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EPFO Update: 5 साल से पहले PF निकाला तो कितना कटेगा टैक्स? EPFO 3.0 से पहले जान लें जरूरी बात

EPFO 3.0 के तहत PF निकासी तेज और डिजिटल होगी, लेकिन टैक्स से बचने के लिए 5 साल वाले नियम को समझना जरूरी है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 19, 2026 | 2:25 PM IST

EPFO 3.0 Update: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 को लागू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य पीएफ खाताधारकों को पहले से अधिक तेज, सरल और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना है। नए सिस्टम के तहत पीएफ निकासी की प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल हो जाएगी। हालांकि, पैसा निकालने से पहले इससे जुड़े टैक्स नियमों को समझना भी बेहद जरूरी है।

क्या है EPFO 3.0?

EPFO 3.0 को पीएफ सेवाओं का बड़ा डिजिटल अपग्रेड माना जा रहा है। इसके लागू होने के बाद सदस्य बैंकिंग सेवाओं की तरह अपने पीएफ खाते का उपयोग कर सकेंगे। नई व्यवस्था में UPI और ATM जैसे माध्यमों से भी पीएफ की राशि निकालने की सुविधा मिलने की संभावना है।

इसके अलावा क्लेम के ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दी गई है। वहीं, क्लेम निपटान का समय भी घटाकर लगभग तीन दिन किया जा रहा है। इससे आपातकालीन जरूरतों के दौरान फंड तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी।

पीएफ निकासी की सीमा क्या होगी?

नई व्यवस्था में सदस्य अपने पीएफ खाते में जमा कुल राशि का एक निश्चित हिस्सा ही निकाल सकेंगे। सामान्य परिस्थितियों में कुल बैलेंस का लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति होगी। साथ ही खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि बनाए रखना जरूरी रहेगा।

यदि कोई कर्मचारी बेरोजगार हो जाता है, तो वह अपने पीएफ फंड का 75 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिटायरमेंट के लिए कुछ राशि भविष्य के लिए सुरक्षित बनी रहे।

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पांच साल बाद निकासी पर नहीं देना होगा टैक्स

यदि कोई कर्मचारी लगातार पांच साल या उससे अधिक समय तक सेवा में रहता है और उसके बाद पीएफ की राशि निकालता है, तो पूरी निकासी टैक्स मुक्त रहती है। ऐसे मामलों में न तो टीडीएस कटता है और न ही निकाली गई राशि पर आयकर देनदारी बनती है।

EPFO 3.0: पांच साल से पहले निकासी पर क्या हैं नियम?

अगर कर्मचारी पांच साल की निरंतर सेवा पूरी होने से पहले पीएफ की राशि निकालता है, तो उस पर टैक्स नियम लागू हो सकते हैं। 50,000 रुपये से अधिक की निकासी पर टीडीएस काटा जा सकता है।

पैन कार्ड उपलब्ध होने पर आमतौर पर 10 प्रतिशत टीडीएस काटा जाता है, जबकि पैन न होने की स्थिति में यह दर काफी अधिक हो सकती है। इसके अलावा निकाली गई राशि को व्यक्ति की कुल आय में जोड़कर उसके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स भी लगाया जा सकता है।

किन मामलों में मिल सकती है टैक्स से राहत?

कुछ विशेष परिस्थितियों में पांच साल से पहले निकासी करने पर भी टैक्स नहीं देना पड़ता। उदाहरण के लिए गंभीर बीमारी के इलाज, घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा या विवाह जैसे आवश्यक कार्यों के लिए निकाली गई राशि पर छूट मिल सकती है।

इसके अलावा यदि कर्मचारी की नौकरी किसी अनिवार्य कारण से समाप्त हो जाती है या कंपनी का संचालन बंद हो जाता है, तो भी कुछ मामलों में पीएफ निकासी पर टैक्स राहत उपलब्ध हो सकती है।

EPFO 3.0: क्या रखें ध्यान?

EPFO 3.0 के आने से पीएफ निकासी की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक होने जा रही है। हालांकि, पैसा निकालने का फैसला करते समय सेवा अवधि और टैक्स नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से पांच साल से पहले निकासी करने वाले कर्मचारियों को संभावित टैक्स देनदारी के बारे में पहले से जानकारी रखनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

₹2.5 लाख से ज्यादा PF योगदान पर ब्याज होगा टैक्स के दायरे में

कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि भविष्य निधि (PF) में अधिक योगदान करने पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लग सकता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी का वार्षिक PF योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो इस सीमा से ऊपर जमा की गई राशि पर अर्जित ब्याज कर योग्य माना जाता है।

यह प्रावधान 1 अप्रैल 2021 के बाद किए गए PF योगदान पर लागू है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से अधिक आय वाले कर्मचारियों को मिलने वाले अतिरिक्त कर लाभ को सीमित करना है। ऐसे में उच्च वेतन वर्ग के कर्मचारियों को अपने PF निवेश और उससे जुड़ी कर देनदारी का ध्यान रखना चाहिए।

EPFO 3.0 से टैक्स नियमों में नहीं हुआ कोई बदलाव

हाल ही में चर्चा में रहे EPFO 3.0 को लेकर कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल है कि क्या इसके साथ PF निकासी और टैक्स से जुड़े नियमों में भी कोई बदलाव किया गया है। हालांकि ऐसा नहीं है।

EPFO 3.0 का फोकस केवल सेवाओं को अधिक डिजिटल, तेज और सुविधाजनक बनाना है। PF निकासी पर लागू टैक्स, टीडीएस और कर छूट से जुड़े सभी नियम पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगे। यानी कर्मचारियों को प्रक्रिया में आसानी और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन टैक्स नियमों में किसी अतिरिक्त राहत या बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

First Published : June 19, 2026 | 2:25 PM IST