एयरलाइन कंपनियों- इंटरग्लोब एविएशन और स्पाइसजेट के शेयर इस कैलेंडर वर्ष में अब तक भारी गिरावट के शिकार हुए हैं। इंडिगो एयरलाइंस का शेयर इस साल जनवरी से अब तक (वाईटीडी) आधार पर 10 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि स्पाइसजेट में 30.2 प्रतिशत की कमजोरी आई है। तुलनात्मक तौर पर, सेंसेक्स में वाईटीडी आधार पर 4.6 प्रतिशत की कमजोरी आई और बीएसई मिडकैप तथा स्मॉलकैप सूचकांकों में 7.3 प्रतिशत और 10.5 प्रतिशत की गिरावट आई।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आई है और आकाश एयर तथा जेट एयरवेज उड़ान भरने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन विश्लेषकों को सूचीबद्ध कंपनियों के लिए आगामी राह उतार-चढ़ाव भरी रहने की आशंका जता रही है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ शोध उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा, ‘जहां दीर्घावधि वृद्धि इस क्षेत्र के लिए मजबूत बनी हुई है, और मांग कोविड-पूर्व स्तरों के करीब 70 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है, वहीं प्रतिस्पर्धी तीव्रता से कीमत युद्ध को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा बढ़ती प्रतिस्पर्धा के लिए समय बदतर नहीं हो सकता है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे एयरलाइनों के मार्जिन और लाभ पर दबाव पड़ सकता है।’
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में इस सेक्टर के विश्लेषक अंशुमन देव का कहना है कि एयरलाइनें ऐसी स्थिति में हैं जब मांग ज्यादा है और लागत अधिक है। लागत को कच्चे तेल, रुपये में कमजोरी और मुद्रास्फीति से बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘विमानन कंपनियों के लिए लागत नियंत्रित बनाए रखने की जरूरत होगी। कुछ लागत बचत में वेतन कटौती से जुड़ी हुई थी जो अब बहाल हो जाएगी जिससे खर्च फिर से बढ़ जाएगा। हालांकि मार्ग-केंद्रित नवीनता अब बेहद महत्वपूर्ण होगी।’
कच्चा तेल मई के ज्यादातर समय 105-110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहने के बाद 123 डॉलर प्रति बैरल के निशान पर पहुंच गया है। यूरोपीय संघ के नेताओं द्वारा रूसी तेल पर आंशिक और चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध पर सहमति जताने और चीन द्वारा शांघाई में कोविड-19 लॉकडाउन समाप्त होने से तेल कीमतों में अचानक तेजी आई है। विश्लेषकों के अनुसार, एयरलाइनों ने ऐतिहासिक तौर पर आपूर्ति हालात के आधार पर हवाई किरायों में संशोधन किया है। हालांकि किराये में वृद्धि में अभी कुछ समय लग सकता है।
मार्टिन कंसल्टिंग के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी मार्क मार्टिन ने कहा, ‘एयरलाइनें लागत में ज्यादा वृद्धि को सहन नहीं कर पाएंगी, क्योंकि वे महामारी के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने में सफल नहीं रही हैं। इस वजह से हवाई किरायों में कम से कम 25 पैसे की वृद्धि होगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, कच्चे तेल को परिष्कृत करने का खर्च बढ़ा (करीब 55 प्रतिशत) है, ‘वार रिस्क इंश्योरेंस’ राशि बढ़ने की वजह से यूरोप के लिए उड़ानों का बीमा खर्च बढ़ा है। ग्राहकों को अधिक भुगतान करना होगा।’
राकेश झुनझुनवाला समर्थित आकाश एयर अपना वाणिज्यिक परिचालन जुलाई तक शुरू करने पर विचार कर रही है। जेट एयरवेज के एयर ऑपरेटर प्रमाण पत्र को भी इस महीने के शुरू में नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा स्वीकृति दे दी गई थी। हालांकि जेट को पुन: शुरू किए जाने में कुछ महीने लग सकते हैं।