facebookmetapixel
Advertisement
‘अब बहुत देर हो चुकी है’, ट्रंप बोले: ईरान की सेना और लीडरशिप तबाह, उनसे कोई बातचीत नहीं होगीक्या ईरान के मिसाइल हमलों के बावजूद दुबई अभी भी निवेशकों और रईसों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना है?Middle East Crisis: भारत ने कसी कमर, तेल-गैस की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोत की तलाश शुरूट्रंप का नया ऐलान: चार-पांच हफ्तों तक जारी रह सकती है जंग, क्या पूरे खाड़ी देशों में फैलेगी बारूद की आग?ईरान युद्ध का असर: भारत का ₹40,000 करोड़ का मेवा आयात कारोबार दबाव में, कीमतों में उछालक्या खत्म हो गया महंगे हथियारों का दौर? यूक्रेन-ईरान की जंग ने कैसे बदल दिया हथियार बनाने का पूरा खेलईरान युद्ध के बीच 4 लाख मीट्रिक टन भारतीय बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा, निर्यात पर बड़ा असरअर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई, स्टॉक मार्केट और आयात-निर्यात तक; US Iran युद्ध का भारत पर क्या पड़ेगा असर?US-Iran Conflict: ईरान में भारतीयों को घर में रहने की सलाह, दूतावास ने जारी की नई एडवाइजरी8th Pay Commission: ₹1000 से ₹20,000 होगा FMA? कर्मचारियों ने सरकार के सामने रखीं ये बड़ी शर्तें

19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने हम्पी को हराकर जीता महिला विश्व कप, ग्रैंडमास्टर बन रच दिया इतिहास

Advertisement

हम्पी 38 साल की हैं और 2002 में ग्रैंडमास्टर बनीं, जबकि दिव्या का जन्म 2005 में हुआ। दिव्या ऊर्जा से भरी थीं और उन्होंने शुरुआती टाईब्रेकर में हम्पी पर दबाव बनाए रखा।

Last Updated- July 28, 2025 | 11:11 PM IST
भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख

भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता हासिल करते हुए सोमवार को यहां हमवतन और अपने से कहीं अधिक अनुभवी कोनेरू हम्पी को टाईब्रेकर में हराकर फिडे महिला विश्व कप का खिताब जीत लिया। इस जीत से 19 साल की दिव्या ने न सिर्फ यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीता बल्कि साथ ही ग्रैंडमास्टर भी बन गईं जो टूर्नामेंट की शुरुआत में असंभव लग रहा था। वह ग्रैंडमास्टर बनने वाली सिर्फ चौथी भारतीय महिला और कुल 88वीं खिलाड़ी हैं। 

नागपुर की इस खिलाड़ी ने शनिवार और रविवार को खेले गए दो क्लासिकल मुकाबलों के ड्रॉ होने के बाद टाईब्रेकर में जीत दर्ज की। दो क्लासिकल बाजी ड्रॉ होने के बाद टाईब्रेकर का पहला समूह निर्णायक साबित हुआ, जिसमें हम्पी ने अपना संयम खो दिया। विश्व कप और महिला विश्व चैंपियनशिप को छोड़कर हम्पी ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में सब कुछ जीता है।

दिव्या ने सोमवार को दृढ़ निश्चय दिखाया और इस जज्बे का बोनस ग्रैंडमास्टर खिताब था जो इस प्रतियोगिता के चैंपियन के लिए आरक्षित था। सोमवार को समय नियंत्रित टाईब्रेकर की पहली बाजी में सफेद मोहरों से खेलते हुए दिव्या ने हम्पी को फिर से ड्रॉ पर रोका लेकिन दूसरी बाजी में काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन को हराकर जीत दर्ज की। दिव्या अब हम्पी, डी हरिका और आर वैशाली के साथ देश की ग्रैंडमास्टर बनने वाली महिलाओं की सूची में शामिल हो गई हैं। 

हम्पी 38 साल की हैं और 2002 में ग्रैंडमास्टर बनीं, जबकि दिव्या का जन्म 2005 में हुआ। दिव्या ऊर्जा से भरी थीं और उन्होंने शुरुआती टाईब्रेकर में हम्पी पर दबाव बनाए रखा और अपनी दिग्गज प्रतिद्वंद्वी को थका दिया और फिर दूसरे टाईब्रेकर में जीत दर्ज की। पेट्रॉफ डिफेंस का इस्तेमाल करते हुए दिव्या ने हम्पी को पहली टाईब्रेक बाजी में बेहतर स्थिति में होने का मौका दे दिया था। हम्पी ने हालांकि समय के दबाव में गलती की और जल्द ही वह ऐसी स्थिति में पहुंच गईं जहां उनके पास दिव्या की रानी के खिलाफ एक रूक (हाथी), बिशप (ऊंट) और एक पॉन (प्यादा) था। हालांकि स्थिति लगभग बराबरी की रही और अंत में हम्पी ने आसानी से ड्रॉ कर लिया। दूसरी बाजी में हम्पी ने कैटलन ओपनिंग का इस्तेमाल किया और दिव्या फिर से अच्छी तरह तैयार थीं। हम्पी ने 40वीं चाल में अपना आपा खो दिया और प्यादों को गंवाकर विरोधी खिलाड़ी पर आक्रमण करने की कोशिश की। दिव्या को हालांकि इससे अधिक मुश्किल नहीं हुई। यह दिव्या का दिन था, क्योंकि हम्पी के पास फिर से समय की कमी थी और उन्होंने फिर गलती की जिससे सैद्धांतिक रूप से दिव्या की जीत की स्थिति बन गई।

अपने से दोगुनी उम्र की प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जीत के बाद भावुक दिव्या अपने आंसू नहीं रोक पाईं। दिव्या ने कहा, ‘मुझे इस जीत को समझने के लिए समय चाहिए। मुझे लगता है कि यह नियति की बात थी कि मुझे इस तरह ग्रैंडमास्टर का खिताब मिला, क्योंकि इस टूर्नामेंट से पहले मेरे पास एक भी ग्रैंडमास्टर नॉर्म नहीं था और अब मैं ग्रैंडमास्टर हूं।’

मुकाबले पर करीबी नजर रखने वाले पांच बार के पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने दिव्या की जीत की सराहना की और इसे भारतीय शतरंज के लिए महान जश्न करार दिया। आनंद ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘दिव्या देशमुख को विश्व कप जीतने पर बधाई। ग्रैंडमास्टर बनने और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाने पर। धैर्य की अद्भुत परीक्षा। कोनूरू हम्पी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और शानदार जुझारूपन दिखाया। वह एक महान चैंपियन हैं। यह भारतीय शतरंज, विशेषकर महिला शतरंज का एक शानदार जश्न था।’ 

Advertisement
First Published - July 28, 2025 | 10:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement