प्रतीकात्मक फोटो
Textile Stocks to Buy: भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों के लिए ग्लोबल मार्केट में नए मौके बनते दिखाई दे रहे हैं। विदेशी ग्राहक अब बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देशों पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका फायदा खास तौर पर भारतीय होम टेक्सटाइल कंपनियों को मिल सकता है।
अमेरिकी बाजार में भारत की बेहतर टैरिफ स्थिति और ब्रिटेन तथा यूरोपीय संघ के साथ संभावित ट्रेड समझौतों से भी भारतीय कंपनियों के लिए आगे का रास्ता बेहतर हो सकता है। पहली तिमाही के आंकड़ों में इसकी शुरुआती झलक दिखाई दी है। टेक्सटाइल सेक्टर ने जून तिमाही में सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी ग्रोथ दर्ज की।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में सेक्टर की ग्रोथ 18 से 20 फीसदी के आसपास बनी रह सकती है। ब्रोकरेज को अपैरल सेगमेंट में गोकलदास एक्सपोर्ट्स और अरविंद पसंद हैं। वहीं, होम टेक्सटाइल सेगमेंट में इंडो काउंट इंडस्ट्रीज उसकी पसंदीदा कंपनी है।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल ग्राहक अपनी खरीदारी को अलग-अलग देशों में बांट रहे हैं। वे बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान पर निर्भरता घटाकर दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। भारत इस बदलाव का एक बड़ा लाभार्थी बनकर उभर सकता है।
खास तौर पर होम टेक्सटाइल सेगमेंट में भारत की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। अमेरिकी बाजार में भारत को टैरिफ के मोर्चे पर बढ़त मिल रही है। वहीं, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों से आगे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि ग्लोबल ऑर्डर में बढ़ोतरी और कंपनियों की बेहतर ऑर्डर एग्जीक्यूशन से सेक्टर की ग्रोथ जारी रह सकती है। हालांकि, यह फायदा सभी कंपनियों को एक जैसा नहीं मिलेगा। कच्चे माल की लागत, उत्पादन क्षमता, विदेशी ग्राहकों तक पहुंच और कंपनियों के प्रोडक्ट मिक्स से उनके प्रदर्शन में फर्क पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में टेक्सटाइल सेक्टर की आमदनी सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी बढ़ी। रिपोर्ट में शामिल कंपनियों की कुल आमदनी 22,781 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 26,947 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान कुल EBITDA मार्जिन 10.7 फीसदी से बढ़कर 12.1 फीसदी हो गया। एडजस्टेड प्रॉफिट मार्जिन भी 5.1 फीसदी से बढ़कर 6.3 फीसदी पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रोथ में पिछले साल का कम आधार और कंपनियों की बेहतर ऑर्डर एग्जीक्यूशन अहम वजह रही। कम टैरिफ से भी कंपनियों के मार्जिन को सहारा मिला। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि आगे कॉटन की कीमतों में स्थिरता आने से कंपनियों के मार्जिन में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है।
कपड़े तैयार करने वाली अपैरल कंपनियों ने जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट की आमदनी सालाना आधार पर करीब 20 फीसदी बढ़ी। प्रमुख कंपनियों के पास आने वाले ऑर्डर की स्थिति भी बेहतर हुई है।
मोतीलाल ओसवाल के कवरेज में शामिल KPR मिल, अरविंद पर्ल ग्लोबल और गोकलदास एक्सपोर्ट्स की कुल आमदनी 20 फीसदी बढ़ी। इन कंपनियों का EBITDA 28 फीसदी और एडजस्टेड मुनाफा 22 फीसदी बढ़ा। इनमें पर्ल ग्लोबल का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।
कंपनियां भारत और अफ्रीका जैसे कम लागत वाले क्षेत्रों में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं। कुछ कंपनियां बिना ज्यादा पूंजी लगाए उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय साझेदारों के साथ भी काम कर रही हैं। इससे लागत कम रखने और बड़े ऑर्डर संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मजदूरी, फ्रेट और कच्चे माल की बढ़ती लागत अपैरल कंपनियों के मार्जिन के लिए चुनौती बनी हुई है।
होम टेक्सटाइल सेगमेंट में भी मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। ग्लोबल ग्राहक बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान से अलग दूसरे देशों में अपनी सोर्सिंग बढ़ा रहे हैं। भारत को इसका फायदा मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट में शामिल कंपनियों में वेल्सपन लिविंग (Welspun Living) की आमदनी सालाना आधार पर करीब 26 फीसदी बढ़ी। कंपनी ने होम टेक्सटाइल सेगमेंट की औसत ग्रोथ से बेहतर प्रदर्शन किया।
वहीं, इंडो काउंट इंडस्ट्रीज (Indo Count Industries) के नए कारोबार में करीब तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। होम टेक्सटाइल कंपनियों के मार्जिन में सालाना आधार पर करीब 70 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ और यह लगभग 11.5 से 12 फीसदी के बीच पहुंच गया।
हालांकि, कंपनियां मार्जिन को लेकर अभी भी सतर्क हैं। उन्होंने वित्त वर्ष 2027 के लिए आमदनी में मिड-टीन यानी करीब 14 से 16 फीसदी ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है।
मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि टेक्सटाइल सेक्टर आगे भी बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ब्रोकरेज ने सेक्टर के लिए करीब 18 से 20 फीसदी ग्रोथ और मार्जिन में धीरे-धीरे सुधार का अनुमान लगाया है।
रिपोर्ट में शामिल कंपनियों की आमदनी वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच सालाना औसतन 14 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसी दौरान EBITDA में 27 फीसदी और एडजस्टेड मुनाफे में 38 फीसदी की सालाना ग्रोथ हो सकती है।
यह अनुमान पिछले दस साल के प्रदर्शन के मुकाबले काफी मजबूत है। बीते दशक में ब्रोकरेज के कवरेज वाली टेक्सटाइल कंपनियों की आमदनी सालाना औसतन 6 फीसदी बढ़ी थी। EBITDA की ग्रोथ 4 फीसदी और मुनाफे की ग्रोथ सिर्फ 3 फीसदी रही थी। बेहतर ग्रोथ की संभावना को देखते हुए ब्रोकरेज ने इन कंपनियों को उनके लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से 7 से 10 फीसदी प्रीमियम दिया है।
मोतीलाल ओसवाल ने अपैरल सेगमेंट में Gokaldas Exports और Arvind को अपनी पसंद बताया है। होम टेक्सटाइल सेगमेंट में ब्रोकरेज को Indo Count Industries पसंद है।
| कंपनी | 21 अगस्त CMP | टारगेट प्राइस | संभावित तेजी |
|---|---|---|---|
| Gokaldas Exports | ₹797 | ₹1,110 | 39% |
| Indo Count Industries | ₹430 | ₹550 | 28% |
| Arvind | ₹532 | ₹670 | 26% |
रिपोर्ट के समय गोकलदास एक्सपोर्ट्स का शेयर भाव 797 रुपये था। ब्रोकरेज ने इसके लिए 1,110 रुपये का टारगेट दिया है। यह रिपोर्ट में दिए भाव से करीब 39 फीसदी तेजी की संभावना दिखाता है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की आमदनी बढ़कर 1,153.5 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 955.8 करोड़ रुपये थी। हालांकि, EBITDA मार्जिन 10.2 फीसदी से घटकर 9.8 फीसदी रहा।
अरविंद के शेयर के लिए 670 रुपये का टारगेट रखा गया है। रिपोर्ट के समय शेयर 532 रुपये के आसपास था। इस हिसाब से शेयर में करीब 26 फीसदी तेजी की संभावना है।
जून तिमाही में अरविंद की आमदनी बढ़कर करीब 2,501 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में लगभग 2,006 करोड़ रुपये थी। हालांकि, कंपनी का EBITDA मार्जिन 8.8 फीसदी से बढ़कर 9.6 फीसदी हुआ।
इंडो काउंट इंडस्ट्रीज के लिए ब्रोकरेज ने 550 रुपये का टारगेट दिया है। रिपोर्ट में इसका शेयर भाव 430 रुपये था। इस स्तर से शेयर में करीब 28 फीसदी तेजी की संभावना बनती है।
जून तिमाही में कंपनी की आमदनी 958.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,207 करोड़ रुपये हो गई। EBITDA मार्जिन भी 11.6 फीसदी से सुधरकर 11.9 फीसदी हो गया। एडजस्टेड प्रॉफिट मार्जिन 4.1 फीसदी से बढ़कर 5.2 फीसदी पहुंच गया।
टेक्सटाइल सेक्टर का आउटलुक सकारात्मक है, लेकिन इसके साथ कई जोखिम भी जुड़े हैं। कॉटन की कीमतें ऊंची रहने से स्पिनिंग और अपैरल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा मजदूरी, फ्रेट और ईंधन का खर्च भी कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है। सरकार की एक्सपोर्ट इंसेंटिव पॉलिसी, कॉटन पर इंपोर्ट ड्यूटी की समयसीमा और अमेरिका तथा यूरोप से आने वाले नए ऑर्डर भी सेक्टर की चाल तय करेंगे।
कुल मिलाकर भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों के लिए ग्लोबल सोर्सिंग में बदलाव एक बड़ा मौका बन सकता है। लेकिन इसका पूरा फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलने की संभावना है, जिनके पास मजबूत ग्राहक संबंध, बेहतर उत्पादन क्षमता और लागत को नियंत्रण में रखने की ताकत होगी।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)