अमेरिका और दुनिया भर के मुद्रास्फीति संबंधी आंकड़े लगातार बिगड़ रहे हैं और निवेशकों को चिंतित कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 7.5 फीसदी के स्तर पर है जो अनुमान से अधिक है।
क्लीवलैंड फेडरल रिजर्व ने ऊपरी और निचले स्तर को छांट कर एक माध्य सामने रखा है जो रुझान को रेखांकित करता है। यह डेटा शृंखला चार दशक के उच्चतम स्तर पर है। अटलांटा का फेडरल रिजर्व एक शृंखला पेश करता है जहां मुद्रास्फीति को जड़ और लचीले घटकों में बांटा गया है। अनुमान के मुताबिक ही लचीले मूल्य वाला घटक आपूर्ति शृंखला की दिक्कतों और जिंस कीमतों में उछाल को दर्शाता है।
यह मानना उचित होगा कि समय के साथ ये कीमतें सामान्य हो जाएंगी। खेद की बात है कि बाजार कीमतों के प्रतिरोध स्वरूप ठहरी हुई कीमतें भी 30 वर्ष के उच्चतम स्तर पर हैं। यह बहुत चिंताजनक है और मुद्रास्फीति को अस्थायी मानने वाले भी इसे देखकर घबरा रहे हैं। यह तय है कि आने वाले महीनों में शीर्ष मुद्रास्फीति में कमी आएगी लेकिन लचीली कीमतों में तेज इजाफे को देखते हुए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि निकट भविष्य में कीमतें फेड के दो फीसदी के लक्ष्य तक कम होंगी। किराया बाजार की मुद्रास्फीति भी बढ़ रही है और उस पर भी नजर रखनी होगी। यदि इसमें भी तेज इजाफा हुआ तो बिना मौद्रिक कड़ाई के मुद्रास्फीति को दो फीसदी तक कम करना लगभग नामुमकिन होगा।
मेहनताने पर फेडरल रिजर्व अटलांटा ने डरावने आंकड़े पेश किए हैं और कहा कि इसमें पांच फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसा इसलिए कि नियोक्ता कामगारों को श्रम बाजार में वापस बुलाना चाहते हैं।
ये आंकड़े बॉन्ड बाजार और शेयर बाजार को तेज करने में मदद कर रहे हैं। दो वर्ष के टे्रजरी बॉन्ड का प्रतिफल गत वर्ष सितंबर के 0.2 फीसदी से बढ़कर आज 1.6 फीसदी हो गया है। 10 वर्ष का ट्रेजरी प्रतिफल दो फीसदी का स्तर पार कर चुका है। यदि यहां से रुझान में कुछ अलग बदलाव आता है तो परिसंपत्ति बाजारों में उथलपुथल मच सकती है। 10 वर्ष और दो वर्ष का प्रतिफल कर्व जो हालिया अतीत में 150 आधार अंकों के सकारात्मक विस्तार वाला था वह अब घटकर 50 आधार अंक रह गया है। शायद इसे आगामी मंदी का संकेतक माना जा सकता है।
ऐसा लगता है कि बाजार और अर्थशास्त्री दोनों बढ़ते मुद्रास्फीतिक अनुमान के साथ तालमेल करना चाहते हैं जबकि आंकड़े बिगड़ते ही जा रहे हैं। अधिकांश बाजार प्रतिभागियों की आशा है कि 2022 में कम से कम पांच बार दरें बढ़ाई जाएंगी।
मूल व्यक्तिगत खपत व्यय मुद्रास्फीति के पांच फीसदी होने तथा फेड के दो फीसदी के लक्ष्य को देखते हुए बहस स्पष्ट रूप से यह है कि 300 आधार अंकों के इस अंतर में कितना हिस्सा चक्रीय मुद्रास्फीति का है और कितना कोविड/आपूर्ति क्षेत्र से संबंधित है क्योंकि वह तो समय के साथ स्वयं सुधर जाएगा। फेडरल रिजर्व तथा कई अन्य अर्थशास्त्री मुद्रास्फीति के लिए जिस मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं वहां मुद्रास्फीति अनुमान का काम है और इसका संबंध अर्थव्यवस्था की गति में धीमेपन से भी है। मूल मुद्रास्फीति में जितना धीमापन लाना होता है अर्थव्यवस्था में उतनी ही सुस्ती लानी होती है। यह इतना आसान नहीं लेकिन उपयोगी अवश्य है।
यदि मान लिया जाए कि इस मुद्रास्फीति में 150-200 आधार अंक हिस्सा चक्रीय है तो फेडरल रिजर्व द्वारा अर्थव्यवस्था में काफी अधिक धीमापन लाने की जरूरत होगी। मैंने इस पर कई मॉडल देखे हैं और कई लोगों का कहना है कि चक्रीय मुद्रास्फीति को 150-200 आधार अंकों तक कम करने के लिए जरूरी सुस्ती लाने के पहले यह आवश्यक है कि बेरोजगारी में 400 आधार अंकों तक का इजाफा हो जाए। यह बाजार के लिए झटका होगा क्योंकि अमेरिका में बेरोजगारी में इतना इजाफा केवल मंदी की स्थिति में हो सकता है। यदि मंदी आती है तो कारोबारी मुनाफे पर बुरा असर होगा तथा बाजार और गिरेंगे। ऐसे में किसी भी निवेशक के लिए यह तय करना अहम होगा कि मौजूदा मुद्रास्फीति संबंधी तेजी में कितनी तेजी चक्रीय है तथा कितनी कोविड के कारण उपजी अस्थायी।
फेडरल रिजर्व के मौद्रिक कड़ाई के एजेंडे में एक पहलू डेट के समीकरणों की बदौलत भी है। पिछली बार अमेरिकी मुद्रास्फीति 1978 में 7.5 फीसदी के स्तर पर पहुंची थी। तब संघीय कर्ज/सकल घरेलू उत्पाद 32 फीसदी था। आज वहीं आंकड़ा 130 फीसदी से अधिक है। संघीय सरकार का कर्ज 30 लाख करोड़ डॉलर से अधिक है। यदि प्रतिफल में 150 आधार अंकों का इजाफा भी होता है तो समय के साथ ब्याज लागत में 450 अरब डॉलर का अतिरिक्त इजाफा होगा। अमेरिका का वर्तमान कर आधार करीब दो लाख करोड़ डॉलर का है। क्या वह राजस्व में 20 फीसदी की चरणबद्ध वृद्धि कर सकेगा ताकि बिना कर्ज के जाल में फंसे कर्ज का निपटान कर सके? अभी हम व्यापक अर्थव्यवस्था और खपत की तो बात ही नहीं कर रहे हैं। रिकॉर्ड कम ब्याज दर ने उपभोक्ता और कॉर्पोरेट बैलेंस शीट में कई कमियों को छिपा लिया है। कई अर्थशास्त्रियों को लगता है कि यदि दरों में 150 आधार अंक का इजाफा हुआ तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ठहराव आ जाएगा।
मुद्रास्फीति वास्तव में चिंता का विषय है। इसे लेकर भी दो खेमे हैं। एक का मानना है कि यह अस्थायी है और अब अपने चरम पर पहुंचने ही वाली है जबकि दूसरे का मानना है कि फेडरल रिजर्व कुछ ज्यादा ही आश्वस्त है और अब दरों में जल्दी तथा आक्रामक वृद्धि करने की आवश्यकता है। दोनों पक्ष तगड़ी दलील देते हैं। मुझे आशा है कि मुद्रास्फीति को अस्थायी समझने वाले हों क्योंकि अगर हम मुद्रास्फीति से सतत जंग में उलझ गए तो बाजार में काफी अधिक गिरावट आ सकती है। अधिकांश सक्रिय निवेशकों ने कभी सतत रूप से ऊंची मुद्रास्फीति नहीं देखी है।
अभी भी तयशुदा आय के बाजारों को यह आशा नहीं है कि मुद्रास्फीति 12 से 18 महीने से अधिक समय तक ऊंचे स्तर पर रहेगी। यदि ये अनुमान गलत हुए और मुद्रास्फीति अनुमान से ज्यादा लंबे समय तक बढ़ती रही तो हालात बिगड़ सकते हैं। यह व्यवस्था बदलाव की शुरुआत हो सकती है। व्यवस्था बदलाव का अर्थ होगा सह संबंधों का ध्वस्त होना तथा मूल्यांकन का नये सिरे से तय होना। इसका न केवल शेयर और बॉन्ड बल्कि मुद्राओं, सोने और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों पर गहरा असर होगा। यदि वास्तव में मुद्रास्फीति बेलगाम बढ़ी तो कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
(लेखक अमांसा कैपिटल से संबद्ध हैं)