प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों (बीएएफ) ने इक्विटी में अपना निवेश कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है क्योंकि इक्विटी मूल्यांकन घटने से शेयर ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) के साथ इस श्रेणी की सबसे बड़ी योजना है और जुलाई के आखिर में उसका शुद्ध इक्विटी निवेश 72.6 फीसदी था, जो कम से कम दो साल में इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इस श्रेणी की दूसरी सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा डायनामिक तरीके से प्रबंध की जाने वाली योजना है। जुलाई में उसका शुद्ध इक्विटी निवेश 68 फीसदी था। यह पिछले छह सालों में उसका सबसे ऊंचा स्तर है। दूसरे बड़े फंडों ने भी इक्विटी निवेश को कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर या हाल के सर्वोच्च स्तर के करीब पहुंचा दिया है।
बीएएफ ऐसी हाइब्रिड योजनाएं हैं, जो इक्विटी मूल्यांकन और दूसरे संकेतकों के आधार पर इक्विटी और डेट के बीच बदलाव करती हैं। इस लचीलेपन की वजह से फंड मैनेजर तब इक्विटी निवेश बढ़ा सकते हैं, जब शेयर आकर्षक हो जाए और जब मूल्यांकन ज्यादा लगे तो उसे घटा सकते हैं।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी में प्रिंसिपल (निवेश रणनीति) चिंतन हरिया ने कहा, हाल के वर्षों में कंपनियों की कमाई में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद लार्जकैप शेयरों में गिरावट देखी गई है। इस कारण मूल्यांकन आकर्षक हो गए हैं। यही वजह है कि इन फंडों में इक्विटी आवंटन ज्यादा है।
एचडीएफसी एएमसी में वरिष्ठ फंड मैनेजर (इक्विटी) गोपाल अग्रवाल के अनुसार, इक्विटी होल्डिंग में बढ़ोतरी की वजह सिर्फ मूल्यांकन ही नहीं बल्कि कुछ और कारण भी हैं। उन्होंने कहा, यह उचित मूल्यांकन, कमाई की बेहतर होती उम्मीदों और मजबूत घरेलू आर्थिक स्थिति का मिला-जुला असर है।
इसके अलावा, बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने मध्यम से लंबी अवधि के नजरिये से कुछ खास शेयरों में निवेश के अच्छे मौके दिए हैं, जिससे हमने इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया है। इससे पोर्टफोलियो को इक्विटी में संभावित बढ़त का फायदा उठाने का मौका मिलता है।
पिछले दो सालों में लार्ज-कैप शेयरों के मूल्यांकन में काफी कमी आई है क्योंकि इन शेयरों में समय और कीमत दोनों के हिसाब से गिरावट आई है। निफ्टी-50 का 12 महीने का ब्लेंडेड फॉरवर्ड पीई अनुपात अभी 18.1 है, जबकि इसका 10 साल का औसत 21.4 रहा है। हालांकि, मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स अभी भी अपने लंबे समय के औसत से काफी ऊपर बने हुए हैं।
हालांकि, सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर के बाद से बाजार पूंजीकरण के सभी सेगमेंट में मूल्यांकन में कमी आई है। उस समय ज्यादातर बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों का इक्विटी निवेश कई सालों के निचले स्तर पर आ गया था।
फोनपे म्युचुअल फंड के प्रमुख नीलेश डी नाइक ने कहा, पिछले दो सालों में इक्विटी बाजार का सेंटीमेंट सुस्त रहा है। निफ्टी 500 जैसे डाइवर्सिफाइड इक्विटी इंडेक्स अभी भी अपने सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, हाल की तिमाहियों में हमने मुनाफे में ठीक-ठाक बढ़ोतरी देखी है, खासकर अगर हम उन तेल विपणन कंपनियों को छोड़ दें जो इनपुट लागत के भारी दबाव का सामना कर रही हैं। नतीजतन, इक्विटी मूल्यांकन अब ज्यादा उचित दायरे में हैं, जिससे बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों में इक्विटी निवेश बढ़ा है।