अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के चलते जोखिम उठाने की अनिच्छा के बीच बेंचमार्क सूचकांकों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन करीब एक फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी प्रतिफल में हो रहे इजाफे को निवेशक आसान मुद्रा का समय समाप्त होने के पहले की घटना मान रहे हैं।
10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी का प्रतिफल 1.9 फीसदी की ओर बढ़ा, जिसके बारे में विशेषज्ञों को लग रहा है कि मार्च तक यह 2 फीसदी को छू जाएगा।
बेंचमार्क सेंंसेक्स ने 656 अंक यानी 1.04 फीसदी की गिरावट के साथ 60,099 पर कारोबार की समाप्ति की। यह इंडेक्स साल 2022 के सर्वोच्च स्तर 61,309 से 1,210 अंक यानी 1.93 फीसदी नीचे आया है। यह स्तर सोमवार को दर्ज हुआ था। दूसरी ओर निफ्टी 174 अंक टूटकर 17,938 पर बंद हुआ।
विश्लेषकों ने कहा कि प्रतिफल में बढ़ोतरी और ब्याज दरों में इजाफा उभरते बाजारोंं की इक्विटी व करेंसी को अनाकर्षक बना देगा। प्रतिफल में इजाफे के अलावा भारत कच्चे तेल की कीमतोंं में बढ़ोतरी जैसे अवरोध का भी सामना कर रहा है।
वैश्विक ब्रेंट क्रूड की ट्रेडिंग 88 डॉलर प्रति बैरल पर हुई, जो अक्टूबर 2014 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकता है क्योंंकि भारत कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। बुधवार को एफपीआई ने 2,705 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं देसी संस्थागत निवेशक 200 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे। पिछले सत्र में भी दोनों शुद्ध बिकवाल रहे थे।
हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवशक और देसी संस्थागत निवेशक शुद्ध बिकवाल बन गए हैं। अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यू आर भट्ट ने कहा, बढ़ता प्रतिफल और भूराजनैतिक तनाव बाजारोंं को खूंटी पर टांग रहा है। एफपीआई शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं और अब देसी संस्थागत निवेशकोंं ने भी इसी ओर कदम बढ़ा दिया है। जब तक यह दोहरी मार जारी रहेगी, मुझे बाजारों के उतारचढ़ाव से निकलने की संभावना नहींं दिखती। बाजारों का नुकसान कम हो सकता है, अगर बजट उम्मीद के मुताबिक आए। लेकिन मुझे इस स्तर से बाजार के नाटकीय तरीके से और ऊपर जाने की संभावना नहींं दिखती।
इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि फेडरल रिजर्व महंगाई पर लगाम के लिए मार्च में 25 आधार अंकों से ज्यादा की बढ़ोतरी कर सकता है। महंगाई ने केंद्रीय बैंकों को बढ़ती कीमत से लडऩे के लिए बाध्य किया है और विकसित दुनिया में यह सबसे पहली प्राथमिकता है। इससे बाजारोंं पर असर पड़ रहा है।
इस बीच, ब्रिटेन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर 1992 के बाद के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई, जिससे बैंंक ऑफ इंगलैंड पर इस पर कदम उठाने का दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के खुदरा शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, आने वाले समय में बाजार तब तक एकीकरण जारी रख सकता है जब तक कि महंगाई का डर बना रहे। साथ ही अहम घटनाक्रम मसलन आगामी बजट और विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनाव आगामी दिनोंं में काफी ज्यादा उतारचढ़ाव ला सकता है। ऐसे मेंं हम ट्रेडरोंं को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं और उन्हें शेयर व क्षेत्र के लिहाज से चुनिंदा रुख अपनाना चाहिए। निवेशक गिरावट पर खरीदारी कर सकते हैं और लंबी अवधि के पोर्टफोलियो में अच्छे शेयर जोडऩे का मौका बना सकते हैं।
बाजार मेंं चढऩे व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 1,494 शेयर चढ़े जबकि 1,917 में गिरावट आी। सेंसेक्स के दो तिहाई से ज्यादा शेयर टूटकर बंद हुए। इन्फोसिस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और सत्र मेंं यह 2.7 फीसदी टूट गया। एशियन पेंट्स 2.7 फीसदी गिरा जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर में 2.4 फीसदी की गिरावट आई। बीएसई के 11 क्षेत्रीय सूचकांकों ने नुकसान के साथ कारोबार की समाप्ति की। आईटी व टेक शेयर सबसे ज्यादा क्रमश: 1.95 फीसदी व 1.8 फीसदी टूटे।