फ्लेक्सीकैप फंड में उसके मैनेजरों को अलग-अलग मार्केट कैप सेगमेंट में निवेश की आज़ादी होती है लेकिन वे लार्ज, मिड और स्मॉलकैप शेयरों के तुलनात्मक आकर्षण को लेकर बंटे हुए नजर आते हैं। पिछले एक साल में जहां ज्यादातर योजनाओं ने लार्जकैप में अपना निवेश बढ़ाया है, वहीं बड़ी संख्या में योजनाओं ने स्मॉल और मिडकैप (एसएमआईडी) में अपना आवंटन बढ़ाया है।
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों अनुसार मार्च के आखिर तक 39 फ्लेक्सीकैप योजनाओं में से 22 का लार्जकैप में निवेश मार्च 2025 की तुलना में ज्यादा था जबकि बाकी 17 ने स्मॉल और मिडकैप में अपना निवेश बढ़ाया। सैमको, 360 वन और मोतीलाल ओसवाल की योजनाएं लार्जकैप निवेश बढ़ाने में आगे रहीं जबकि आदित्य बिड़ला सन लाइफ, ऐक्सिस और क्वांट की योजनाओं ने इसमें सबसे बड़ी कटौती की।
फंड मैनेजरों के अनुसार जहां एक ओर आवंटन में बदलाव संकेत देते हैं कि अवसर कहां उभर रहे हैं, वहीं फ्लेक्सीकैप योजनाओं में मिलाजुला मार्केटकैप अक्सर किसी खास सेगमेंट पर सबसे ज्यादा गिरे शेयरों पर निर्णय के बजाय शेयरों के चयन से जुड़ा होता है।
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के सीआईओ (इक्विटी) हरीश कृष्णन ने कहा, यह बदलाव इस बात पर निर्भर करता है कि हमें कहां मौके मिल रहे हैं। जिन सेक्टरों में हम अपना निवेश बढ़ाना चाहते हैं जैसे आईटी सेवा, बीमा, बैंकिंग, केमिकल्स, बिल्डिंग मटीरियल्स, रिटेल और कंज्यूमर डिस्ट्रीब्यूशन, वहां हमें कई मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां मिल रही हैं, जो असल में अपने सेक्टर में अग्रणी हैं। जैसे-जैसे व्यापक बाजार में पहले की कुछ तेजी कम हुई है, ये अवसर और भी ज्यादा आकर्षक हो गए हैं।
ऐक्सिस एमएफ के वरिष्ठ फंड मैनेजर और इक्विटी शोध प्रमुख सचिन रेलेकर ने कहा कि ऐक्सिस फ्लेक्सीकैप फंड का मौजूदा मार्केटकैप मिश्रण काफी हद तक निचले स्तर पर आ चुके शेयरों के चयन का ही परिणाम है। उन्होंने कहा, फंड में मार्केट कैप के हिसाब से निवेश में आया बदलाव, ऊपर से नीचे (टॉप-डाउन) मार्केट-कैप का फैसला नहीं है। यह मुख्य रूप से हमारे बुनियादी नज़रिये में आए बदलाव का नतीजा है। हमने कुछ ऐसी कंपनियों में अपना निवेश घटाया है जो हमारी नजर में ज्यादा जोखिम वाली हैं। हमने चुनिंदा थीम और आकर्षक मूल्यांकन वाले सेगमेंटों में अपना निवेश बढ़ाया है। इसलिए जो मिलाजुला मार्केट-कैप सामने आया है, वह निचले स्तर पर आ चुके शेयरों के चयन का ही नतीजा है, न कि मार्केट-कैप रणनीति में सोच समझकर किया गया कोई बदलाव।
पिछले एक साल में लार्जकैप में अपना निवेश करीब 25 फीसदी तक बढ़ाने वाले सैमको एमएफ ने इस बढ़ोतरी का श्रेय लार्जकैप सेगमेंट में मजबूत रफ्तार को दिया है। सैमको फंड के सीईओ विराज गांधी ने कहा, एक फंड हाउस के तौर पर हमारी निवेश रणनीति मोमेंटम फैक्टर पर आधारित है। मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर मोमेंटम के कारण हमारे फ्लेक्सीकैप फंड में लार्जकैप का हिस्सा बढ़ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार ये बदलाव पहले की पोजीशन, बेंचमार्क में बदलाव और फ्लेक्सीकैप मैंडेट में मौजूद लचीलेपन के साथ-साथ योजनाओं का आकार भी दिखाते हैं। खास बात यह है कि जिन तीन योजनाओं में लार्जकैप निवेश में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई, वे निचले आधार से शुरू हुई थीं। बढ़ोतरी के बाद भी सैमको, 360 वन और मोतीलाल ओसवाल के फ्लेक्सीकैप फंडों में मार्च 2026 तक लार्जकैप में 60 फीसदी या उससे कम हिस्सा था।
इसके विपरीत ज्यादातर बड़े फ्लेक्सीकैप फंडों और बेंचमार्क निफ्टी 500 का 60 फीसदी से ज्यादा निवेश लार्ज कैप में है। इस श्रेणी का दूसरा सबसे बड़ा फंड एचडीएफसी फ्लेक्सीकैप फंड मार्च 2026 में 78 फीसदी के साथ लार्ज कैप में सबसे ज्यादा निवेश वाला फंड था। इस श्रेणी की सबसे बड़ी योजना पराग पारिख फ्लैक्सीपैक फंड ने भी लार्ज कैप की ओर अपना मजबूत झुकाव रखा और उसके कुल 67.2 फीसदी इक्विटी निवेश में से 62.5 फीसदी लार्ज कैप में था।