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बेंगलूरु की सूरत बदलने में जुटे मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा, राहुल गांधी के करीबी और सिद्धरमैया के हैं भरोसेमंद

कर्नाटक के मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा बेंगलूरु को बेहतर बनाने के लिए सख्त प्रशासनिक फैसलों, अतिक्रमण हटाने और डिजिटल सुधारों के जरिए तेजी से काम कर रहे हैं

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आदिति फडणीस   
Last Updated- July 31, 2026 | 10:01 PM IST
​कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 53 साल के कृष्ण बायरे गौड़ा को बेंगलूरु विकास मंत्री बनाया गया, जो इन दिनों काफी सक्रिय हैं। कुछ सप्ताह पहले वह राज्य के पशुपालन विभाग की एक टीम पर आपा खो बैठे क्योंकि बैठक में मौजूद 19 अधिकारी उन्हें सटीक आंकड़ों के साथ नहीं बता पाए कि कितने कुत्तों की नसबंदी की गई है और बिना नसबंदी के कुत्ते कम हुए हैं या नहीं।

उन्होंने तंज के साथ पूछा, ‘किवि मेले हूवू? आपको क्या लगता है, मैं कान में फूल लगाकर बैठा हूं?’ (यह कन्नड़ मुहावरा है जिसका अर्थ है ‘क्या आप मुझे मूर्ख समझते हैं?’) कुत्तों की नसबंदी में पिछले कुछ सालों में बहुत पैसा खर्च किया गया है। अगर नतीजे संतोषजनक नहीं हैं तो इसकी समीक्षा करनी होगी। लेकिन इसके लिए जो जानकारी चाहिए, वह अधिकारी नहीं दे पाए।

उन्होंने बेंगलूरु के फुटपाथ खाली कराने का अभियान भी शुरू किया है क्योंकि व्यस्त सड़कों और राजमार्गों पर रेहड़ी पटरी वालों के अतिक्रमण की वजह से सड़क पर चलने को मजबूर कई पैदल यात्रियों की जानें गई हैं। उन्होंने विक्रेताओं से कहा, ‘शहर का पूरा अंदरूनी इलाका आपके कारोबार के लिए है। मैं पैदल चलने वालों को जान नहीं गंवाने दूंगा।’

बेंगलूरु में ये रेहड़ी पटरी वाले सियासी तौर पर काफी महत्त्वपूर्ण हैं। लगभग 500 किलोमीटर फुटपाथ से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। उन्होंने सड़क की घटिया मरम्मत के लिए एक अधिकारी को निलंबित किया और एक ठेकेदार पर जुर्माना लगाया। साथ ही उन्होंने ऐसी और कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।

गौड़ा ने ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी कार्यकारी समिति को स्थायी तंत्र बना दिया है, जिसे जीआईएस पर चलने वाले एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद मिलती है। एक दूसरे से तालमेल के साथ योजना बनाने और कार्यान्वयन करने के लिए सभी प्रमुख नागरिक एजेंसियां इस प्लेटफॉर्म पर हैं। इससे विभागों के बीच तालमेल की गंभीर कमी दूर हो सकती है, जो बेंगलूरु की सबसे पुरानी प्रशासनिक नाकामी है।

किरण मजूमदार-शॉ और मोहनदास पई सरकार की लगातार मुखर आलोचना करते हैं मगर दोनों ने गौड़ा के प्रयासों की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। बेंगलूरु कभी सुंदर और हरा-भरा शहर था मगर अब उस पर बेतरतीब झुग्गी बनकर रह जाने का खतरा मंडरा रहा है। बायरे गौड़ा उसके लिए सच्चे मसीहा साबित हो सकते हैं।

गौड़ा 25 वर्षों से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं और 2008 से ही बेंगलूरु उत्तर लोकसभा क्षेत्र की ब्यातरायणपुरा सीट से विधायक हैं। इससे पहले वह कोलार से विधायक थे, जिसका प्रतिनिधित्व पहले उनके पिता और पूर्व मंत्री सी बायरे गौड़ा करते थे। 

कृष्ण शिक्षित, सभ्य गौड़ा हैं। वह वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसका कर्नाटक में खासा सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव है। उन्होंने एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, उनके पास प्रबंधन की डिग्री है, कुछ समय उन्होंने कोलार में केले का बागान चलाया मगर 2003 में पिता के निधन के बाद उनकी सीट संभालने लगे। बाद में वह ब्यातरायणपुरा चले गए, जो आधा शहरी और आधा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है।

वह कृषि की हकीकत अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए कोविड में लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र और कोलार के किसानों की फसलें बाजार तक पहुंचाने में मदद की। वह केंद्र सरकार के कोविड प्रबंधन के कटु आलोचक रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत पहले उन्होंने बाजरा और रागी के समर्थन में अभियान शुरू किया था, लेकिन उन्होंने कभी इस बात का बखान नहीं किया।

हालांकि राज्य में जातिगत राजनीति के पेचों ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को वोक्कालिगा समुदाय के मामले में नाजुक स्थिति में डाल दिया था फिर भी कृष्ण के प्रति उनके मन में विशेष लगाव है। मुख्यमंत्री के तौर पर सिद्धरमैया वित्त मंत्रालय भी संभाल रहे  थे। उन्होंने कृष्ण को अपना कृषि मंत्री और बाद में राजस्व मंत्री नियुक्त किया। कृषि मंत्री के रूप में कृष्ण को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की बैठक में कर्नाटक का प्रतिनिधि बनाकर दिल्ली भेजा जाता था।

कर्नाटक में विनिर्माण से लेकर प्रौद्योगिकी सेवाओं तक विभिन्न उद्योग हैं और जीएसटी से जुड़ी उसकी समस्याएं भी बिल्कुल अलग हैं। कृष्ण ने जिस निष्पक्ष तरीके से जीएसटी पर बात की, उसकी तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और सचिव हसमुख अधिया ने सार्वजनिक सराहना की। एक अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने राजनीति नहीं जनता के मुद्दे पर बात की।’

गौड़ा को राहुल गांधी से अपने मजबूत संबंधों का लाभ मिला, जिनकी 2022 की भारत जोड़ो पदयात्रा के आयोजन में उन्होंने भी काम संभाला था। प्रतिद्वंद्वी कांग्रेसी नेता कभी-कभी उनकी शिक्षा और शहरी पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाते हैं। लेकिन गौड़ा कांग्रेस में एक शांत बदलाव के प्रतीक हैं, जिसमें प्रशासन मॉडल की राजनीति को अहमियत दी जा रही है। यह पार्टी का सबसे भरोसेमंद राजनीतिक कथ्य हो सकता है और विश्वसनीयता की बुनियाद बन सकता है।

सिद्धरमैया के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण उन्हें शिवकुमार और उनके सहयोगी संदेह की नजर से देखते हैं। हालांकि उन्हें बेंगलूरु का मंत्री बनाया गया, लेकिन बेंगलूरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) और बेंगलूरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीएमआरडीए) को उनके विभाग के अधीन नहीं किया गया।

उन्होंने इस पर अपनी असहमति और नाराजगी सार्वजनिक रूप से जताई। उन्होंने सबको याद दिलाया कि मुख्यमंत्री और हाईकमान निश्चित रूप से इस मामले में दखल देंगे। लेकिन इसे उन्होंने अपने काम में बाधा नहीं बनने दिया। शहर उनके हर कदम और गतिविधि पर करीब से नजर रख रहा है, जैसा उन्होंने खुद ही कहा है, ‘अगर बेंगलूरु बिगड़ता है तो समझो कर्नाटक बिगड़ गया।’

First Published : July 31, 2026 | 9:42 PM IST