प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
ITR Filing 2026-27: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय छोटी-मोटी गलतियां होना काफी आम बात है। कई बार जल्दबाजी में गलत इनकम दर्ज हो जाती है, तो कभी कोई डिडक्शन क्लेम करना छूट जाता है। अगर आपने 31 जुलाई की तय तारीख तक या उससे पहले अपना ITR फाइल कर दिया और बाद में आपको अपनी गलती का अहसास हुआ, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट आपको अपनी इस भूल को सुधारने का मौका देता है। आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करके अपने ITR में सुधार कर सकते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो रिवाइज्ड रिटर्न का मतलब अपने पुराने टैक्स फॉर्म की गलतियों या कमियों को सुधारकर नया फॉर्म फाइल करना है। इसके जरिए आप अपनी इनकम की गलत जानकारी, छूटे हुए डिडक्शन, बैंक अकाउंट की गलत डिटेल्स या छूटे हुए टैक्स क्रेडिट (TDS/TCS) को ठीक कर सकते हैं।
एक बार जब आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर देते हैं, तो यह आपके पुराने (मूल) रिटर्न की जगह ले लेता है। यानी टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में आपका नया रिवाइज्ड रिटर्न ही मान्य माना जाएगा। इतना ही नहीं, अगर आपने गलती से गलत ITR फॉर्म चुन लिया था, तो उसे भी सुधारा जा सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं, “अगर ITR भरते समय आपसे गलत फॉर्म चुन लिया गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कानून आपको रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करके अपनी गलती सुधारने का मौका देता है। मसलन, अगर आपको कैपिटल गेन होने की वजह से ITR-2 भरना चाहिए था, लेकिन आपने गलती से ITR-1 भर दिया, तो आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करके सही फॉर्म चुन सकते हैं।”
इनकम टैक्स के नियमों में ऐसा कोई पाबंदी नहीं है कि आप ITR कितनी बार रिवाइज कर सकते हैं। अगर रिटर्न भरने के बाद आपको कोई नई गलती पता चलती है, तो तय समय-सीमा के अंदर आप उसे सुधारते हुए दोबारा रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया एक से ज्यादा बार भी की जा सकती है।
हालांकि, जैन की सलाह है कि ITR को बार-बार रिवाइज करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि पहले रिटर्न की अच्छी तरह जांच कर लें, सभी गलतियों की लिस्ट बना लें और फिर एक ही बार में उन्हें सुधारकर रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें। इससे प्रक्रिया आसान रहती है और टैक्स डिपार्टमेंट का ध्यान भी आपकी ओर नहीं जाता।
ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन कहती हैं कि रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करते समय कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना जरूरी है:
यदि रिवाइज्ड रिटर्न असेसमेंट ईयर के समाप्त होने के 9 महीने बाद लेकिन 12 महीने से पहले फाइल किया जाता है, तो लेट फीस इस प्रकार देनी होगी:
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जैन का कहना है कि अगर आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की तय समय-सीमा भी चूक जाते हैं, तब भी आपके पास अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) फाइल करने का ऑप्शन रहता है। टैक्सपेयर्स संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद 48 महीने के भीतर ITR-U फाइल कर अपनी गलती सुधार सकते हैं।
हालांकि, ITR-U फाइल करने पर सिर्फ बकाया टैक्स और उस पर लगने वाला ब्याज ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ता है। यह अतिरिक्त टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आप ITR-U कितनी देर से फाइल कर रहे हैं। नियम इस प्रकार हैं:
दोनों टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ITR में हुई गलती को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आपने गलत ITR फॉर्म भरा है या जरूरी जानकारी छिपाई है, तो इनकम टैक्स डिपार्टिमेंट आपके रिटर्न को अमान्य (Invalid) घोषित कर सकता है।
ऐसी स्थिति में आपका टैक्स रिफंड अटक सकता है, इनकम टैक्स डिपार्टिमेंट का नोटिस आ सकता है और ब्याज के साथ पेनल्टी भी भरनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, अगर आपको कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा मिलना था, तो वह अधिकार भी खत्म हो सकता है। अगर तय समय-सीमा के भीतर गलती नहीं सुधारी गई, तो टैक्स डिपार्टमेंट यह मान सकता है कि आपने ITR फाइल ही नहीं किया था।