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Created by shalu sengar हर सुरक्षा चुनौती का समाधान लोगों को मारकर नहीं कर सकते’…..

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Published by
अभिलाष महाजन   
Last Updated- June 19, 2026 | 3:54 PM IST

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका-ईरान समझौते की आलोचना करने वाले इजराइली नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान सिर्फ सैन्य कार्रवाई और लोगों को मारकर नहीं कर सकता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वेंस की यह टिप्पणी ट्रंप प्रशासन के किसी शीर्ष अधिकारी की ओर से इजराइल की सार्वजनिक आलोचना का दुर्लभ उदाहरण है। update

 

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वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते को लेकर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

वेंस ने इजराइली आलोचकों पर क्यों साधा निशाना?

जेडी वेंस इस सप्ताह हुए उस समझौते का बचाव कर रहे थे, जिसका मकसद ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करना है। हालांकि इस समझौते की अमेरिका और इजराइल दोनों जगह आलोचना हो रही है।

आलोचकों का कहना है कि यह समझौता ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता और न ही तेहरान की परमाणु सुविधाओं को समाप्त करने की स्पष्ट रूपरेखा देता है। इजराइली अधिकारियों ने यह भी चिंता जताई है कि यह समझौता लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई की क्षमता को सीमित कर सकता है।

वेंस ने खास तौर पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के उन सदस्यों की आलोचना की, जिन्होंने इस समझौते की निंदा की और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर व्यक्तिगत हमले किए।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार वेंस ने कहा, “इस समय पूरी दुनिया में डॉनल्ड जे. ट्रंप ही ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इजराइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं और वह दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति के नेता भी हैं। अगर मैं इजराइली सरकार का मंत्री होता तो अपने इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता।”

किन इजराइली नेताओं को निशाने पर लिया?

वेंस ने विशेष रूप से इजराइल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना की। दोनों नेताओं ने अमेरिका-ईरान समझौते का खुलकर विरोध किया है। बेन-गवीर लगातार कह रहे हैं कि यह समझौता इजराइल के हित में नहीं है और इजराइली सेना को लेबनान में अपनी तैनाती जारी रखनी चाहिए।

इन नेताओं के रुख पर सवाल उठाते हुए वेंस ने कहा, “आपका समाधान आखिर क्या है? आप 90 लाख लोगों का देश हैं। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान लोगों को मारकर नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा कि समझौते के खिलाफ प्रतिक्रिया अमेरिका के प्रति अविश्वास को दर्शाती है।

वेंस ने कहा, “मुझे इजराइल में यह पूरी प्रतिक्रिया थोड़ी अजीब लगती है, क्योंकि यह अविश्वास से पैदा हुई है। मेरा मानना है कि अमेरिका ने उस क्षेत्र का विश्वास अर्जित किया है।”

बेन-गवीर ने क्या जवाब दिया?

वेंस की टिप्पणी पर बेन-गवीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “समाधान यही है… 21वीं सदी के नाजियों से उसी तरह निपटना चाहिए जैसे अमेरिका ने 20वीं सदी के नाजियों से निपटा था।”

रॉयटर्स के अनुसार, कुछ वरिष्ठ इजराइली अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता इजराइल के लिए खराब है क्योंकि यह ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं करता।

‘ट्रंप ही इजराइल के सबसे बड़े दोस्त’

समझौते का बचाव करते हुए वेंस ने नेतन्याहू सरकार को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इजराइल अब भी अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक समर्थन पर काफी हद तक निर्भर है और उसे इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

वेंस ने याद दिलाया कि इजराइल की रक्षा में इस्तेमाल होने वाले लगभग दो-तिहाई हथियार अमेरिका द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं ने उठाया है। उन्होंने कहा, “इजराइल की सबसे बड़ी समस्या डॉनल्ड ट्रंप नहीं हैं। जो कोई भी इजराइल में यह सोचता है कि उसकी सबसे बड़ी समस्या अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, उसे वास्तविकता को समझने की जरूरत है।”

ट्रंप ने आलोचनाओं पर क्या कहा?

वेंस की टिप्पणी के कुछ समय बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी समझौते का समर्थन किया और सभी पक्षों से इसका पालन करने की अपील की। सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “हम सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम की उम्मीद करते हैं, जिसमें लेबनान, हिजबुल्लाह और इजराइल भी शामिल हैं।” समझौते की घोषणा के बाद भी इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हमले जारी रहने पर ट्रंप ने दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा।

क्या ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं?

वेंस की टिप्पणी को ट्रंप प्रशासन और नेतन्याहू सरकार के बीच बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कुछ महीने पहले दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी, लेकिन अब अमेरिका इस समझौते को व्यापक क्षेत्रीय युद्ध रोकने का अवसर मान रहा है, जबकि नेतन्याहू सरकार के कई सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं। वेंस का संदेश साफ था कि इजराइल पहले से अधिक अमेरिकी समर्थन पर निर्भर हो गया है और उसे इस हकीकत को समझना होगा।

लेबनान बन रहा विवाद का कारण?

दक्षिणी लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव का एक और कारण बन गई है। अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हमले जारी हैं, जिससे युद्धविराम टूटने की आशंका बढ़ गई है।

वेंस ने बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि इनमें नागरिक हताहत हो रहे हैं और इससे शांति प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन उसे शांति प्रक्रिया का सम्मान भी करना चाहिए।

हाल के दिनों में ट्रंप ने भी इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में “कुछ नरमी” दिखानी चाहिए। बीबीसी के अनुसार ट्रंप ने कहा, “मेरे नेतन्याहू के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन मुझे उनका वह हमला पसंद नहीं आया, वह कुछ ज्यादा ही था।”

नेतन्याहू का क्या कहना है?

First Published : June 19, 2026 | 2:23 PM IST