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2004 के बाद नियुक्त अनुकंपा कर्मचारियों को भी मिलेगा पुरानी पेंशन (OPS) का फायदा? जानें पूरा मामला

केंद्र सरकार ने 2004 के बाद अनुकंपा पर नौकरी पाने वाले उन परिवारों को पुरानी पेंशन (OPS) का तोहफा दिया है, जिन्होंने 2003 से पहले आवेदन किया था

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ऋषभ राज   
Last Updated- June 25, 2026 | 3:43 PM IST

केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर एक बेहद जरूरी और संवेदनशील फैसला लिया है। सरकार ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने वाले (Compassionate Appointees) कर्मचारियों के एक खास वर्ग को पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम) का फायदा उठाने का मौका दिया है। सरकार के इस कदम से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्होंने सालों पहले नौकरी के लिए आवेदन तो कर दिया था, लेकिन प्रशासनिक या अन्य वजहों से उनकी नियुक्ति में देरी हो गई थी।

दरअसल, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को 1 जनवरी 2004 से लागू किया गया था। इस तारीख या इसके बाद सरकारी सेवा में आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद कर दी गई थी। लेकिन अनुकंपा से मिली नौकरी पाने वाले मामले में एक अनोखी समस्या सामने आ रही थी।

बता दें कि अनुकंपा से नियुक्ति का मकसद यह होता है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को जल्दी आर्थिक सहारा मिल सके। लेकिन कई मामलों में नौकरी मिलने की प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि आवेदन करने के बाद भी लोगों को सालों इंतजार करना पड़ा। ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें परिवारों ने 2004 से पहले, यानी पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) के दौरान आवेदन किया था। हालांकि, उन्हें नियुक्ति पत्र तब मिला जब देश में नई पेंशन प्रणाली (NPS) लागू हो चुकी थी।

इसपर कर्मचारियों का तर्क था कि चूंकि देरी उनके स्तर पर नहीं हुई थी और उन्होंने पुरानी पेंशन के दौर में ही अप्लाई कर दिया था, इसलिए उन्हें इसका फायदा मिलना चाहिए। इसी मांग को फरवरी 2025 में हुई नेशनल काउंसिल (JCM) की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया था। आखिरकार, डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर (DoPPW) ने 22 जून को एक आदेश जारी कर आवेदन की तारीख को ही पात्रता का आधार मान लिया।

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किसे मिलेगा OPS का फायदा?

सरकार के इस नए फैसले का फायदा हर किसी को नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ बेहद जरूरी शर्तें तय की गई हैं। इस दायरे में केवल वही कर्मचारी आएंगे जो इन तीनों शर्तों को पूरा करते हैं:

  • आवेदन की तारीख: मृतक कर्मचारी के आश्रित ने अनुकंपा पर नौकरी के लिए 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले आवेदन कर दिया हो।
  • योग्यता: जब आवेदन किया गया था, उस समय आवेदक नौकरी के लिए पूरी तरह योग्य (Eligible) रहा हो।
  • नियुक्ति का समय: आवेदन भले ही 2003 या उससे पहले का हो, लेकिन नौकरी 1 जनवरी 2004 या उसके बाद मिली हो।

सरकार ने साफ किया है कि जो भी इस दायरे में आएंगे, उन्हें ‘केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 2021’ के तहत पुरानी पेंशन का फायदा दिया जाएगा। सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को इसे तुरंत लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

OPS और NPS में क्या है मूल अंतर?

कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन को लेकर इतनी उत्सुकता क्यों है, इसे दोनों व्यवस्थाओं के अंतर से समझा जा सकता है:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS): इसमें रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को एक तय पेंशन की गारंटी मिलती है। यह राशि कर्मचारी की आखिरी सैलरी की करीब आधी होती है और इसमें समय-समय पर महंगाई राहत (DR) भी जोड़ी जाती है। सरकार इस पूरे खर्च को खुद उठाती है।
  • नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): यह एक मार्केट-लिंक्ड यानी बाजार के उतार-चढ़ाव पर आधारित व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी की नौकरी के दौरान उसकी सैलरी से एक हिस्सा कटता है और इतना ही हिस्सा सरकार मिलाती है। रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा इस बात पर निर्भर करता है कि यह फंड बाजार में कैसा परफॉर्म कर रहा है।

सरकार ने साल 2004 में NPS को इसलिए लागू किया था ताकि आने वाले सालों में सरकारी खजाने पर पेंशन का बोझ कम किया जा सके।

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क्या सभी के लिए बहाल होगी पुरानी पेंशन?

इस फैसले के बाद यह कयास लगाए जाने लगे थे कि क्या सरकार सभी के लिए ओपीएस वापस ला रही है? तो इसका जवाब ‘ना’ है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत बेहद सीमित है और केवल उन्हीं अनुकंपा वाले मामलों के लिए है जो तय तारीख की शर्तों को पूरा करते हैं।

वित्त मंत्रालय पहले ही संसद में साफ कर चुका है कि NPS या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के दायरे में आने वाले बाकी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए अंशदायी पेंशन (Contributory Pension) का ढांचा ही जारी रहेगा।

कर्मचारी संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

सरकार के इस संवेदनशील कदम की कर्मचारी संगठनों ने सराहना की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह उन परिवारों के साथ न्याय है जो सरकारी लेत-लतीफी के कारण अपने हक से वंचित हो रहे थे। इस सुधार से प्रभावित परिवारों को बुढ़ापे की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। हालांकि, इसके साथ ही देश भर में आम कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की मांग को लेकर बहस और आंदोलन अभी भी जारी है।

First Published : June 25, 2026 | 3:43 PM IST