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Emergency Fund: आज के अनिश्चित आर्थिक माहौल में किसी भी परिवार के सामने अचानक वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। नौकरी चले जाना, गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होना या किसी अन्य अप्रत्याशित खर्च का सामना करना ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनमें बड़ी रकम की तत्काल जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय में इमरजेंसी फंड परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच का काम करता है।
इमरजेंसी फंड एक ऐसा वित्तीय रिजर्व होता है, जिसे विशेष रूप से आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। यह बचत का वह हिस्सा है, जिसका उपयोग केवल आपातकालीन जरूरतों के दौरान किया जाता है। इसका उद्देश्य संकट के समय व्यक्ति और उसके परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखना होता है।
जब अचानक आय का स्रोत बंद हो जाए या बड़ा मेडिकल खर्च सामने आ जाए, तब इमरजेंसी फंड वित्तीय दबाव को कम करने में मदद करता है। इसके कारण लोगों को तत्काल जरूरतों के लिए महंगे कर्ज लेने या रिश्तेदारों और दोस्तों से आर्थिक सहायता मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
यदि परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की नौकरी चली जाए तो घर की नियमित आय अचानक रुक सकती है। इसी तरह फ्रीलांसरों को कई महीनों तक नए प्रोजेक्ट नहीं मिल सकते या किसी व्यवसाय की आय में गिरावट आ सकती है। कई पेशों में लोग कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम करते हैं, जहां कभी काम की भरमार होती है तो कभी लंबे समय तक काम नहीं मिलता। ऐसे हालात में आर्थिक चुनौतियां तेजी से बढ़ सकती हैं।
परिवार में किसी सदस्य के गंभीर रूप से बीमार पड़ने या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में बड़ा खर्च सामने आ सकता है। स्वास्थ्य बीमा होने के बावजूद कई बार इलाज का कुछ हिस्सा अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। कई मामलों में व्यक्ति को इलाज के लिए नौकरी भी छोड़नी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में बीमारी के साथ-साथ आय का नुकसान भी एक बड़ी समस्या बन जाता है।
घर या वाहन से जुड़ी कुछ मरम्मत ऐसी होती हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता। दीवारों में सीलन, छत की मरम्मत, संपत्ति की सुरक्षा के लिए बाउंड्री या फेंसिंग बनवाना, या वाहन में अचानक आई तकनीकी खराबी जैसे खर्च कभी भी सामने आ सकते हैं। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल धन की आवश्यकता पड़ सकती है।
हर वित्तीय जरूरत को इमरजेंसी नहीं कहा जा सकता। कई बार खराब वित्तीय योजना के कारण लोग ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं, जिसे वे आपातकाल समझने लगते हैं। उदाहरण के लिए, किसी बड़े सेल ऑफर का लाभ उठाने के लिए पैसे की कमी होना या छुट्टियों के दौरान तय बजट से अधिक खर्च कर देना वास्तविक इमरजेंसी नहीं है। हालांकि, ऐसी परिस्थितियां आर्थिक दबाव जरूर पैदा कर सकती हैं, लेकिन सही वित्तीय योजना बनाकर इनसे बचा जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि इमरजेंसी और अनियोजित खर्चों के बीच अंतर को समझा जाए।
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इमरजेंसी फंड का आकार हर व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और जरूरतों के अनुसार अलग हो सकता है। आमतौर पर विशेषज्ञ तीन महीने, छह महीने या फिर नौ से 12 महीने तक के जरूरी खर्चों के बराबर राशि अलग रखने की सलाह देते हैं।
यह राशि तय करते समय आपकी उम्र, मासिक खर्च, परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या, नौकरी की स्थिरता और आय के स्रोत को ध्यान में रखना चाहिए। यदि आप फ्रीलांसर हैं या आपकी आय नियमित नहीं है, तो बड़ा इमरजेंसी फंड रखना बेहतर माना जाता है।
इमरजेंसी फंड का अनुमान लगाने के लिए सबसे पहले अपने या अपने परिवार के एक महीने के आवश्यक खर्चों की गणना करें। इसके बाद इस राशि को उन महीनों की संख्या से गुणा करें, जितने समय का वित्तीय सुरक्षा कवच आप बनाना चाहते हैं। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए कितनी बचत अलग रखनी चाहिए।
| स्थिति (Description) | कितने महीनों का फंड रखना चाहिए (Buffer) |
|---|---|
| युवा, अविवाहित व्यक्ति जिसने हाल ही में नौकरी शुरू की है | यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय ₹30,000 है और खर्च ₹15,000 है, तो कम से कम 3 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए यानी लगभग ₹45,000। हालांकि, चूंकि व्यक्ति युवा है और कोई निर्भर नहीं है, तो वह भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फंड को आगे भी बढ़ाता रहे। उदाहरण के लिए, यदि वह बचत ₹15,000 से घटाकर ₹10,000 भी कर दे, तब भी उसे इमरजेंसी फंड बनाना जारी रखना चाहिए। |
| शादीशुदा, डुअल इनकम लेकिन कोई बच्चे नहीं | इस स्थिति में 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर फंड पर्याप्त माना जाता है, क्योंकि दोनों पार्टनर कमाई कर रहे होते हैं और कोई निर्भर नहीं होता। |
| शादीशुदा और परिवार पर निर्भर लोग | ऐसे मामलों में लगभग 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना बेहतर होता है, क्योंकि जिम्मेदारियां अधिक होती हैं और जोखिम भी बढ़ जाता है। |
| अनिश्चित नौकरी या कर्ज में डूबे लोग | यह जोखिम भरी स्थिति होती है, इसलिए कम से कम 12 महीने के खर्च के बराबर फंड बनाना जरूरी माना जाता है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से आसानी से निपटा जा सके। |
अचानक आने वाली वित्तीय जरूरतों के लिए जरूरी है कि आपका इमरजेंसी फंड सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध जगह पर रखा जाए। शुरुआत में इसे सेविंग्स अकाउंट में रखना सबसे बेहतर माना जाता है, ताकि संकट के समय तुरंत पैसे निकाले जा सकें। इस फंड में कम से कम तीन महीने तक के खर्च के बराबर राशि होनी चाहिए।
इमरजेंसी फंड का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जोखिम-मुक्त होना चाहिए, भले ही उस पर ज्यादा ब्याज न मिले। इसके बाद, जब तीन महीने का बेस तैयार हो जाए, तो अतिरिक्त बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जा सकता है, जो पांच से छह महीने तक की जरूरतों को पूरा कर सके। आगे चलकर, जब फंड और मजबूत हो जाए, तो कुछ हिस्सा म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है, जहां बाजार के अनुसार रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
इमरजेंसी फंड को अलग खाते में रखना भी जरूरी है, ताकि रोजमर्रा के खर्चों के दौरान यह पैसा अनजाने में खर्च न हो जाए। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि बैंकिंग तकनीकी समस्या के दौरान भी आपके पास वित्तीय सुरक्षा बनी रहे।
अगर कभी आपात स्थिति में आपको अपने इमरजेंसी फंड का उपयोग करना पड़े, तो उसे फिर से बनाना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
फंड को दोबारा बनाने की शुरुआत छोटी राशि से की जा सकती है, लेकिन इसे जल्दी शुरू करना जरूरी है, क्योंकि समय बीतने के साथ अक्सर लोग इसकी गंभीरता को कम समझने लगते हैं, जिससे भविष्य में परेशानी बढ़ सकती है।
रीबिल्डिंग के दौरान यह बेहतर होता है कि कुल जरूरी राशि को कई महीनों में बांटकर धीरे-धीरे बचत की जाए। साथ ही, इस समय गैर-जरूरी खर्चों को सीमित करना चाहिए, ताकि फंड तेजी से फिर से तैयार हो सके।
इमरजेंसी फंड की योजना बनाते समय महंगाई को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संकट के समय होने वाले खर्चों का सही अनुमान लगाकर ही बचत का लक्ष्य तय करना चाहिए। साथ ही, यह भी जरूरी है कि इस फंड को केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही इस्तेमाल किया जाए, ताकि भविष्य में वित्तीय सुरक्षा बनी रहे।