प्रतीकात्मक फोटो
Meta Layoff Plan: फेसबुक, इंस्टाग्राम और WhatsApp की पैरेंट कंपनी मेटा ने अपनी कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या 60 फीसदी तक घटाने की योजना बनाई थी। कंपनी चाहती थी कि रोजमर्रा के काम का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI एजेंट संभालें और कर्मचारियों की छोटी टीमें इनकी निगरानी करें। हालांकि ,AI से उम्मीद के मुताबिक उत्पादकता नहीं मिलने और कर्मचारियों के विरोध के बाद कंपनी ने योजना का अगला चरण लागू नहीं किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना को ‘प्रोजेक्ट OT’ नाम दिया गया था। यहां OT का मतलब ऑर्गनाइजेशन ट्रांसफॉर्मेंश यानी संगठन में बड़े बदलाव से था। इसका लक्ष्य Meta को ‘AI Native’ कंपनी बनाना था, जहां कंपनी के कामकाज में AI की भूमिका काफी ज्यादा होती।
प्रोजेक्ट OT के तहत हजारों कर्मचारियों के रोजाना किए जाने वाले काम AI एजेंट को सौंपने की योजना थी। इन AI एजेंट की निगरानी कम कर्मचारियों वाली ऐसी टीमें करतीं, जिनमें कंपनी के बेहतर प्रदर्शन करने वाले लोगों को रखा जाता।
इस बदलाव के कारण कुछ कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां दी जातीं, जबकि दूसरे कर्मचारियों की नौकरी जा सकती थी। योजना के कुछ प्रस्तावों में Meta की चुनिंदा टीमों का आकार 60 फीसदी तक घटने की संभावना थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित छंटनी का आकार मेटा की पिछली बड़ी छंटनी के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकता था। उस दौर में कंपनी ने अपने करीब 25 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था।
मेटा ने रीस्ट्रक्चरिंग और छंटनी को दो फेज में लागू करने की योजना बनाई थी। पहला चरण मई और दूसरा नवंबर में होना था। छंटनी के साथ खाली पदों पर भर्ती रोकने और कमजोर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को हटाने की तैयारी भी थी।
मेटा ने 20 मई को करीब 10 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की। लेकिन इसके बाद मार्क जुकरबर्ग ने नवंबर में होने वाली कटौती को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
प्रोजेक्ट OT की जानकारी सामने आने के बाद मेटा के कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों को लगने लगा कि इस योजना का एक उद्देश्य उन्हें AI से बदलना भी है। बड़े स्तर पर नौकरियां जाने की आशंका के कारण कंपनी के भीतर खुला विरोध शुरू हो गया।
इसके साथ प्रोजेक्ट OT के केंद्र में मौजूद AI एजेंट भी उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रहे थे। कंपनी को इन एजेंट से उत्पादकता में जितनी बढ़ोतरी की उम्मीद थी, वह नहीं मिली। दूसरी तरफ निवेशक भी सवाल उठा रहे थे कि AI पर भारी खर्च करने के बदले मेटा को क्या फायदा मिल रहा है।
मेटा ने रॉयटर्स से पुष्टि की कि प्रोजेक्ट OT पर काम किया जा रहा था। कंपनी के मुताबिक इसका फोकस लागत घटाने, टीमों का पुनर्गठन करने और कर्मचारियों को ज्यादा जरूरी क्षेत्रों में भेजने पर था। इनमें AI मॉडल के लिए ट्रेनिंग डेटा तैयार करने जैसा काम भी शामिल था।
Meta ने कहा कि इस साल की शुरुआत में पुनर्गठन के तहत कुछ टीमों से अलग-अलग संभावनाओं पर योजना बनाने को कहा गया था। इसमें कर्मचारियों को दूसरी जिम्मेदारी देना, खाली पद बंद करना और कर्मचारियों की संख्या घटाना शामिल था।
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि योजना के कुछ विकल्पों से चुनिंदा टीमों में कर्मचारियों की संख्या 60 फीसदी तक घट सकती थी। हालांकि Meta का कहना है कि ये केवल संभावित स्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएं थीं और यह पहले से तय नहीं था कि हर प्रस्ताव लागू किया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, इस कवायद के बाद हजारों कर्मचारियों को नई बनाई गई टीमों में प्राथमिकता वाले काम सौंपे गए। हालांकि योजना के हर विकल्प पर आगे नहीं बढ़ा गया।
जुकरबर्ग ने नवंबर की कटौती रोकने का फैसला क्यों किया, इसकी सटीक वजह साफ नहीं हुई है। Meta ने भी उन्हें इस मामले पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं कराया। रिपोर्ट से इतना जरूर संकेत मिलता है कि कर्मचारियों का विरोध, AI एजेंट का उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन और निवेशकों के सवाल इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां बन गए थे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)