पंजाब से राज्यसभा सांसद Ashok Mittal ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उनका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही उनके ठिकानों पर Enforcement Directorate की छापेमारी हुई थी। इससे पहले उन्हें राज्यसभा में Aam Aadmi Party का डिप्टी लीडर भी बनाया गया था।
62 साल के अशोक मित्तल का यह राजनीतिक बदलाव काफी चर्चा में है। वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और Bharatiya Janata Party में शामिल होने के बाद उनकी नई भूमिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
अशोक मित्तल का जन्म जालंधर कैंट में एक कारोबारी परिवार में हुआ था। उनके पिता बलदेव राज मित्तल ने “लवली स्वीट्स” नाम से मिठाई का कारोबार शुरू किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद मित्तल ने अपने भाइयों के साथ इस पारिवारिक बिजनेस को आगे बढ़ाया।
बाद में उन्होंने कारोबार का विस्तार करते हुए 1991 में “लवली ऑटो” की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और साल 2000 में लवली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना की।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2005 में Lovely Professional University की स्थापना रही। आज यह उत्तर भारत की बड़ी निजी यूनिवर्सिटी में गिनी जाती है, जहां हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं। अशोक मित्तल इस विश्वविद्यालय के चांसलर हैं, जबकि उनकी पत्नी रश्मि मित्तल को-चांसलर हैं।
राजनीति और कारोबार दोनों में सक्रिय अशोक मित्तल का यह नया राजनीतिक कदम आने वाले समय में पंजाब की राजनीति पर असर डाल सकता है।
आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद मित्तल ने तेजी से अपनी पहचान बनाई। साल 2022 में वह पंजाब से राज्यसभा सांसद बने और इसी के साथ उनकी राजनीति में औपचारिक एंट्री हुई।
राज्यसभा में उन्होंने जल्द ही पार्टी के एक सक्रिय चेहरे के रूप में जगह बना ली। वह अक्सर पंजाब सरकार के कामकाज का बचाव करते नजर आए और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसके अलावा उन्होंने चंडीगढ़ में प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए।
हाल ही में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी दी है। इस पद पर उन्होंने राघव चड्ढा की जगह ली है। इसे पार्टी में उनकी बढ़ती पकड़ और महत्व के तौर पर देखा जा रहा है।
15 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मित्तल के घर और लवली ग्रुप से जुड़े जालंधर और फगवाड़ा के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (FEMA) के तहत कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें मित्तल और उनके बेटे का नाम सामने आया है। जांच के दायरे में परिवार के कारोबार से जुड़े संस्थान, जैसे यूनिवर्सिटी और अन्य ग्रुप कंपनियां भी शामिल रहीं।
ED की इस कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद मित्तल का भाजपा में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि हाल ही में आम आदमी पार्टी में उनका कद तेजी से बढ़ा था।
मित्तल का पार्टी बदलना राज्यसभा में हो रहे बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। अब तक आम आदमी पार्टी के सात सांसद भाजपा में जा चुके हैं। इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या का सीधा असर कानून बनाने की प्रक्रिया पर पड़ता है।