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विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली, 2 दिन में ₹19,837 करोड़ निकाले

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अप्रैल की शुरुआत में वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी के चलते एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से भारी निकासी जारी रखी।

Last Updated- April 05, 2026 | 3:33 PM IST
FPI
Representative image

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अप्रैल की शुरुआत में भी भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालना जारी रखा है। अप्रैल के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही FPIs ने करीब ₹19,837 करोड़ (लगभग $2.1 अरब) की निकासी की है।

यह बिकवाली ऐसे समय में देखने को मिली है जब पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये में कमजोरी जैसे वैश्विक कारण बाजार पर दबाव बना रहे हैं।

मार्च महीने में भी FPIs ने भारी निकासी की थी और करीब ₹1.17 लाख करोड़ (लगभग $12.7 अरब) बाजार से बाहर निकाले थे। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है। इससे पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक था।

NSDL के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक FPIs कुल मिलाकर करीब ₹1.5 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में 2 अप्रैल तक कैश मार्केट में ही FPIs ने ₹19,837 करोड़ के शेयर बेच दिए हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशकों का रुझान लगातार सतर्क बना हुआ है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है।

वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जारी रहने, कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये में लगातार गिरावट के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली देखने को मिल रही है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के अनुसार, रुपये में गिरावट और डॉलर में मजबूती ने भी निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई है और आगे और कमजोरी की आशंका भी बनी हुई है। इसी वजह से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्प अधिक आकर्षक हो गए हैं। ऐसे में वैश्विक निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

विजयकुमार ने यह भी कहा कि लगातार हो रही बिकवाली के कारण भारतीय बाजार के कई हिस्सों में वैल्यूएशन अब उचित स्तर पर पहुंच गए हैं और कुछ क्षेत्रों में आकर्षक भी दिख रहे हैं। हालांकि, उनका मानना है कि जब तक युद्ध को लेकर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तब तक एफपीआई की वापसी मुश्किल बनी रहेगी।

-पीटीआई इनपुट के साथ

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First Published - April 5, 2026 | 3:33 PM IST

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