प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में रिटायरमेंट फंड को मैनेज करने वाली संस्था PFRDA नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। इस बदलाव का मुख्य मकसद निवेशकों के पैसों को बाजार के भारी उतार-चढ़ाव से बचाना और लंबे समय में एक सुरक्षित व बेहतर रिटर्न देना है।
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने बताया कि इसके लिए एक खास कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी इस बात का स्टडी कर रही है कि पेंशन के पैसों को किन नए सुरक्षित जगहों (Asset Classes) में निवेश किया जा सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब NPS से जुड़ने वाले लोगों की संख्या और इसका कुल फंड (कॉर्पस) बहुत तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रेगुलेटर पर मुनाफा कमाने के साथ-साथ लोगों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने का दबाव भी बढ़ गया है।
आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने तक NPS के ग्राहकों की संख्या 2.17 करोड़ पहुंच चुकी थी। वहीं, इसके तहत कुल 15.95 लाख करोड़ का फंड मैनेज किया जा रहा था। अनुमान है कि इस साल NPS से जुड़ने वाले नए ग्राहकों की संख्या में 22 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है।
इस भारी-भरकम रकम को सही जगह लगाना एक बड़ी चुनौती है। PFRDA के चेयरमैन के मुताबिक, ऐसी स्थिति में ऐसे नए विकल्पों को देखना होगा जो बिना किसी बड़े उतार-चढ़ाव के लंबे समय तक लगातार और स्थिर ग्रोथ दे सकें। उन्होंने साफ कहा कि पेंशन फंड इस तरह काम नहीं कर सकते कि किसी एक साल में तो बहुत ज्यादा रिटर्न मिल जाए और अगले ही साल उसमें भारी गिरावट आ जाए।
अगर मौजूदा समय की बात करें तो अभी NPS का पैसा ज्यादातर शेयर बाजार (इक्विटी), कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड (जी-सेक) और कुछ वैकल्पिक निवेश फंडों में लगाया जाता है। लेकिन अगर दुनिया के बड़े पेंशन फंड्स को देखें, तो वे अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट से जुड़े निवेश और प्राइवेट डेट जैसे विकल्पों में भी पैसा लगा रहे हैं। इन जगहों पर लंबे समय तक अपेक्षाकृत स्थिर और तय कमाई मिलने की संभावना रहती है।
PFRDA भी अब इसी ग्लोबल मॉडल की स्टडी कर रहा है, ताकि निवेशकों के लिए ज्यादा सुरक्षित तरीका तैयार किया जा सके। रिटायरमेंट के नजरिए से यह काफी अहम है, क्योंकि पेंशन का पैसा कई दशकों तक बाजार में लगा रहता है। ऐसे में अगर रिटायरमेंट के ठीक पहले बाजार में बड़ी गिरावट आ जाए, तो निवेशक की कुल जमा रकम पर बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले बदलावों का मकसद इसी जोखिम को कम करना है।
अगर रेगुलेटर की यह योजना जमीन पर उतरती है, तो आम निवेशकों को कई बड़े फायदे हो सकते हैं:
फिलहाल, युवा निवेशकों का ज्यादा पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है और उम्र बढ़ने के साथ इसे धीरे-धीरे घटाया जाता है। नए नियमों के आने के बाद अलग-अलग उम्र के हिसाब से इस निवेश प्रक्रिया को और भी ज्यादा सटीक और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
निवेश के तरीके बदलने के साथ-साथ PFRDA एक और बड़े बदलाव पर भी विचार कर रहा है। यह बदलाव है मिनिमम एश्योर्ड पेंशन यानी न्यूनतम गारंटीड पेंशन का।
PFRDA के अध्यक्ष एस. रमन ने संकेत दिए हैं कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (UPS) लाने का विकल्प अभी भी खुला है। दरअसल, पारंपरिक पेंशन योजनाओं के मुकाबले NPS पूरी तरह बाजार से जुड़ा हुआ है, यानी इसमें मिलने वाले रिटर्न की कोई तय गारंटी नहीं होती। यही वजह है कि नौकरीपेशा लोग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिल सके।
हालांकि, गारंटीड रिटर्न देना इतना आसान नहीं है। एस. रमन के मुताबिक, गारंटी देने के लिए किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उदाहरण के तौर पर ‘अटल पेंशन योजना’ में तय पेंशन की गारंटी का खर्च सरकार उठाती है। ऐसे में अगर भविष्य में NPS में भी कोई गारंटीड मॉडल लाया जाता है, तो उसके लिए या तो सरकार को आर्थिक सहयोग देना होगा, कर्मचारियों का योगदान बढ़ाना होगा, या फिर रिटर्न की उम्मीदों को थोड़ा कम करना पड़ेगा।
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PFRDA अब देश की उस बड़ी आबादी तक पहुंच बढ़ाना चाहता है, जो अभी तक पेंशन व्यवस्था से बाहर है। रेगुलेटर का खास फोकस किसानों, खेतिहर मजदूरों, MSME सेक्टर से जुड़े कामगारों और स्वयं सहायता समूहों पर है।
एक अनुमान के मुताबिक, देश के अनौपचारिक क्षेत्र में करीब 20 से 25 करोड़ लोग काम करते हैं। साथ ही भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सरकारी और कॉर्पोरेट सेक्टर से बाहर काम करने वाले ज्यादातर लोगों के पास न तो सामाजिक सुरक्षा है और न ही पेंशन की सुविधा। आज भी करोड़ों परिवार बुढ़ापे में जमीन, सोने या परिवार के सहारे पर निर्भर रहते हैं। सरकार अब इस स्थिति को बदलकर ज्यादा लोगों को पेंशन व्यवस्था से जोड़ना चाहती है।
इसके साथ ही PFRDA, ‘अटल पेंशन योजना’ (APY) के तहत मिलने वाली अधिकतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन की सीमा बढ़ाने की मांग पर भी विचार कर रहा है। रमन ने कहा कि यह ऐसी योजना है, जिसमें लोगों को कई सालों तक पेंशन देने की जिम्मेदारी सरकार पर रहती है। यही वजह है कि इस तरह के किसी भी फैसले का असर सरकारी खर्च और भविष्य की आर्थिक जिम्मेदारियों पर पड़ता है। इसलिए इस मामले में अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं का विस्तार से आकलन किया जा रहा है।
रेगुलेटर इस मामले में वित्तीय सेवा विभाग यानी DFS के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करेगा। PFRDA अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष में APY से जुड़े कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या 10 करोड़ के पार पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अब 18 से 25 साल के युवा भी अपने भविष्य और बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए इस योजना से तेजी से जुड़ रहे हैं। इसे देश में पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर बढ़ती जागरूकता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।