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सोने की कीमतों में और गिरावट का खतरा, 4000 डॉलर तक फिसल सकता है भाव: प्रवीण सिंह

मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह के अनुसार, फेड के सख्त रुख, मजबूत डॉलर और गोल्ड ईटीएफ से निकासी के चलते सोना 4000 डॉलर तक फिसल सकता है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 19, 2026 | 3:37 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती समझौते और तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोने की कीमतों में आई राहत भरी तेजी ज्यादा समय तक टिकती नहीं दिख रही है। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत डॉलर और गोल्ड ईटीएफ से लगातार निकासी के कारण सोने पर दबाव बढ़ रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतें 4000 डॉलर प्रति औंस के स्तर का टेस्ट कर सकती हैं, जबकि कमजोरी बढ़ने पर 3800 डॉलर तक गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फेड के फैसले से बदला माहौल

17 जून को स्पॉट गोल्ड की कीमत बढ़कर 4383 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, जो आठ दिनों का हाई था। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद बाजार का रुख बदल गया। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन भविष्य में दरें बढ़ाने के संकेत दिए। इसके बाद सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई और यह 4219 डॉलर तक फिसल गया।

अमेरिका-ईरान समझौते से घटी सुरक्षित निवेश की मांग

प्रवीण सिंह के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत ईरान को तेल निर्यात की अनुमति मिली है और होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है। इससे तेल बाजार को राहत मिली और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग कमजोर पड़ी। हालांकि, समझौते से जुड़े कई मुद्दों पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

मजबूत अमेरिकी आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका के ताजा आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। मई में खुदरा बिक्री और रोजगार से जुड़े आंकड़ों में मजबूती देखने को मिली। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और फेड को ब्याज दरों में जल्द कटौती की जरूरत नहीं पड़ सकती।

फेड का सख्त रुख और मजबूत डॉलर

फेड चेयर केविन वार्श ने महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। फेड के कई सदस्य आगे ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसके बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया। मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं।

गोल्ड ईटीएफ से लगातार निकासी

वैश्विक गोल्ड ईटीएफ में लगातार आठवें दिन निवेशकों की निकासी दर्ज की गई है। ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 3.85 मिलियन औंस के बराबर निवेश गोल्ड ईटीएफ से निकल चुका है। यह निवेशकों की कमजोर होती धारणा का संकेत माना जा रहा है।

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आगे का क्या आउटलुक है?

प्रवीण सिंह का कहना है कि मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरों की आशंका और निवेशकों की घटती दिलचस्पी जैसे कारक निकट अवधि में सोने के लिए नकारात्मक हैं। उनके मुताबिक, सोने में आने वाली तेजी पर बिकवाली की रणनीति अपनाई जा सकती है। सोने के लिए 4300 डॉलर, 4400 डॉलर और 4450 डॉलर प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर हैं, जबकि नीचे की ओर 4000 डॉलर और 3800 डॉलर महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर रहेंगे।

First Published : June 19, 2026 | 3:29 PM IST