निवेश बैंकरों की शुल्क आय 2022 के पहले नौ महीने में काफी ज्यादा घट गई क्योंकि छोटे आकार के सौदों की संख्या ज्यादा रही। रेफ्निटिव के विश्लेषण के मुताबिक, भारत में निवेश बैंकिंग की गतिविधियों से 2022 के पहले नौ महीने में 66.84 करोड़ डॉलर सृजित हुए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23 फीसदी कम है और 2016 के बाद की समान अवधि में सबसे कम।
इक्विटी कैपिटल मार्केट (ईसीएम) शुल्क एक साल पहले के मुकाबले 46.4 फीसदी घटकर 13.84 करोड़ डॉलर रहा। वहीं डेट कैपिटल मार्केट (डीसीएम) शुल्क 10.1 फीसदी घटकर 12.8 करोड़ डॉलर रहा। बैंकरों ने विलय-अधिग्रहण में सलाहकारी सेवाओं के जरिये 25.21 करोड़ डॉलर की कमाई की, जो सालाना आधार पर 17.8 फीसदी कम है।
बैंकरों ने कहा कि छोटे आकार के सौदों का वर्चस्व रहने और एलआईसी जैसे काफी बड़े इश्यू के कारण शुल्क आय घटी क्योंकि एलआईसी में उच्च शुल्क हासिल नहीं हुआ।
कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के इक्विटी कैपिटल मार्केट प्रमुख वी. जयशंकर ने कहा, सरकारी सौदों के शुल्क का ढांचा अलग होता है। अगर आप निजी क्षेत्र के सौदों व जुटाई गई रकम पर नजर डालें तो साल 2022 का शुल्क साल 2021 के पास नहीं पहुंचने जा रहा। रेफ्निटिव के मुताबिक, कोटक महिंद्रा बैंक अभी इंडिया ईसीएम में अग्रणी है और उसकी बाजार हिस्सेदारी 16.9 फीसदी है।
ईसीएम के तहत आईपीओ, राइट्स इश्यू और शुद्ध रूप से इक्विटी फंड जुटाने के अन्य जरिये शामिल होते हैं और सितंबर 2022 तक इसके जरिये 13.5 अरब डॉलर जुटाए गए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 40.8 फीसदी कम है। हालांकि सालाना आधार पर ईसीएम पेशकश 24.3 फीसदी बढ़ा, जिससे सौदे का औसत आकार घट गया।
देश में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के जरिये साल के पहले नौ महीने में 5.6 अरब डॉलर जुटाए गए, जो एक साल पहले के मुकाबले 38.9 फीसदी कम है। अगर हम एलआईसी के 2.5 अरब डॉलर के आईपीओ को छोड़ दें तो जुटाई गई रकम और कम हो जाएगी। हालांकि आईपीओ की संख्या में सालाना आधार पर 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली।
बैंकरों ने कहा कि बाजार में उतारचढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण एफपीआई की निवेश निकासी हुई। इन वजहों से कंपनियां बड़े आकार का आईपीओ लाने से परहेज करती रहीं। साल 2022 में अब तक एफपीआई 22 अरब डॉलर के शेयरों की बिकवाली कर चुके हैं।