facebookmetapixel
Advertisement
Gold, Silver Price Today: फेड मीटिंग से पहले बाजार में मिक्स ट्रेंड; सोना ₹243 टूटा, चांदी ₹815 उछलीManipal Health IPO: तेज ग्रोथ, भारी कर्ज और गिरता मुनाफा… निवेशक क्या करें?US Fed Meeting: क्या इस बार भी नहीं बढ़ेगी ब्याज दर? Kevin Warsh के फैसले पर टिकी दुनियाभर के बाजारों की नजरOpening Bell: शेयर बाजार में शानदार तेजी! Sensex 700 अंक उछला, Nifty 24,150 के पार; Infosys और L&T ने भरी उड़ानRupee: लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ रुपया, चौथे दिन भी तेजी बरकरारStocks To Watch Today: RVNL, ONGC, LIC, NTPC समेत इन शेयरों पर रखें नजर, दिख सकता है एक्शन‘डिजिटल अरेस्ट’ को अलग अपराध बनाने पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्टकम वेतन से ISRO छोड़ रहे वैज्ञानिक? इस्तीफों के बाद सरकार ने नियम किए सख्तपेपर लीक बिल पर लोकसभा में घमासान, सत्ता और विपक्ष आमने-सामनेकॉपीराइट के नाम पर उगाही का आरोप, Delhi High Court ने केंद्र और Meta को नोटिस भेजा

वित्तीय सेवाओं तक निर्धन तबकों की होगी पहुंच

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 6:45 PM IST

भारत सरकार की वित्तीय समावेश योजना के तहत  राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने उत्तर प्रदेश में कमजोर व कम आय वाले वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच कायम करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। इसके लिए नाबार्ड स्वयं सहायता समूह मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।


बैंक की सूची में बंटाईदार काश्तकार और किसानों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अपने ग्रामीण विकास योजनाओं पर काम करते हुए बैंक, राज्य में 85 से भी अधिक गांवों में समग्र वित्तीय जानकारी मुहैया कराएगा। परियोजना को शुरू करने के लिए नाबार्ड ने राज्य के पांच जिलों को चिन्हित किया है। ये जिले लखीमपुर खीरी, हरदोई, सुल्तान, उन्नाव और रायबरेली है।

नाबार्ड (लखनऊ) के मुख्य महाप्रबंधक सुखबीर सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘अगर पांच गांवों में पायलट कार्यक्रम सफल होती है तो उसे बाद में राज्य के 85 से भी अधिक गांवों में शुरू किया जाएगा।’ उन्होंने बताया कि यह उम्मीद जताई जा रही है कि नई परियोजना को अगले साल तक शुरू कर दिया जाएगा।

वित्तीय समावेश योजना को सफल बनाने के लिए नाबार्ड और केंद्र सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष में दो कोषों की स्थापना की है। वित्तीय समावेश संवर्धन और विकास कोष राज्य में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देगा जबकि वित्तीय समावेश प्रौद्योगिकी कोष का जोर तकनीक को अपनाने पर होगा। प्रत्येक कोष के पास 500 करोड़ रुपये की  प्रारंभिक निधि होगी।

भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड द्वारा सामान रूप से 40:40:20 के अनुपात में प्रत्येक कोष को धन राशि मुहैया कराएगा। सिंह ने बताया, ‘लोगों को अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय सेवाओं का चयन करना और उनका लाभ उठाना चाहिए।’ सिंह ने बताया कि राज्य के कमजोर तबकों को यदि बैंक खाते, बचत और निवेश, ऋण आदि वित्तीय सेवाओं को प्राप्त करने के अवसर दिए जाते हैं तो वे भी वित्तीय रूप से मजबूत होंगे।

Advertisement
First Published - August 26, 2008 | 9:49 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement