प्रतीकात्मक तस्वीर
बिजली बनाने वाली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने शांति के मसौदा नियमों और विनियमन में चार बड़े बदलावों की मांग की है। इनमें नई कंपनियों की परिभाषा से तीन साल की समयसीमा हटाना, यूटिलिटी-अग्नोस्टिक मंजूरी प्रक्रिया, लाइसेंसिंग के समय को आधा करना और तकनीक डिजाइन मंजूर होने के बाद उपकरण आयात करने के लिए अलग से मंजूरी लेने से छूट शामिल है। यह जानकारी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ को दी।
उन्होंने कहा कि एनटीपीसी ने परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) से बदलाव करने का आग्रह किया है। दरअसल, डीएई ने पिछले महीने साझेदारों की राय जानने के लिए शांति अधिनियम का मसौदा और विनियमन जारी किए थे।
अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘हमने नई कंपनियों की परिभाषा में बदलाव की मांग की है। मसौदा में कहा गया है कि तीन साल (कंपनी का अस्तित्व) होना चाहिए। हमारा सुझाव है कि यह समयसीमा हटा दी जानी चाहिए।’
लाइसेंस चाहने वाली किसी भी कंपनी के पास साइट और टेक्नॉलजी से जुड़े अनुभव के अलावा वित्तीय, प्रबंधकीय और तकनीकी क्षमताएं होनी चाहिए। आमतौर पर मजबूत बही-खाता नहीं होने पर नई कंपनियों में ऐसी क्षमताएं होने की संभावना कम होती है।
अधिकारी ने कहा कि कंपनी बनने के शुरुआती तीन सालों में तो ऐसी कंपनी को अपनी पैरेंट कंपनी से मदद मिल सकती है, लेकिन उसके बाद इन क्षमताओं की जरूरतों के कारण उसे लाइसेंस नहीं मिल पाएगा।
ड्राफ्ट नियमों में ‘नई बनी एंटिटी” को ऐसे योग्य के तौर पर परिभाषित किया गया है जो लाइसेंस के लिए आवेदन की तारीख पर तीन साल या उससे कम समय से अस्तित्व में हो। मसौदा में कहा गया है कि लाइसेंस देने के लिए क्षमताओं का आकलन करने के मकसद से आवेदक को अपनी वित्तीय, प्रबंधकीय और तकनीकी क्षमताएं दिखानी होंगी।
एनटीपीसी की योजना 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करने की है। यह काम एनटीपीसी और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएस) के संयुक्त उपक्रम ‘अनु शक्ति विद्युत निगम लिमिटेड’ (अश्विनी) और जनवरी 2025 में बनी एनटीपीसी की पूरी तरह से अपनी न्यूक्लियर सब्सिडियरी ‘एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड’ (एनपीयूएनएल) के जरिए किया जाएगा।
संयुक्त उपक्रम अश्विनी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 2,400 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना बना रहा है। इसे ‘माही बांसवाड़ा राजस्थान एटॉमिक पावर प्रोजेक्ट’ कहा जाता है।