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लंबे समय बाद IPO बाजार में लौटी चमक, कहीं ‘बबल’ तो नहीं? आगे किन जोखिमों पर रखें नजर?

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ज्यादातर IPO की मजबूत शुरुआत, लेकिन कमजोर बिजनेस मॉडल और महंगी वैल्युएशन बढ़ा सकते हैं निवेशकों का जोखिम

Last Updated- August 25, 2026 | 5:06 PM IST
IPO Market 2026
प्रतीकात्मक फोटो

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर बना हुआ है। लेकिन प्राइमरी मार्केट में रौनक देखने को मिल रहा है। 2026 में अब तक 60 से ज्यादा मेनबोर्ड IPO शेयर बाजार में लिस्ट हो चुके हैं। इनमें से ज्यादातर कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से ऊपर खुले हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि इक्विटी के मुकाबले प्राइमरी मार्केट में जोश की वजह निवेशकों का बदलता नजरिया है। दरअसल, निवेशक नए अवसरों, ग्रोथ पर फोकस कर रहे। साथ ही आईपीओ बाजार में नए और अलग बिजनेस मॉडल वाले कंपनियों में निवेश का मौका भी आकर्षण की वजह बना है।

दमदार IPO लिस्टिंग की वजह क्या है?

SBI Securities के प्रमुख (फंडामेंटल रिसर्च) सनी अग्रवाल कहते हैं कि आईपीओ बाजार में निवेशकों को नए तरह के बिजनेस मॉडल, दमदार इकोनॉमिक moats, अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले ठीठठाक वैल्युएशंस वाली कंपनियों में निवेश का मौका मिल रहा। संस्थागत निवेशकों, हाई नेटवर्थ वाले निवेशकों और रिटेल निवेशकों की ओर से इकट्ठा डिमांड से सप्लाई को लेकर बैलेंश बिगड़ जा रहा।

ऊपर से कभी-कभी इश्यू साइज भी छोटा रहता है, तो डिमांड और सप्लाई में बैलेंस बिगड़ जाता है। ऐसे में जब निवेशकों को आईपीओ में शेयर नहीं अलॉट होते हैं तो वो लिस्टिंग के बाद तुरंत शेयरों को खरीदने जाते हैं। नतीजतन, लिस्टिंग के दिन शेयरों का परफॉर्मेंस तगड़ा रहता है।

Also Read: Shankesh Jewellers IPO Listing: कमजोर GMP के बावजूद आईपीओ का शानदार डेब्यू, पहले ही दिन निवेशकों को मिला 11% प्रीमियम

IPO में रौनक, कहीं बबल तो नहीं?

सनी अग्रवाल ने कहा कि आईपीओ बाजार में जारी मौजूदा मोमेंटम इस बात पर निर्भर करेगा कि मार्केट में किस तरह की कंपनियां आ रही हैं। जिन कंपनियों के पास असल में कॉम्पिटिटिव एडवांटेज हैं वे समय के साथ प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहरा सकती हैं और उसे बनाए रख सकती हैं। इन कंपनियों में एडवांटेज चाहे टेक्नोलॉजी, प्राइसिंग पावर, डिस्ट्रीब्यूशन या मज़बूत ब्रांड के ज़रिए ही क्यों न हो।

लेकिन उन बिज़नेस में रिस्क ज़्यादा होता है जो ज़्यादा कमोडिटाइज़्ड हैं, जिनका मार्जिन कम है या जो ऐसे मॉडल पर काम करते हैं जिनकी आसानी से नकल की जा सकती है। ऐसी कंपनियों के लिए लंबे समय तक हाई वैल्यूएशन और हाई मल्टीपल को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

इक्विटी मार्केट में सुस्ती, तो प्राइमरी मार्केट में जोश क्यों?

मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि प्राइमरी मार्केट में मौजूदा जोश की नजह निवेशकों का नजरिया है। क्योंकि फिलहाल निवेशक ग्रोथ, नए अवसरों और नएपन वाली कंपनियों पर फोकस कर रहे, जो आईपीओ बाजार में मिल रहा और इक्विटी मार्केट में नहीं। यही वजह है कि ग्रोथ क्षमता, बिजनेस क्वालिटी और नएपन के कॉम्बिनेशन से संस्थागत, HNI और रिटेल निवेशकों को आईपीओ मार्केट ज्यादा पसंद आ रहा।

 

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज/एक्सपर्ट की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - August 25, 2026 | 5:01 PM IST

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