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एथेनॉल में बढ़ती मांग से महंगा हुआ मक्का, 20% बढ़े दाम; अंडे की कीमतों पर भी दिख रहा असर

पिछले कुछ महीनों में मक्का के दाम करीब 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इसका असर अंडों की कीमतों पर भी पड़ रहा है

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सुशील मिश्र   
Last Updated- August 26, 2026 | 6:35 PM IST

Maize prices hike : एथेनॉल में मक्के की बढ़ती मांग अब टेंशन दे रहा। क्योंकि इससे मक्के की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा। यही नहीं एथेनॉल उत्पादन में मक्के के बढ़ते इस्तेमाल से पोल्ट्री फीड की लागत भी बढ़ रही है। पिछले कुछ महीनों में मक्का के दाम में करीब 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। वहीं, इसका असर अंडों की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इससे आने वाली सर्दियों के सीजन में अंडा महंगा मिल सकता है।

मक्के की कीमतों में आया बड़ा उछाल

मक्के की कीमतों में जो तेजी आई है, वो आंकड़ों में देखने पर और साफ हो जाती है. मक्का जो पहले करीब 14,000 रुपए प्रति टन के आसपास बिकता था, वो अब बढ़कर 26,500 रुपए प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है. यानी कीमत करीब-करीब दोगुनी हो चुकी है। पिछले पांच महीनों के भीतर ही मक्के की कीमतों में 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। इतनी तेज रफ्तार से बढ़ती कीमतों को पोल्ट्री कारोबारी झेल नहीं पा रहे और यही बोझ अंत में अंडे की कीमत के जरिए बाजार तक पहुंच रहा है।

मक्के के दाम बढ़ने से अंडों हुए महंगे

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में अंडों की कीमतों में करीब 35-40% की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल अंडे की कीमत फार्म गेट पर करीब 7 रुपये प्रति अंडा है, जबकि खुदरा बाजार में यह 8.50-9 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गई है। पोल्ट्री उद्योग से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि सर्दियों के मौसम में कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं और इनमें और बढ़ोतरी भी हो सकती है, क्योंकि इस दौरान अंडों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।

पोल्ट्री उद्योग में सबसे ज्यादा होता है मक्का का इस्तेमाल

मक्के के कुल उत्पादन का करीब 37% हिस्सा अब एथेनॉल डिस्टिलरियों में जा रहा है। जिससे मक्का की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। आपूर्ति सीमित होने के कारण मक्के की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। भारत के कुल मक्का उत्पादन का करीब 60% हिस्सा पोल्ट्री उद्योग इस्तेमाल करता है। ऐसे में पोल्ट्री क्षेत्र और एथेनॉल उत्पादकों के बीच मक्के को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

मक्के की बढ़ती मांग

संसद के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल मक्का उत्पादन लगभग 434 लाख टन है, जिसमें से लगभग 170 लाख टन का इस्तेमाल अब इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इससे पोल्ट्री फीड और अन्य इस्तेमाल के लिए सप्लाई कम हो गई है। भारत से मक्का का निर्यात वर्ष 2026 में तीन साल के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच सकता है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में देश से 10.8 लाख मीट्रिक टन मक्का का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह केवल 2,28,844 टन था। पूरे वर्ष 2026 में भारत का मक्का निर्यात बढ़कर 18 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह वर्ष 2023 के बाद सबसे अधिक होगा और पिछले साल के 8,05,935 टन निर्यात के मुकाबले दोगुने से भी ज़्यादा रहेगा।

वैश्विक बाजार में मक्का के दाम बढ़े

अमेरिका में मक्के की पैदावार को लेकर चिंताओं और सप्लाई की उम्मीदों में बदलाव के कारण मक्के के फ़्यूचर्स $5 प्रति बुशेल के स्तर को पार कर गए, जो जुलाई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। प्रो फ़ार्मर क्रॉप टूर ने 2026 में मक्के की पैदावार 173.2 बुशेल प्रति एकड़ रहने का अनुमान लगाया है, जो USDA के 180.7 बुशेल के अनुमान से कम है। फसल की स्थिति भी कमजोर हुई है। कटाई से पहले मिडवेस्ट में गर्मी का दबाव और बहुत ज़्यादा बारिश जैसी मौसम की चुनौतियां मुख्य जोखिम बनी हुई हैं। इस बीच अमेरिका से मक्के का आयात मज़बूत बना हुआ है और शिपमेंट में साल-दर-साल 26% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि ब्लैक सी में अनाज की सप्लाई में रुकावटों से ग्लोबल सप्लाई की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

First Published : August 26, 2026 | 6:35 PM IST