बिजनेस स्टैंडर्ड - साल के दौरान एक अंक में प्रतिफल देंगे शेयर बाजार
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साल के दौरान एक अंक में प्रतिफल देंगे शेयर बाजार

पुनीत वाधवा /  June 30, 2019

बाजार की नजर सरकार द्वारा बजट में पेश किए जाने वाले आर्थिक एजेंडे पर लगी हुई है। वेलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ज्योतिरावद्र्घन जयपुरिया ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि ज्यादातर विदेशी निवेशक यह मानते हैं कि भारत दीर्घावधि नजरिये से बेहद भरोसेमंद उभरते बाजारों में से एक है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
क्या आप मान रहे हैं कि बजट के बाद बाजार में कुछ और गिरावट आएगी?
 
बाजार, खासकर लार्ज-कैप शेयर महंगे हैं और आय में मजबूत सुधार आ रहा है। कुल मिलाकर, हमारा नजरिया यह है कि वित्त वर्ष 2020 के दौरान कॉरपोरेट बैंकों की मदद से आय में सुधार दिखेगा। हालांकि जून 2019 की तिमाही का कमजोर परिणाम अल्पावधि में बाजार को गिरावट की ओर ले जा सकता है। वर्ष के दौरान बाजार एक अंक में प्रतिफल देंगे।
 
बजट से आपको क्या उम्मीदें हैं?
 
निजी निवेश चक्र दूर होने से सरकार पर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का दबाव बना हुआ है। सरकार के पास बजट के अलावा लोक-लुभावन कार्यक्रमों के वित्त पोषण की कम गुंजाइश है। हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, खासकर संकट के समय में एनबीएफसी को पूंजी मुहैया कराना भी जरूरी है। सरकार को पीएसयू के निजीकरण पर विचार करना चाहिए, क्योंकि पूंजीगत खर्च के वित्त पोषण के लिए यह जरूरी है। राजकोषीय घाटे में मामूली अंतर सही है, बशर्ते कि पूंजीगत खर्च के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।  
 
क्या आर्थिक मंदी की स्थिति और बदतर हो सकती है?
 
आर्थिक मंदी बढ़ाने के लिए दो प्रमुख कारक जिम्मेदार हैं। पहला है आम चुनाव में निर्णय लेने की क्षमता का अभाव। चुनाव संपन्न होने और इसमें मतदाताओं द्वारा स्थायित्व और निरंतरता पर जोर दिए जाने इन्फ्रा परियोजनाओं की गति तेज होगी। दूसरा कारक है एनबीएफसी संकट और ऋणदाताओं में जोखिम पैदा होना। यह कारक कुछ समय तक बना रह सकता है और खपत मांग प्रभावित हो सकती है, क्योंकि एनबीएफसी ने अपनी उधारी घटाई है और बैंक इसका लाभ उठाने के लिए उत्साहित नहीं हैं। 
 
वित्त वर्ष 2020 में कॉरपोरेट आय से आपकी क्या उम्मीदें हैं?
 
कुल आय 12-15 प्रतिशत के दायरे में रहने से कॉरपोरेट आय में वित्त वर्ष 2020 में सुधार आएगा। यह जून 2019 की कमजोर तिमाही के बावजूद होगा। ज्यादातर आय वृद्घि बैंकिंग क्षेत्र, खासकर कॉरपोरेट बैंकों पर आधारित होगी। गैर-निष्पादित ऋणों (एनपीएल) के लिए प्रावधान का दबाव पीछे छूटने से अब हम कॉरपोरेट बैंकों में मजबूत आय वृद्घि की संभावना देख रहे हैं। 
 
मौजूदा स्तरों पर आप किन क्षेत्रों को पसंद कर रहे हैं?
 
हम बैंकिंग सेक्टर, खासकर कॉरपोरेट बैंकों को लेकर उत्साहित हैं। हम बुनियादी ढांचा खर्च, खासकर सीमेंट और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में वृद्घि से संबंधित घरेलू दांव को पसंद करते हैं। वहीं जिन क्षेत्रों से हम परहेज कर रहे हैं, उनमें कंज्यूमर स्टैपल्स कंपनियों के शेयर शामिल हैं। चीन और कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखते हुए हम धातु क्षेत्र पर सतर्क हैं। 
 
क्या निवेशकों को मौजूदा समय में एनबीएफसी से दूर बने रहना चाहिए? 
 
एनबीएफसी संकट से इन वित्त कंपनियों की ऋण शोधन क्षमता में भरोसा घट रहा है। कई एनबीएफसी के लिए वृद्घि अगले वर्ष के दौरान धीमी बनी रहेगी और हम इनमें निवेश से परहेज कर रहे हैं। हालांकि हम उन बैंकों, खासकर कॉरपोरेट बैंकों को लेकर सकारात्मक हैं, जिनमें प्रावधान जरूरत आरामदायक स्तर पर है। परिसंपत्ति और देनदारी, दोनों के संदर्भ में इन बैंकों को एनबीएफसी संकट से फायदा होगा। एनबीएफसी फिलहाल ऋण देने में सक्षम नहीं हैं जिसे देखते हुए बैंकों को ऋण वृद्घि दर्ज करने में आसानी होगी। 
 
विदेशी निवेशक भारत को किस नजरिये से देख रहे हैं?
 
कई विदेशी निवेशक यह मानते हैं कि भारत दीर्घावधि के लिहाज से बेहद भरोसेमंद उभरते बाजारों (ईएम) में से एक है। हालांकि ज्यादातर विदेशी निवेशक भारत को लेकर पहले से ही उत्साहित हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर कटौती उभरते बाजारों के लिए पूंजी प्रवाह के लिहाज से सकारात्मक हो सकती है और भारत भी इसका लाभार्थी होगा। लेकिन ईएम श्रेणी में भारत को दो कारकों से जूझना है। पहला, यह महंगा बाजार है जिससे आय चक्र में तेज बदलाव आ रहा है। कॉरपोरेट आय में स्पष्टï संकेतों के अभाव में पूंजी प्रवाह मंद हो सकता है। दूसरा, ईएम सूचकांकों में भारत पर भारांक में सऊदी अरब के जुडऩे से कुछ कम हो सकता है और चाइना ए शेयरों के भारांक में लगातार तेजी की संभावना है।
 
क्या वैश्विक घटनाक्रम से चिंता बढ़ेगी?
 
भारत में एनबीएफसी संकट के अलावा, वैश्विक कारकों से भी बाजारों को बड़े जोखिम का सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर, हमारे नजरिये से सबसे ज्यादा ध्यान इसे लेकर दिया गया है कि क्या अमेरिका में मंदी है क्योंकि बॉन्ड बाजार मौजूदा समय में इसका संकेत दे रहे हैं, या अमेरिकी फेडरल ने मंदी को टालने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। जहां अमेरिकी फेडरल द्वारा ब्याज दरों में कटौती भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक होगी, वहीं मंदी की स्थिति से भारतीय बाजार समेत वैश्विक बाजार प्रभावित होंगे। 
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