राजनीति

उपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, दतिया भी नहीं जीत सकी BJP

खास बात यह कि बांकीपुर में भाजपा उम्मीदवार ​नीरज कुमार सिन्हा को जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों से हराया। राजद उम्मीदवार यहां तीसरे स्थान पर रहा

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- August 03, 2026 | 10:32 PM IST

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सोमवार को आए उपचुनावों के परिणाम में गहरा धक्का लगा है। बिहार की बेहद प्रति​ष्ठित बांकीपुर सीट से उसे हार का सामना करना पड़ा जो 2008 से ही उसका गढ़ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 2010 से 2025 तक लगातार चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। भाजपा मध्य प्रदेश की दतिया सीट भी कांग्रेस से नहीं ले पाई। पार्टी को एकमात्र राहत की खबर गुजरात से है, जहां उसने वडोदरा की मांजलपुर सीट बरकरार रखी। तीनों राज्यों की तीन सीटों पर मतदान 30 जुलाई को हुआ था।

खास बात यह कि बांकीपुर में भाजपा उम्मीदवार ​नीरज कुमार सिन्हा को जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों से हराया। राजद उम्मीदवार यहां तीसरे स्थान पर रहा। प्रशांत किशोर में पूर्व में भाजपा के लिए चुनावों में जीत की रणनीति बनाने में भूमिका निभा चुके हैं।

सम्राट चौधरी के इसी साल 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में यह पहला विधान सभा उपचुनाव था। राजग ने बीते साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधान सभा चुनाव नी​तीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा और जीत के बाद उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन कुछ माह बाद ही उन्हें राज्य सभा भेज सम्राट को मुख्यमंत्री बनाया था। किशोर के लिए भी यह पहला चुनाव था, उनकी जन सुराज पार्टी ने पिछले विधान सभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन किया था और उसके 238 में से 236 उम्मीदवारों ने जमानत गंवा दी थी।

नितिन नवीन का गढ़ रही है बांकीपुर

वर्ष 2008 में पटना प​श्चिम से काटकर बांकीपुर सीट बनाई गई थी। यहां से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा 1995 से 2005 तक पार्टी का प्रतिनि​धित्व किया। उसके बाद 2006 में अपने पिता के निधन के बाद हुए उपचुनाव में नितिन नवीन ने पटना पश्चिम से जीत हासिल की। उस उपचुनाव में नवीन ने डाले गए वोटों में 82 प्रतिशत हासिल किए थे। उसके बाद हुए सभी चुनाव में नवीन बांकीपुर  सीट से जीतते रहे, लेकिन इसी साल अप्रैल में राज्य सभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने यह सीट खाली कर दी थी।

जीत के बाद प्रशांत किशोर ने किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर विधान सभा उपचुनाव में उनकी जीत भाजपा, कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियों के असंतुष्ट समर्थकों के समर्थन  से संभव हुई है। किशोर ने कहा, ‘आपको देखना चाहिए कि बांकीपुर  के लोगों ने स्थापित पार्टियों को छोड़कर हमें वोट दिया है।’

दतिया ने दिया संदेश

दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,000 से अधिक मतों से हराया। पूर्व राज्य गृह मंत्री भाजपा के नरोत्तम मिश्रा ने 2008, 2013 और 2018 में दतिया सीट का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन 2023 का चुनाव कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे। भारती को इस साल की शुरुआत में एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था। पार्टी की ओर से टिकट नहीं दिए जाने के बाद मिश्रा के समर्थकों ने 11 जुलाई को दतिया में कुछ घंटों के लिए राजमार्ग अवरुद्ध कर अपना विरोध दर्ज कराया था।

कांग्रेस नेताओं ने इस जीत को देश भर के छात्रों और अन्य वर्गों के बीच जागरूकता बताया। आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव तीसरे स्थान पर रहे।

दूसरी ओर, गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा के सत्येंद्र पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार को 30,000 से कुछ अधिक वोटों से हराया। चुनाव में केवल दो ही उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा के योगेश पटेल के जून में निधन के बाद यहां उपचुनाव हुआ। वह 2008 में सीट बनने के बाद से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

First Published : August 3, 2026 | 10:28 PM IST