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पैसा सुरक्षित भी रहे और बढ़े भी… इमरजेंसी फंड के ये 3 ऑप्शन जान लें

सिर्फ बैंक में पैसा रखना क्यों हो सकता है नुकसान? इमरजेंसी फंड के लिए जानिए सही जगह

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 21, 2026 | 2:31 PM IST

सोचिए, अचानक नौकरी चली जाए… या बिजनेस में कुछ महीनों तक कोई कमाई न हो… लेकिन घर का किराया, EMI, बच्चों की फीस और रोजमर्रा के खर्च वैसे ही चलते रहें। ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल होता है- पैसा कहां से आएगा? यही वह स्थिति है, जहां आपातकालीन फंड आपकी सबसे बड़ी ताकत बनता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह सिर्फ बैंक में रखा पैसा नहीं, बल्कि एक ऐसा मजबूत वित्तीय सिस्टम है जो मुश्किल वक्त में आपके पूरे जीवन को संभालता है। अगर यह सही तरीके से बना हो, तो आय रुकने के बाद भी आपकी जिंदगी बिना रुके चल सकती है।

कितना होना चाहिए आपातकालीन फंड?

आपातकालीन फंड की सही रकम हर व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर तारेश भाटिया के अनुसार, नौकरीपेशा लोगों के लिए कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर फंड होना चाहिए। वहीं, व्यवसायी या फ्रीलांसर के लिए यह अवधि 9 से 12 महीने तक होनी चाहिए क्योंकि उनकी आय निश्चित नहीं होती। जिन परिवारों पर ज्यादा जिम्मेदारियां हैं या जहां एक ही व्यक्ति कमाता है, उनके लिए 12 महीने या उससे ज्यादा का फंड रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

क्या सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना सही है?

ज्यादातर लोग आपातकालीन फंड के नाम पर सारा पैसा सेविंग्स अकाउंट में रखते हैं, क्योंकि यह सुरक्षित होता है और तुरंत उपलब्ध भी रहता है। लेकिन तारेश भाटिया बताते हैं कि इसमें मिलने वाला ब्याज बहुत कम होता है, जो महंगाई से भी कम है, और इस पर टैक्स भी देना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक पूरा पैसा सेविंग्स अकाउंट में रखना समझदारी नहीं माना जाता।

क्यों जरूरी है लेयर्ड तरीका?

तारेश भाटिया के मुताबिक, एक मजबूत आपातकालीन फंड को अलग-अलग हिस्सों में बांटना ज्यादा बेहतर होता है। इसका पहला हिस्सा सेविंग्स अकाउंट में होना चाहिए, ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा मिल सके। दूसरा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जा सकता है, जो थोड़े समय बाद की जरूरतों के लिए काम आता है। तीसरा हिस्सा लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में रखा जा सकता है, जहां पैसा अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हुए थोड़ा बेहतर रिटर्न दे सकता है। इसके अलावा कुछ हिस्सा आर्बिट्राज फंड में भी रखा जा सकता है, जो टैक्स के लिहाज से थोड़ा फायदेमंद होता है, हालांकि इसमें थोड़ा जोखिम होता है और यह तुरंत जरूरत के लिए नहीं होता।

लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट फंड में क्या अंतर है?

ऑप्टिमा मनी के फाउंडर पंकज मठपाल के अनुसार, लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट फंड दोनों ही डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं, लेकिन अल्ट्रा शॉर्ट फंड की अवधि थोड़ी ज्यादा होती है, जिससे यह ब्याज दरों के बदलाव के प्रति थोड़ा संवेदनशील हो जाता है। इसलिए वे सलाह देते हैं कि आपातकालीन फंड के लिए इन दोनों का मिश्रण रखना संतुलित और व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

जरूरत के समय पैसा कितनी जल्दी मिलेगा?

पंकज मठपाल के मुताबिक, लिक्विड फंड में पैसा आमतौर पर अगले कामकाजी दिन मिल जाता है। साथ ही, ₹50,000 तक या कुल निवेश का 90% तक तुरंत निकालने की सुविधा भी मिल सकती है। हालांकि वे यह भी बताते हैं कि सेविंग्स अकाउंट से जुड़े फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा भरोसेमंद होते हैं, क्योंकि इनमें किसी भी समय, यहां तक कि रात में भी पैसा तुरंत मिल सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

तारेश भाटिया के अनुसार, व्यवसायी, एक ही आय पर निर्भर परिवार, ज्यादा EMI या जिम्मेदारियां उठाने वाले लोग और वे प्रोफेशनल जिनकी आय निश्चित नहीं होती, उन्हें ज्यादा बड़ा आपातकालीन फंड बनाना चाहिए।

सबसे आम गलतियां क्या हैं?

तारेश भाटिया के अनुसार, सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग आपातकालीन फंड को निवेश समझ लेते हैं और उससे रिटर्न कमाने की उम्मीद करने लगते हैं, जबकि इसका असली उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा देना होता है। इसके अलावा कई लोग पूरा पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में रख देते हैं, जिससे फंड की प्रभावशीलता कम हो जाती है। कुछ लोग जरूरत से कम फंड बनाते हैं, जिससे मुश्किल समय में पैसे की कमी हो जाती है। वहीं एक आम गलती यह भी है कि लोग इस फंड का इस्तेमाल सामान्य या गैर-जरूरी खर्चों में कर लेते हैं, जिससे असली आपातकालीन स्थिति में उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं बचता।

टैक्स और फंड चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

पंकज मठपाल के अनुसार, आपातकालीन फंड के लिए निवेश चुनते समय हाई क्रेडिट क्वालिटी, कम अवधि, अच्छी लिक्विडिटी, कम खर्च और फंड हाउस की विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। टैक्स के मामले में सेविंग्स अकाउंट और FD पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जबकि आर्बिट्राज फंड में एक साल बाद टैक्स दर अपेक्षाकृत कम होती है।

आखिर में समझने वाली बात

तारेश भाटिया का कहना है कि आपातकालीन फंड निवेश नहीं, बल्कि एक वित्तीय सुरक्षा कवच है। वहीं पंकज मठपाल के अनुसार, इसमें रिटर्न से ज्यादा जरूरी यह है कि जरूरत के समय पैसा आसानी से और तुरंत उपलब्ध हो। यही फंड सुनिश्चित करता है कि अगर कमाई रुक भी जाए, तो भी आपकी जिंदगी बिना रुके आगे बढ़ती रहे।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय विशेषज्ञों की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : April 21, 2026 | 2:31 PM IST