प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
8वें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और पेंशन में बदलाव की प्रक्रिया अब अगले अहम चरण में पहुंच गई है। मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से जरूरी डेटा और जानकारी जुटाने के लिए तय की गई समय-सीमा अब पूरी हो चुकी है। इसका मतलब यह है कि 8वें वेतन आयोग के पास अब वह जरूरी आंकड़े मौजूद हैं, जिनके आधार पर आयोग अपनी समीक्षा और आगे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
सैलरी और पेंशन में बदलाव की इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी विभागों से जानकारी जुटाना सबसे अहम चरणों में से एक था। इसके तहत सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने कर्मचारियों की संख्या, मौजूदा वेतन, भत्ते, खाली पद और नए वेतनमान लागू होने पर सरकार पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ की पूरी जानकारी आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी थी।
हालांकि, कई विभागों ने डेटा जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसी वजह से इसकी आखिरी तारीख 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई थी। अब यह बढ़ी हुई समय-सीमा भी खत्म हो चुकी है। इसके साथ ही आयोग के लिए डेटा जुटाने का यह चरण आधिकारिक तौर पर पूरा हो गया है।
अब आयोग इन्हीं आंकड़ों के आधार पर यह आकलन करेगा कि नए वेतनमान और पेंशन में बदलाव का सरकार के खजाने पर कितना असर पड़ेगा।
डेटा जुटाने की प्रक्रिया पूरी होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि नए वेतनमान को मंजूरी मिल गई है या कर्मचारियों की सैलरी में जल्द बढ़ोतरी होने वाली है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को नए वेतन और पेंशन के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना होगा।
आयोग को अब हजारों पन्नों में मौजूद प्रशासनिक और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करना है। इसके अलावा, सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपनी होंगी।
इसके बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल इन सिफारिशों पर फैसला करेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही नया वेतनमान और संशोधित पेंशन व्यवस्था लागू की जा सकेगी।
कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें और सुझाव पहले ही सौंप दिए हैं। उनकी सबसे बड़ी मांगों में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाना, महंगाई भत्ते (DA) के फॉर्मूले में बदलाव, टैक्स में राहत, अलग-अलग भत्तों में सुधार और भविष्य में वेतन बदलाव की प्रक्रिया को ज्यादा बेहतर बनाना शामिल है।
इसके अलावा, कर्मचारी संगठनों ने पेंशन से जुड़े फायदे और सेवा शर्तों में सुधार की मांग भी रखी है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार आमतौर पर हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग बनाती है। यह आयोग महंगाई, जीवनयापन की लागत, देश की आर्थिक स्थिति और सरकार की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करता है।
फिलहाल 8वें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें कब सौंपेगा, इसकी कोई तय तारीख सामने नहीं आई है। हालांकि, डेटा जुटाने का काम पूरा हो चुका है और देशभर में कर्मचारी संगठनों व अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा का दौर जारी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में आयोग अपनी रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।