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FIIs बेच रहे, DIIs संभाल रहे- क्या युद्ध खत्म होते ही बाजार में आएगी नई तेजी?

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विदेशी निवेशक बेच रहे, घरेलू खरीद रहे, क्या अब बदलेगा बाजार ट्रेंड?

Last Updated- April 08, 2026 | 9:02 AM IST
FII Shareholding

Stock Market Outlook: वित्त वर्ष 2026 खत्म होने के साथ भारतीय शेयर बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ सरकार और आरबीआई के कई बड़े फैसलों से बाजार को सहारा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान-इजराइल/अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासतौर पर भारत की बड़ी तेल जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य से पूरी होती है, इसलिए वहां तनाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर पड़ रहा है।

सरकार की नीतियों, टैक्स में राहत, व्यापार समझौतों और मजबूत जीडीपी आंकड़ों से बाजार को मजबूती मिलनी चाहिए थी। घरेलू निवेशकों का भरोसा भी बना हुआ है। लेकिन युद्ध के कारण फिलहाल बाजार का माहौल बिगड़ा हुआ है और निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

कमाई की रफ्तार धीमी होने का अनुमान

मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, 4QFY26 में कंपनियों की कमाई की ग्रोथ धीमी रह सकती है। इस तिमाही में करीब 10% की बढ़त का अनुमान है, जो पिछली तिमाहियों के 18% और 15% से कम है। बड़ी कंपनियों में ग्रोथ सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।

तेल और गैस की कीमतों में तेजी का असर कई सेक्टरों पर पड़ा है। इससे लागत बढ़ी है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आया है। इसी वजह से कमाई के अनुमान भी घटाए गए हैं। मार्च 2026 में कमाई के अनुमान में कटौती देखी गई और FY27 के लिए भी अनुमान कम किए गए हैं।

बाजार में गिरावट और बढ़ा जोखिम

तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों का जोखिम बढ़ा है और बाजार में गिरावट देखने को मिली है। जब तक ईरान-इजराइल विवाद का हल नहीं निकलता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और मंदी का खतरा बढ़ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है, वहां महंगाई, रुपये पर दबाव और मांग में कमजोरी आ सकती है।

सरकारी कदमों का असर देर से दिखेगा

सरकार और आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 में कई बड़े कदम उठाए हैं, जैसे ब्याज दर में कटौती, लिक्विडिटी बढ़ाना, टैक्स में राहत और नए व्यापार समझौते। इनका पूरा असर FY27 में दिखने की उम्मीद है, जब वैश्विक स्थिति बेहतर होगी।

हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार के वैल्युएशन अब पहले से सस्ते हो गए हैं। निफ्टी अब अपने औसत से नीचे ट्रेड कर रहा है और उभरते बाजारों के मुकाबले भी इसका प्रीमियम कम हो गया है। इससे आगे सुधार की संभावना बनती है।

घरेलू निवेशक बने सहारा

घरेलू निवेशकों ने लगातार बाजार में पैसा लगाया है और यही बाजार की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं। वहीं विदेशी निवेशकों ने मार्च में बड़ी बिकवाली की, लेकिन मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, युद्ध खत्म होने के बाद उनके लौटने की उम्मीद है।

Stock Market Outlook: आगे क्या उम्मीद?

रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 के लिए आधार मजबूत है और कमाई में अच्छी ग्रोथ संभव है। हालांकि फिलहाल बाजार की दिशा युद्ध पर निर्भर है। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, बाजार में तेजी लौट सकती है।

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First Published - April 8, 2026 | 9:02 AM IST

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