रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी टेलीकॉम और डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ प्लान में बड़ा बदलाव कर सकती है। कंपनी अब पुराने निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय नए शेयर जारी करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो आईपीओ से जुटाया गया पूरा पैसा सीधे जियो के पास जाएगा।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक जियो के कुछ निवेशक कंपनी की ज्यादा वैल्यूएशन चाहते हैं, लेकिन रिलायंस फिलहाल ज्यादा आक्रामक कीमत तय करने के पक्ष में नहीं है। कंपनी चाहती है कि लिस्टिंग के दिन छोटे निवेशकों को नुकसान न उठाना पड़े।
अगर आईपीओ नए शेयरों के जरिए आता है तो मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि रिलायंस की सोच यह है कि पहले शेयर बाजार में लिस्टिंग हो जाए और बाद में बाजार खुद कंपनी की सही कीमत तय करे। इसके बाद प्राइवेट इक्विटी निवेशक धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि आईपीओ से जुटाई गई रकम में से करीब 250 अरब रुपये का इस्तेमाल कर्ज कम करने में किया जा सकता है।
जियो का यह आईपीओ रिलायंस समूह की किसी बड़ी कंपनी का करीब 20 साल बाद आने वाला पहला बड़ा आईपीओ हो सकता है। कंपनी ने मार्च में इसकी तैयारी शुरू की थी और इसके लिए कई बड़े निवेश बैंकों को जोड़ा गया है। माना जा रहा है कि जियो अगले एक-दो हफ्तों में आईपीओ से जुड़े शुरुआती दस्तावेज जमा कर सकती है। ऐसे में कंपनी की लिस्टिंग जुलाई तक जा सकती है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)