आपका पैसा

Income Tax New Rules: बदल गए 26AS और फॉर्म 16 जैसे पुराने फॉर्म, अब इन नए फॉर्म से होगा आपका सामना

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 26AS और फॉर्म 16 सहित कई पुराने फॉर्म्स बदलकर नए पारदर्शी फॉर्म पेश किए हैं, जिससे अब टैक्स चोरी रोकना और रिटर्न भरना आसान होगा

Published by
अमित कुमार   
Last Updated- May 12, 2026 | 7:58 PM IST

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स फॉर्म्स के पुराने ढांचे में कई बड़े किए हैं। यह नया बदलाव सिर्फ फॉर्म्स के नाम बदलने जैसा नहीं है, बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे टैक्सपेयर्स के रिपोर्टिंग के तरीके और डिपार्टमेंट की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आएगा।

चाहे आप नौकरीपेशा हों, पेंशनभोगी हों, फ्रीलांसर हों या बिजनेसमैन, इन नए फॉर्म्स का असर हर किसी पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद टैक्स डेटा को ज्यादा सटीक बनाना और जानकारी छिपाने की गुंजाइश को खत्म करना है।

Form 26AS की जगह अब Form 168: पाई-पाई का हिसाब

अब तक टीडीएस (TDS) के मिलान के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 26AS की जगह अब Form 168 लेगा। यह नया फॉर्म अब सालाना टैक्स सूचना विवरण (Annual Information Statement) के तौर पर काम करेगा।

टैक्सस्पैनर (Taxspanner) के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक के मुताबिक, “Form 168 पुराने 26AS के मुकाबले काफी व्यापक होने की उम्मीद है। इसमें न केवल टीडीएस और टीसीएस (TCS) की जानकारी होगी, बल्कि वित्तीय लेनदेन और आय का विस्तृत डेटा भी शामिल होगा।”

उन्होंने चेतावनी भी दी कि इससे पारदर्शिता तो बढ़ेगी, लेकिन जांच का दायरा भी बढ़ जाएगा, इसलिए रिटर्न भरने से पहले लेनदेन का मिलान करना बेहद जरूरी है।

वहीं, सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर रीतिका नैय्यर का कहना है कि डिपार्टमेंट के पास पहले से मौजूद डेटा, जैसे शेयर बाजार के लेनदेन और भारी-भरकम निवेश की जानकारी भी अब Form 168 में एक साथ दिखेगी। इससे ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न भरना आसान होगा क्योंकि ज्यादातर जानकारी पहले से भरी हुई (Pre-filled) मिलेगी।

पैन (PAN) आवेदन के लिए अब 4 अलग-अलग फॉर्म

पुराने सिस्टम में पैन कार्ड बनवाने के लिए फॉर्म 49A और 49AA का इस्तेमाल होता था, जिससे अक्सर आवेदकों को कन्फ्यूजन होता था। अब सरकार ने इसे हटाकर फॉर्म 93, 94, 95 और 96 पेश किए हैं।

रीतिका नैय्यर ने बताया कि पहले का सिस्टम काफी मुश्किल भरा था। अब भारतीय व्यक्तियों, भारतीय संस्थाओं, विदेशी नागरिकों और विदेशी संस्थाओं के लिए अलग-अलग फॉर्म तय कर दिए गए हैं।

इस पर सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर और टैक्स हेड एस आर पटनायक का कहना है कि इन नए फॉर्म्स में कैटेगरी के हिसाब से अलग फील्ड्स दिए गए हैं। साथ ही आधार और पैन के रिकॉर्ड्स के बीच ‘नेम-मैचिंग’ (नाम के मिलान) के नियम कड़े किए गए हैं। इससे पैन अलॉटमेंट में होने वाली गलतियां कम होंगी और काम तेजी से होगा।

Also Read: लोन नहीं लेना है, फिर भी अपना क्रेडिट स्कोर बेहतर रखना क्यों जरूरी है? एक्सपर्ट से समझें इसके फायदें

कम या जीरो TDS कटौती के लिए फॉर्म 121 और 128

सीनियर सिटीजन और कम आय वाले लोगों को अक्सर टीडीएस कटने के बाद रिफंड का इंतजार करना पड़ता था। अब Form 121 और 128 इस समस्या को दूर करेंगे।

एस आर पटनायक ने समझाया कि Form 121 पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह लेगा। यह उन लोगों के लिए एक ही डिक्लेरेशन मैकेनिज्म होगा जिनकी टैक्स देनदारी शून्य है। खासकर एफडी (FD) के ब्याज पर निर्भर रहने वाले रिटायर लोगों के लिए यह बड़ी राहत है।

वहीं, Form 128 पुराने फॉर्म 13 की जगह लेगा। रीतिका नैय्यर के अनुसार, यह उन बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए फायदेमंद होगा जिनकी टैक्स देनदारी कम है, ताकि उनका कैश-फ्लो फालतू टीडीएस कटने की वजह से न फंसे।

सैलरी और फ्रीलांसर्स के लिए बदले ‘टीडीएस सर्टिफिकेट’

टीडीएस सर्टिफिकेट के पुराने सिस्टम को पूरी तरह बदलते हुए अब Form 130 और 131 लाए गए हैं।

  • Form 130: सैलरी और पेंशन पाने वालों के लिए पुराने ‘फॉर्म 16’ की जगह लेगा।
  • Form 131: फ्रीलांसर्स और प्रोफेशनल फीस पाने वालों के लिए पुराने ‘फॉर्म 16A’ की जगह लेगा।

सुधीर कौशिक का सुझाव है कि टैक्सपेयर्स को अपनी कटौती की सटीक जानकारी देने के लिए इन्हीं फॉर्म्स का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं एस आर पटनायक ने सलाह दी है कि फ्रीलांसर्स और नौकरीपेशा लोग इन फॉर्म्स को अपने Form 168, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप के साथ नियमित तौर पर चेक करते रहें। अगर क्लाइंट या कंपनी टीडीएस अपडेट करने में देरी करती है, तो इससे बाद में टैक्स नोटिस आ सकता है।

First Published : May 12, 2026 | 7:58 PM IST