facebookmetapixel
Advertisement
Market Strategy: मानसून सुधरा, अब कौन से शेयर करा सकते हैं मोटी कमाई? एक्सपर्ट ने बताए टॉप सेक्टरUnion Bank पर अब क्या करें निवेशक? Q1 रिजल्ट के बाद 5 ब्रोकरेज ने बताया आगे का रास्ताPaytm: पहली बार बोनस शेयर देने की तैयारी, 20 जुलाई को फैसला; ब्रोकरेज ने स्टॉक पर दी BUY की सलाहBUY, ADD या REDUCE? Q1 के बाद ICICI Prudential Life और ICICI Lombard पर क्या बोले ब्रोकरेजSouth Indian Bank Q1 Results: जून तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, NII में 23% की छलांग; NPA घटाकिरायेदारों के ₹1.26 लाख करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसे, नोब्रोकर की रिपोर्ट में Gen Z पर बड़ा खुलासाWest Asia संकट का असर: 2026 की दूसरी तिमाही में घटी इंडस्ट्रियल व वेयरहाउसिंग डिमांडNSE लाया नया डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट, 12 अगस्त से Nifty India FPI 150 Index पर होगी ट्रेडिंगQ1 रिजल्ट के बाद HDFC ग्रुप के ये 2 शेयर बने ब्रोकरेज के फेवरेट, 44% तक अपसाइड का अनुमानSEBI ने जून में सुलझाई 5,000 से ज्यादा शिकायतें, SCORES 2.0 सिस्टम से निवेशकों को बड़ी राहत

19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने हम्पी को हराकर जीता महिला विश्व कप, ग्रैंडमास्टर बन रच दिया इतिहास

Advertisement

हम्पी 38 साल की हैं और 2002 में ग्रैंडमास्टर बनीं, जबकि दिव्या का जन्म 2005 में हुआ। दिव्या ऊर्जा से भरी थीं और उन्होंने शुरुआती टाईब्रेकर में हम्पी पर दबाव बनाए रखा।

Last Updated- July 28, 2025 | 11:11 PM IST
भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख

भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता हासिल करते हुए सोमवार को यहां हमवतन और अपने से कहीं अधिक अनुभवी कोनेरू हम्पी को टाईब्रेकर में हराकर फिडे महिला विश्व कप का खिताब जीत लिया। इस जीत से 19 साल की दिव्या ने न सिर्फ यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीता बल्कि साथ ही ग्रैंडमास्टर भी बन गईं जो टूर्नामेंट की शुरुआत में असंभव लग रहा था। वह ग्रैंडमास्टर बनने वाली सिर्फ चौथी भारतीय महिला और कुल 88वीं खिलाड़ी हैं। 

नागपुर की इस खिलाड़ी ने शनिवार और रविवार को खेले गए दो क्लासिकल मुकाबलों के ड्रॉ होने के बाद टाईब्रेकर में जीत दर्ज की। दो क्लासिकल बाजी ड्रॉ होने के बाद टाईब्रेकर का पहला समूह निर्णायक साबित हुआ, जिसमें हम्पी ने अपना संयम खो दिया। विश्व कप और महिला विश्व चैंपियनशिप को छोड़कर हम्पी ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में सब कुछ जीता है।

दिव्या ने सोमवार को दृढ़ निश्चय दिखाया और इस जज्बे का बोनस ग्रैंडमास्टर खिताब था जो इस प्रतियोगिता के चैंपियन के लिए आरक्षित था। सोमवार को समय नियंत्रित टाईब्रेकर की पहली बाजी में सफेद मोहरों से खेलते हुए दिव्या ने हम्पी को फिर से ड्रॉ पर रोका लेकिन दूसरी बाजी में काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन को हराकर जीत दर्ज की। दिव्या अब हम्पी, डी हरिका और आर वैशाली के साथ देश की ग्रैंडमास्टर बनने वाली महिलाओं की सूची में शामिल हो गई हैं। 

हम्पी 38 साल की हैं और 2002 में ग्रैंडमास्टर बनीं, जबकि दिव्या का जन्म 2005 में हुआ। दिव्या ऊर्जा से भरी थीं और उन्होंने शुरुआती टाईब्रेकर में हम्पी पर दबाव बनाए रखा और अपनी दिग्गज प्रतिद्वंद्वी को थका दिया और फिर दूसरे टाईब्रेकर में जीत दर्ज की। पेट्रॉफ डिफेंस का इस्तेमाल करते हुए दिव्या ने हम्पी को पहली टाईब्रेक बाजी में बेहतर स्थिति में होने का मौका दे दिया था। हम्पी ने हालांकि समय के दबाव में गलती की और जल्द ही वह ऐसी स्थिति में पहुंच गईं जहां उनके पास दिव्या की रानी के खिलाफ एक रूक (हाथी), बिशप (ऊंट) और एक पॉन (प्यादा) था। हालांकि स्थिति लगभग बराबरी की रही और अंत में हम्पी ने आसानी से ड्रॉ कर लिया। दूसरी बाजी में हम्पी ने कैटलन ओपनिंग का इस्तेमाल किया और दिव्या फिर से अच्छी तरह तैयार थीं। हम्पी ने 40वीं चाल में अपना आपा खो दिया और प्यादों को गंवाकर विरोधी खिलाड़ी पर आक्रमण करने की कोशिश की। दिव्या को हालांकि इससे अधिक मुश्किल नहीं हुई। यह दिव्या का दिन था, क्योंकि हम्पी के पास फिर से समय की कमी थी और उन्होंने फिर गलती की जिससे सैद्धांतिक रूप से दिव्या की जीत की स्थिति बन गई।

अपने से दोगुनी उम्र की प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जीत के बाद भावुक दिव्या अपने आंसू नहीं रोक पाईं। दिव्या ने कहा, ‘मुझे इस जीत को समझने के लिए समय चाहिए। मुझे लगता है कि यह नियति की बात थी कि मुझे इस तरह ग्रैंडमास्टर का खिताब मिला, क्योंकि इस टूर्नामेंट से पहले मेरे पास एक भी ग्रैंडमास्टर नॉर्म नहीं था और अब मैं ग्रैंडमास्टर हूं।’

मुकाबले पर करीबी नजर रखने वाले पांच बार के पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने दिव्या की जीत की सराहना की और इसे भारतीय शतरंज के लिए महान जश्न करार दिया। आनंद ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘दिव्या देशमुख को विश्व कप जीतने पर बधाई। ग्रैंडमास्टर बनने और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाने पर। धैर्य की अद्भुत परीक्षा। कोनूरू हम्पी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और शानदार जुझारूपन दिखाया। वह एक महान चैंपियन हैं। यह भारतीय शतरंज, विशेषकर महिला शतरंज का एक शानदार जश्न था।’ 

Advertisement
First Published - July 28, 2025 | 10:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement