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5 महीने बाद खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? ट्रंप बोले: शांति समझौते के पैरामीटर्स तय, हमले पर लगाई रोक

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सामने आ रहे इस समझौते के तहत होर्मुज को तुरंत, पूरी तरह और पूरी निष्पक्षता से खोला जाएगा और ईरान से जुड़े परमाणु खतरे का हमेशा के लिए अंत होगा

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- August 02, 2026 | 9:37 AM IST

US-Iran Conflict: पांच महीने से चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि युद्ध खत्म करने के लिए संभावित समझौते के पैरामीटर्स तय कर लिए गए हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने फिलहाल ईरान पर नए सैन्य हमलों के आदेश रोक दिए हैं।

ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज को तुरंत, पूरी तरह और निष्पक्ष तरीके से खोला जाएगा। साथ ही, ईरान से जुड़े परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

ट्रंप ने दावा किया कि दुनिया के हित और एक सफल व समृद्ध ईरान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नए हमले रद्द करने पर सहमति दी है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जाए। ट्रंप ने यह भी बताया कि इजरायल ने भी इस समझौते को पूरा कराने की अमेरिकी कोशिशों में शामिल होने पर अपनी सहमति दे दी है।

सऊदी क्राउन प्रिंस ने शुरू किया कूटनीतिक प्रयास

ट्रंप के इस फैसले से ठीक पहले शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने ईरान के साथ बढ़ते तनाव को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई और ट्रंप से आगे की रणनीति पर साफ जानकारी मांगी।

सऊदी अरब को डर था कि अगर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों या दूसरे अहम ठिकानों पर बड़े हमले किए, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।

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सऊदी अरब पहले ही इराक में ईरानी समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर अमेरिका के साथ संयुक्त कार्रवाई कर चुका है। इसके बावजूद वह लगातार अमेरिका और ईरान से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील करता रहा है। इसी कोशिश के तहत बुधवार को क्राउन प्रिंस ने अपने भाई और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान को वाशिंगटन भेजा, जहां उन्होंने ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की।

वहीं, दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मंगलवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात कर युद्ध जारी रखने की वकालत की थी।

युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी राजनीति पर गंभीर असर

पांच महीने से जारी यह संघर्ष अब अमेरिकी जनता के बीच भी अलोकप्रिय होता जा रहा है। इसका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। ऐसे में नवंबर में होने वाले अहम मिडटर्म चुनावों से पहले इस युद्ध को संभालना ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए राजनीतिक तौर पर बड़ी चुनौती बन गया है।

हाल ही में जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान ने अचानक हमला किया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने उसे नाकाम कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने कड़ी जवाबी कार्रवाई का संकल्प जताया था।

वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा था कि तेहरान ने पिछले महीने संघर्षविराम पर सहमति दी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद उसे तोड़ दिया। उनके मुताबिक, ईरान ने व्यावसायिक जहाजों पर गोलियां चलाईं और अमेरिकी सैनिकों की जान भी ली।

इसी बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व के 10 देशों बहरीन, इजरायल, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे अपने नागरिकों के लिए नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की थी। इसमें लोगों को उड़ानें रद्द होने, हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद होने और यात्रा के दौरान आने वाली संभावित परेशानियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई थी।

First Published : August 2, 2026 | 8:51 AM IST