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उत्तर प्रदेश ने अल नीनो की वजह से इस मॉनसून में कम बारिश होने की आशंका के बावजूद मौजूदा खरीफ सत्र 2026-27 में 224.3 लाख टन धान उत्पादन का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य 2025-26 के 207.6 लाख टन उत्पादन से 8 प्रतिशत ज्यादा है। बीते वर्ष भारत के कुल धान उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत थी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में कहा था कि वे बारिश के बदलते रुझान के मद्देनजर हर स्थिति के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा, ‘खेती राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार है। किसानों को समय पर बीज, खाद, पानी, बिजली, फसल ऋण और वैज्ञानिक सलाह देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।’
इस बीच राज्य ने मौजूदा खरीफ सत्र के लिए 110.7 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है जबकि यह पिछले साल 106.6 लाख हेक्टेयर था। राज्य का लक्ष्य इस साल खरीफ उत्पादन में 18 प्रतिशत की वृद्धि करना भी है – यानी पिछले साल के 256.2 लाख टन के मुकाबले इस साल 302.6 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश की नजर 2047 तक वैश्विक कृषि और कृषि उत्पादों का निर्यातक बनने पर है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य अनाज, दालों और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की योजना बना रहा है। फिलहाल उत्तर प्रदेश अनाज, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद के उत्पादन में पहले स्थान पर है और देश में धान का सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य मक्का, दालों और तिलहन जैसी नकदी फसलों के उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।
इस बीच उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग ने कम बारिश या सूखे की स्थिति को देखते हुए कई आपातकालीन योजनाएं तैयार की हैं। इनमें जरूरत पड़ने पर उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल और कम समय में तैयार होने वाली अन्य फसलों का दायरा बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा संदेश सेवाओं और बड़े पैमाने पर संचार के माध्यमों से किसानों को खेती से जुड़ी तकनीकी सलाह दी जा रही है।
योगी ने कहा कि खाद की उपलब्धता पर नियमित रूप से नजर रखी जानी चाहिए और कृत्रिम कमी या कालाबाज़ारी की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि नहर प्रणाली का संचालन नहर के आखिरी छोर तक प्रभावी ढंग से तय किया जाए।