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बिना RERA रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में न लगाएं पैसा, बुकिंग से पहले करें ये जांच

प्रमोटर अगर तय तारीख तक कब्जा नहीं दे पाता है, तो खरीदार प्रोजेक्ट से हट सकता है और ब्याज के साथ चुकाई गई पूरी रकम वापस पाने का दावा कर सकता है

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संजय कुमार सिंह   
Last Updated- August 19, 2026 | 7:51 PM IST

हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने को लेकर घर खरीदारों को आगाह किया है। अथॉरिटी ने खरीदारों से अपील की है कि किसी भी प्रॉपर्टी की बुकिंग या निवेश से पहले RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी जानकारी जरूर जांच लें। खासकर प्री-लॉन्च ऑफर के नाम पर किए जा रहे निवेश में सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे प्रोजेक्ट्स में कानूनी और वित्तीय जोखिम अधिक हो सकते हैं।

खरीदार क्यों जोखिम उठाते हैं?

खरीदार अक्सर प्री-लॉन्च स्टेज पर किसी प्रोजेक्ट में शामिल होने से मिलने वाले संभावित फाइनेंशियल फायदे से आकर्षित होते हैं। ORAM डेवलपमेंट्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप मिश्रा कहते हैं, “डेवलपर्स अक्सर उन खरीदारों को कम रेट ऑफ़र करते हैं जो प्री-लॉन्च स्टेज पर बुकिंग करते हैं।” पुराना अनुभव इस व्यवहार को और मजबूत कर सकता है। प्रदीप मिश्रा कहते हैं, “जिन खरीदारों को पहले प्री-लॉन्च में खरीदारी से फायदा हुआ है, वे फिर से ऐसे ही फायदे की उम्मीद करते हैं।” हालाँकि, अगर मार्केट में सुस्ती आती है, तो ऐसे हिसाब-किताब गलत साबित हो सकते हैं।

वित्तीय और कानूनी जोखिम

बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में कई तरह के जोखिम हो सकते हैं। अनारॉक ग्रुप के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार कहते हैं, “हो सकता है कि प्रोजेक्ट को जरूरी मंजूरी न मिल पाए।” अगर डेवलपर बुकिंग से काफी पैसा नहीं जुटा पाता है, तो प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाता। मिश्रा कहते हैं, “ऐसे हालात में, शुरुआती निवेशकों का पैसा फंस सकता है।” कंस्ट्रक्शन में देरी या काम का पूरी तरह रुक जाना भी एक चिंता की बात है। कुमार कहते हैं, “ऐसा इसलिए है क्योंकि यह पक्का करने के लिए कोई अनिवार्य एस्क्रो (escrow) व्यवस्था नहीं है कि फंड का इस्तेमाल सिर्फ उसी प्रोजेक्ट के लिए हो।” दिक्कतें सिर्फ कंस्ट्रक्शन तक ही सीमित नहीं रहतीं। कुमार बताते हैं कि जमीन के मालिकाना हक (land title) में भी गड़बड़ी हो सकती है।

देखें कि छूट मान्य है या नहीं

RERA रजिस्ट्रेशन नंबर न होने से कोई प्रोजेक्ट अपने-आप गैर-कानूनी नहीं हो जाता। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA) में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से कुछ मामलों में छूट दी गई है। स्क्वायर यार्ड्स के को-फाउंडर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अनुपम रस्तोगी कहते हैं, “कुछ छोटे प्रोजेक्ट्स, जो तय सीमा से कम दायरे में आते हैं, उन्हें अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से छूट मिल सकती है।” जिन प्रोजेक्ट्स को RERA लागू होने से पहले जरूरी कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल गया था, उन्हें भी छूट मिल सकती है।

मरम्मत या रीडेवलपमेंट के कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स जिनमें यूनिट्स की नई मार्केटिंग या बिक्री नहीं होती, वे भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के दायरे से बाहर हो सकते हैं। रस्तोगी कहते हैं, “खरीदार को डेवलपर से साफ तौर पर पूछना चाहिए कि रजिस्ट्रेशन की जरूरत क्यों नहीं है और इस बात को साबित करने वाले दस्तावेज भी मांगने चाहिए।”

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रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में मिलने वाली सुरक्षा

RERA रजिस्ट्रेशन किसी प्रोजेक्ट को एक कानूनी दायरे में लाता है, जिसके तहत प्रमोटर को जानकारी देनी होती है, साथ ही उसे फाइनेंशियल डिसिप्लिन और जवाबदेही भी बनाए रखनी होती है। खरीदारों को यह भरोसा मिलता है कि RERA-रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

बिक्री के एग्रीमेंट में दोनों पक्षों की कानूनी जिम्मेदारियों का जिक्र होता है। रस्तोगी कहते हैं, “इसमें कब्जा देने के बारे में प्रमोटर के वादे और खरीदार की पेमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।” रजिस्ट्रेशन से खरीदारों को प्रोजेक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी भी मिलती है। किंग स्टब एंड कासिवा, एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर अदनान सिद्दीकी कहते हैं, “रजिस्ट्रेशन के समय, प्रमोटर को स्वीकृत किया गया लेआउट, स्वीकृत प्लान, जमीन का मालिकाना हक, सरकारी मंजूरी, कंस्ट्रक्शन की समय-सीमा और प्रमोटर की जानकारी RERA पोर्टल पर अपलोड करनी होती है।”

ऐसे में खरीदारों के पैसे का गलत इस्तेमाल होने की संभावना कम होती है। रेरा (RERA) के नियमों के अनुसार, किसी प्रोजेक्ट के लिए खरीदारों से इकट्ठा की गई रकम का 70 प्रतिशत हिस्सा एक अलग बैंक खाते में रखना जरूरी है और इसका इस्तेमाल उसी प्रोजेक्ट की जमीन और कंस्ट्रक्शन के खर्चों के लिए ही किया जा सकता है। सिद्दीकी कहते हैं, “यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि एक प्रोजेक्ट के लिए खरीदारों से मिले पैसे का इस्तेमाल किसी दूसरे प्रोजेक्ट में न किया जा सके।”

प्रमोटरों को मंजूरी मिले प्लान का भी पालन करना होगा। सिद्दीकी कहते हैं, “प्रमोटर, कम से कम दो-तिहाई खरीदारों की लिखित मंजूरी के बिना किसी अपार्टमेंट, प्लॉट या बिल्डिंग के मंजूर किए गए प्लान, लेआउट या स्पेसिफिकेशन में कोई बदलाव नहीं कर सकते। वे ऐसी ही मंजूरी के बिना कोई नया स्ट्रक्चर या कॉमन एरिया भी नहीं जोड़ सकते।”

प्रोजेक्ट फेल होने पर समाधान

जब कोई प्रमोटर अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पाता, तो RERA खरीदारों को अपनी शिकायतें दूर करने के लिए एक मंच देता है। मिश्रा कहते हैं, “अगर कब्जा मिलने में देरी होती है, कंस्ट्रक्शन का काम धीमा है, डेवलपर अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता या सेवाओं में कोई कमी है, तो वे एक रेगुलेटरी फोरम से संपर्क कर सकते हैं।”

रजिस्ट्रेशन के समय, प्रमोटर को काम पूरा होने या कब्जा देने की एक तय तारीख बतानी होती है। अगर प्रमोटर उस तारीख तक कब्जा नहीं दे पाता है, तो खरीदार प्रोजेक्ट से हट सकता है और ब्याज के साथ चुकाई गई पूरी रकम वापस पाने का दावा कर सकता है। सिद्दीकी कहते हैं, “जो खरीदार निवेश बनाए रखता है, वह प्रमोटर के कब्जा देने तक हर महीने की देरी के लिए ब्याज का दावा कर सकता है।”

अगर कब्जा मिलने के पांच साल के अंदर काम की बनावट या क्वालिटी में कोई कमी आती है, तो खरीदार प्रमोटर से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उन्हें ठीक करने के लिए कह सकता है। अगर प्रमोटर तय समय के अंदर ऐसी कमियों को ठीक नहीं कर पाता है, तो खरीदार मुआवजे की मांग कर सकता है।

अगर प्रमोटर मंजूर किए गए प्लान या स्पेसिफिकेशन में बिना मंजूरी के कोई बड़ा बदलाव करता है, तो अलॉटी राहत की मांग कर सकता है। सिद्दीकी कहते हैं, “बिना जरूरी मंजूरी के बड़े बदलाव करने पर मुआवजे का दावा किया जा सकता है और, जहां जरूरी हो, प्रोजेक्ट रद्द करके पैसे वापस भी मांगे जा सकते हैं।”

प्रोजेक्ट के फेल होने या प्रमोटर के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई जैसे गंभीर मामलों में, अथॉरिटी जांच कर सकती है, निर्देश जारी कर सकती है और एक्ट के तहत दूसरे कदम उठा सकती है। प्रोजेक्ट को पूरी तरह से बीच में ही छोड़ देने पर मुआवजे का दावा किया जा सकता है और, जहां जरूरी हो, प्रोजेक्ट रद्द करके पैसे वापस भी मांगे जा सकते हैं।

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क्या आपने पहले ही बुकिंग कर ली है? तो जल्दी करें

सबसे पहले, यह पता लगाएं कि प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड क्यों नहीं है। यह तय करें कि क्या यह सच में छूट के दायरे में आता है, क्या इसे रजिस्टर होना चाहिए था पर नहीं हुआ, या फिर इसका रेगुलेटरी स्टेटस बदल गया है। ट्रांजैक्शन से जुड़े सभी कागज और डिजिटल रिकॉर्ड संभालकर रखें: बुकिंग और एप्लीकेशन फॉर्म, अलॉटमेंट लेटर, एग्रीमेंट, रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और UPI रिकॉर्ड, डिमांड लेटर, ब्रोशर और विज्ञापन।

साथ ही, प्रोजेक्ट का लेआउट और स्पेसिफिकेशन, डेवलपर और ब्रोकर के साथ बातचीत के रिकॉर्ड, और मंजूरी, कब्जे या RERA रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज या जानकारी भी संभालकर रखें। रस्तोगी कहते हैं, “सिर्फ इसलिए कुछ भी डिलीट या सरेंडर न करें क्योंकि प्रमोटर मामले को सुलझाने का वादा कर रहा है।” जुबानी वादों पर भरोसा न करें। आगे कोई भी कमिटमेंट करने से पहले सही कानूनी सलाह लें।

साथ ही, जब तक आप खुद प्रोजेक्ट के कानूनी स्टेटस का पता न लगा लें, तब तक कोई अतिरिक्त पेमेंट न करें और न ही कोई नया एग्रीमेंट साइन करें। अगर प्रोजेक्ट के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी था, लेकिन प्रमोटर ने बिना रजिस्ट्रेशन के ही उसकी मार्केटिंग या बिक्री की, तो RERA में शिकायत दर्ज करें।

सिद्दीकी कहते हैं, “ऐसे प्रोजेक्ट में यूनिट की मार्केटिंग, विज्ञापन, बुकिंग या बिक्री करना, जिसका रजिस्ट्रेशन होना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ है, एक्ट की धारा 59(2) के तहत प्रमोटर के लिए सजा-योग्य अपराध है।” खरीदार सर्विस में कमी या गलत व्यापारिक तरीकों (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) के दावों के लिए कंज्यूमर फोरम का भी रुख कर सकते हैं। सिद्दीकी कहते हैं, “कंज्यूमर से जुड़ी कार्यवाही RERA में की गई शिकायत के साथ-साथ चल सकती है।”

अगर तथ्यों से पता चलता है कि मामला ज्यादा गंभीर गड़बड़ी का है, तो अतिरिक्त कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है। सिद्दीकी कहते हैं, “अगर सीधे तौर पर धोखाधड़ी, जाली मंजूरी या प्रमोटर के पैसे लेकर भागने जैसे संकेत मिलते हैं, तो पुलिस या इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को भी शामिल किया जाना चाहिए।”

ट्रांजैक्शन में शामिल एजेंट के रजिस्ट्रेशन स्टेटस की भी जांच करें। खरीदार प्रमोटर के साथ-साथ एजेंट के खिलाफ भी शिकायत कर सकते हैं। सिद्दीकी कहते हैं, “बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट की बिक्री में मदद करने वाले एजेंट धारा 9 के तहत अलग से जिम्मेदार होते हैं और नियमों का उल्लंघन जारी रखने पर उन्हें रोजाना जुर्माना भरना पड़ सकता है।”

बुकिंग से पहले RERA पोर्टल पर ये जांचें करें

• बुकिंग की रकम देने से पहले पक्का करें कि प्रोजेक्ट का राज्य के RERA पोर्टल पर एक्टिव RERA रजिस्ट्रेशन है
• रजिस्ट्रेशन नंबर को ब्रोशर, विज्ञापनों और एग्रीमेंट के ड्राफ्ट से मिलाएं
• प्रमोटर या कंपनी के नाम को ब्रोशर, विज्ञापनों और एग्रीमेंट के ड्राफ्ट से मिलाएं
• प्रोजेक्ट के सही नाम और मंजूरी मिली लोकेशन को ब्रोशर और एग्रीमेंट के ड्राफ्ट से मिलाएं
• प्रोजेक्ट के डॉक्यूमेंट्स के आधार पर रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी की अवधि जांचें
• प्रमोटर के नाम में अंतर या एक्सपायर हो चुके रजिस्ट्रेशन को चेतावनी का संकेत (red flag) मानें

स्रोत: अनारॉक ग्रुप

 

First Published : August 19, 2026 | 7:51 PM IST