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आईआईएफएल फाइनैंस ओपन ऑफर विवाद में फंसी

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Last Updated- December 15, 2022 | 8:00 AM IST

आईआईएफएल फाइनैंस का शेयर गुरुवार को अपर सर्किट को छू गया जब नियामकीय फाइलिंग से पता चला कि कंपनी में प्रवर्तक की हिस्सेदारी 25 फीसदी की सीमा के पार चली गई है क्योंकि चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी निर्मल जैन ने खुले बाजार से खरीद की है। उधर, कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजी सूचना में कहा, स्पष्ट किया जाता है कि कंपनी में प्रवर्तक समूह का मताधिकार 25 फीसदी के पार नहीं गया है और समूह का इरादा 25 फीसदी से ज्यादा मताधिकार हासिल करने या सार्वजनिक पेशकश का नहीं है।
हालांकि 24 जून को कंपनी की तरफ से दी गई सूचना से पता चलता है कि कंपनी में प्रवर्तक की हिस्सेदारी 24.94 फीसदी से बढ़कर 25.06 फीसदी हो गई क्योंकि बुधवार को जैन ने खुले बाजार से 0.12 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी।
आईआईएफएल फाइनैंस की 25 जून की नियामकीय सूचना से पता चलता है कि प्रवर्तक इकाई आरडेंट इन्पेक्स ने गुरुवार को 0.07 फीसदी हिस्सेदारी बेची। ताजा फाइलिंग बताती है कि प्रवर्तक की संयुक्त शेयरधारिता 24.99 फीसदी थी, जो खुली पेशकश की अनिवार्यता की सीमा 25 फीसदी से मामूली कम है।
बाजार में खबर फैल गई कि खुली पेशकश आएगी क्योंकि जैन की तरफ से बुधवार को हुई खरीद के चलते शेयरधारिता 25 फीसदी के पार चली गई और आरडेंट की तरफ से बिकवाली गुरुवार को हुई।
जैन ने कहा कि शेयरधारिता की सीमा का उल्लंघन नहीं हुआ है क्योंकि आरडेंट की तरफ से बिकवाली डीमैट खाते में इसके प्रतिबिंबित होने से पहले हुई।
जैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, रिपोर्टिंग में कुछ तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें बाद में सुधार लिया गया। प्रवर्तक की शेयरधारिता खुली पेशकश की अनिवार्यता की सीमा 25 फीसदी से कम है। हमने शेयरोंं का अधिग्रहण किया और हमारे डीमैट खाते में उसके आने से पहले ही अन्य प्रवर्तक इकाई ने बिकवाली कर दी। ऐसे में तकनीकी तौर पर मताधिकार 25 फीसदी की सीमा के पार नहीं गया है, लिहाजा खुली पेशकश नहीं आएगी।
भारतीय बाजार में किसी ट्रेड का निपटान एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर खरीदारी या बिकवाली के दो दिन बाद होता है। आईआईएफएल ने गुरुवार को नियामकीय सूचना में कहा, मताधिकार के प्रतिशत की गणना शेयरों की वास्तविक डिलिवरी के आधार पर की गई थी, जिसका होना बाकी है। डिलिवरी और मताधिकार के अधिग्रहण से पहले शेयरों की बिक्री कर ली गई और शेयरोंं की डिलिवरी कर दी गई। ऐसे में 25 फीसदी की सीमा वास्तव में नहीं लांघी गई।
प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म एसईएस के संस्थापक जे एन गुप्ता ने कहा, अगर हम कानून पर नजर डालें तो शेयरधारिता का उल्लंघन नहीं हुआ है। नियम हालांकि इस पर स्पष्ट नहीं है। मुझे नहीं लगता कि उल्लंघन हुआ है। अगर एक ही इकाई खरीदारी व बिकवाली करते तो हम तर्क दे सकते थे। हालांकि दो अलग-अलग इकाइयां इसमें शामिल थी और शेयर खाते में प्रतिबिंबित नहीं हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों में स्पष्टीकरण की दरकार है कि वास्तविक अधिग्रहण या डीमैट खाते में क्रेडिट, किसे संदर्भ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि बाजार नियामक सेबी को इस मसले पर फैसला लेना होगा।
आईआईएफएल फाइनैंस का शेयर 82.2 रुपये पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का मूल्यांकन 3,110 करोड़ रुपये रहा। गुरुवार को आईआईएफएल समूह की अन्य कंपनियों में भी तेजी आई। आईआईएफएल वेल्थ 8.8 फीसदी चढ़ा जबकि आईआईएफएल सिक्योरिटीज में 20 फीसदी और 5 पैसा कैपिटल 15.5 फीसदी चढ़ा।

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First Published - June 26, 2020 | 12:15 AM IST

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