परिसंपत्ति बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई है। निवेशक तेल और गैस बाजार में पैदा हुईं चुनौतियों से होने वाले आर्थिक और वित्तीय नुकसान का हिसाब लगा रहे हैं। युद्ध की वजह से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आई तेजी का असर भारत समेत तेल और गैस आयात करने वाले देशों की खजाने और आर्थिक विकास पर पड़ने की आशंका है।
कंपनियों की कमाई पर भी इसका बुरा असर होने का अनुमान है, क्योंकि कई सेक्टरों की कंपनियों को ऊर्जा और कमोडिटी की ऊंची कीमतों की वजह से मार्जिन में कमी का सामना करना पड़ेगा। युद्ध और उसकी वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से यूरिया जैसे जरूरी उर्वरक की वैश्विक आपूर्ति भी बाधित हुई है, जिसका असर उत्तरी गोलार्ध में बुआई के आगामी मौसम में खाद्यान्न की उपज पर पड़ सकता है। इससे खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ सकती है।
घरेलू शेयर बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, क्योंकि भारत के खाड़ी देशों के साथ व्यापार और आर्थिक संबंध बहुत गहरे हैं। मार्च में निफ्टी 50 में 11.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का बड़े पैमाने पर बिकवाली करना था। कैलेंडर वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में सूचकांक अब 13 प्रतिशत नीचे है, जो कई साल में यह इसकी सबसे खराब पहली तिमाही रही है। इससे प्रमुख कंपनियों की भविष्य की कमाई और कीमत लक्ष्य में भारी कटौती की आशंका गहरा गई है। लेकिन ज्यादातर ब्रोकरेज और इक्विटी विश्लेषक अभी भी आशावादी हैं। उन्हें उम्मीद है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव जल्द खत्म हो जाएगा और आर्थिक गतिविधियां फिर से बहाल होने लगेंगी।
12 महीने के कीमत लक्ष्य में जो कमी की गई है, वह बहुत मामूली है। उदाहरण के लिए, निफ्टी-50 का एक साल का कीमत लक्ष्य दिसंबर 2025 के आखिर के 29,512 से घटकर इस साल मार्च के आखिर के लिए 29,471 रह गया है। इस हिसाब से, उम्मीद है कि मार्च 2027 के आखिर तक सूचकांक अपनी मार्च के आखिर की वैल्यू 22,331 से करीब 32 प्रतिशत ऊपर जाएगा।
ब्रोकरेज अनुमानों के आधार पर यहां निफ्टी-200 इंडेक्स के 10 ऐसे शेयर शामिल किए गए हैं, जिनमें अच्छी तेजी की संभावना है और वे मौजूदा स्तरों से ठीक-ठाक रिटर्न दे सकते हैं। इनमें से कई शेयरों को युद्ध के कारण आर्थिक उथल-पुथल से कमोडिटी की कीमतों में आई तेजी का फायदा मिलने की उम्मीद है।
एयर कंडीशनिंग उपकरण बनाने वाली इस दिग्गज कंपनी को आने वाले समय में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह है कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट और पिछले कुछ महीनों में कीमतों में हुई कुल17-18 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जिसका असर मांग पर पड़ सकता है। लेकिन सिटी रिसर्च का मानना है कि मांग का सबसे ज्यादा व्यस्त सीजन चौथी तिमाही होता है जिसमें रूम एसी/कूलिंग सेगमेंट में मांग बढ़ सकती है। मगर कच्चे माल की ऊंची लागत और मुद्रा के मूल्य में गिरावट के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव रह सकता है।
जेएम फाइनैंशियल रिसर्च के अनुसार कंपनी ने बढ़ती मांग को पूरा करने और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन क्षमता 14 लाख यूनिट से बढ़ाकर 18 लाख यूनिट कर ली है, जिससे उसका विनिर्माण नेटवर्क और भी मजबूत हुआ है।
कमर्शियल रेफ्रिजरेशन सेगमेंट में इस समय शानदार तेजी देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजहें हैं – घर के बाहर के उपभोग में बढ़ोतरी, संगठित फूड रिटेल और क्विक कॉमर्स का विस्तार और साथ ही तापमान को नियंत्रित रखने वाले भरोसेमंद स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर की लगातार बढ़ती जरूरत।
तीसरी तिमाही में पिछले पांच साल में सबसे मजबूत बिक्री वृद्धि की मदद से राजस्व में 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करने के बाद इस फूड और बेवरेज कंपनी के चौथी तिमाही में लगातार तीसरी तिमाही में दो अंक वाली वृद्धि (15 प्रतिशत) दोहराने का अनुमान है।
दूध और न्यूट्रिशन उत्पादों को छोड़ दें तो कन्फेक्शनरी और मैगी नूडल्स जैसे दूसरे सेगमेंट, साथ ही बेवरेज और तैयार डिशेज ने हाल की तिमाहियों में जीएसटी में कमी की वजह से मजबूत वृद्धि दर्ज की है।
एचएसबीसी रिसर्च का कहना है कि जहां कॉफी और कोको दोनों की कीमतें कम होने से सकल मार्जिन में सुधार आ सकता है, वहीं मार्केटिंग पर ज्यादा खर्च की वजह से परिचालन मुनाफा मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
नेस्ले का शेयर ऐक्सिस सिक्योरिटीज के टॉप पिक्स में से एक बना हुआ है, क्योंकि यह अपने मजबूत घरेलू फ्रैंचाइजी, लगातार इनोवेशन, डिस्ट्रीब्यूशन के जरिये बाजार में पैठ बनाने, क्षमता विस्तार और घर के बाहर होने वाली खपत में बढ़ोतरी की वजह से लंबी अवधि की वृद्धि के लिए अच्छी स्थिति में है।
तीसरी तिमाही में दवा निर्माता सिप्ला का प्रदर्शन धीमा रहा, क्योंकि अमेरिका में उसकी बिक्री और मार्जिन में काफी गिरावट आई।
अमेरिका में कारोबार में तेज गिरावट कैंसर की दवा ‘रेवलिमिड’ के जेनेरिक वर्सन की बिक्री में कमी और ‘एक्रोमेगली’ के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘लैनरियोटाइड’ की आपूर्ति में रुकावट की वजह से हुई। आपूर्ति से जुड़ी ये दिक्कतें आने वाले समय में भी कंपनी के प्रदर्शन पर असर डालती रहेंगी।
तीसरी तिमाही में घरेलू बिक्री मजबूत रही। इसमें सालाना आधार पर 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सिप्ला ने सांस, दिल की बीमारियों, डायबिटीज, इन्फेक्शन और यूरोलॉजी जैसे अहम चिकित्सा क्षेत्रों में बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है।
यूबीएस रिसर्च के मुताबिक कंपनी के विकास के मुख्य कारक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं और उसके पास नए उत्पादों की अच्छी-खासी श्रृंखला मौजूद है, जो मध्यावधि में कंपनी की वृद्धि को गति देगी।
वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीद अमेरिका में कारोबार के पटरी पर लौटने और भारत व उभरते बाजारों में कंपनी के मजबूत प्रदर्शन से है।
इसका पारंपरिक कारोबार चाय, नमक और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय एक स्थिर, नकदी सृजन के लिहाज से मजबूत आधार मुहैया कराता है, जो लगातार सकल मार्जिन के साथ मध्य से ऊंचे एक अंक में बढ़ रहा है।
मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने बताया है कि वृद्धि वाले कारोबार (संपन्न, नौरिशको और कैपिटल फूड्स) तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें अब अच्छी तरह से स्थापित खास वितरण ढांचे से मदद मिल रही है।
चौथी तिमाही में दो अंक में वृद्धि की रफ्तार जारी रह सकती है। इसे इंडिया फूड्स से मदद मिलेगी। इसके तीसरी तिमाही के 19 फीसदी के मुकाबले सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।
एचएसबीसी ने अपनी खरीदें रेटिंग बरकरार रखी है, क्योंकि टाटा कंज्यूमर को मजबूत अधिग्रहण और वितरण के साथ-साथ वृद्धि वाले कारोबार की बढ़ती मुनाफे की क्षमता का फायदा मिलेगा।
तीसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन के बाद तीनों बिजनेस क्षेत्रों – अस्पताल, फार्मेसी (हेल्थको) और एंसिलियरी हेल्थकेयर (एएचएलएल) के आगे भी वृद्धि की रफ्तार बनाए रखने की उम्मीद है।
इक्विरस रिसर्च का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 से नए बेड (वित्त वर्ष 2027-29 के बीच 2,815 की बढ़ोतरी) से मुनाफा बढ़ना शुरू हो जाएगा, क्योंकि ऑक्यूपेंसी का स्तर बढ़ जाएगा।
परिचालन खर्चों को लगातार तर्कसंगत बनाने और कम ईसॉप लागत से वित्त वर्ष 2028 तक डिजिटल ब्रेकइवन यानी घाटा खत्म करने में मदद मिल सकती है। इससे वित्त वर्ष 2026-28 की अवधि में हेल्थको के लिए परिचालन मुनाफा मार्जिन में 220 आधार अंक की बढ़ोतरी के साथ यह 6.6 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
भारतीय अस्पताल क्षेत्र में अपोलो सिटी रिसर्च का पसंदीदा बना हुआ है। कंपनी के प्रति इस सकारात्मक रुख के पीछे अस्पताल व्यवसाय की मजबूत संरचना, डिजिटल लाभप्रदता की ओर अग्रसर तेजी से बढ़ता फार्मेसी व्यवसाय और लंबी अवधि के औसत से नीचे बने रहने वाले मूल्यांकन (पूर्ण और सापेक्ष दोनों आधारों पर) शामिल हैं।
कोरोमंडल इंटरनैशनल ब्रोकरेज फर्मों के सबसे पसंदीदा उर्वरक शेयरों में से एक है, जिसे 9 ‘खरीदें’ और केवल 1 ‘बेचें’ की रेटिंग मिली है।
ब्रोकरेज के अनुमानों के अनुसार अगले 12 महीनों में शेयर के 2,614 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जो मौजूदा स्तर से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद उर्वरक और फसल पोषक तत्वों की कीमतों में सामान्य वृद्धि से कंपनी को फायदा होने की उम्मीद है।
दिसंबर 2025 में समाप्त 12 महीनों में इसका शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 45.5 प्रतिशत बढ़ा जबकि शुद्ध बिक्री एक साल पहले के मुकाबले 32.4 प्रतिशत बढ़ी।
कंपनी की आक्रामक विकास योजनाएं हैं। इनमें एग्रोकेमिकल प्रमुख एनएसीएल इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण और फॉस्फोरिक और सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र के साथ-साथ एक एनपीके ग्रैन्यूलेशन यूनिट का विनिर्माण शामिल है। यह विस्तार वित्त वर्ष 2027 से कंपनी के राजस्व और लाभ में योगदान देना शुरू कर देगा।
एल्युमीनियम निर्माता हिंडाल्को धातु कीमतों में वृद्धि के कारण ब्रोकरेज फर्मों के रडार पर सबसे ऊपर है। आपूर्ति में कमी और निर्माण, बिजली और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु खंडों से बढ़ती मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमीनियम की कीमतें लगभग 41 प्रतिशत बढ़ी हैं।
मौजूदा पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कीमतों में और वृद्धि की उम्मीद है, क्योंकि क्षेत्र की दो प्रमुख एल्युमीनियम कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में कमी आई है।
ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि भी एल्युमीनियम की कीमतों को ऊंचा रख सकती है, खासकर धातु के उत्पादन में ऊर्जा के इस्तेमाल को देखते हुए। इससे हिंडाल्को जैसे एकीकृत उत्पादकों के मार्जिन और लाभ में मदद मिलेगी।
दिसंबर 2025 को समाप्त 12 महीनों के दौरान कंपनी के शुद्ध लाभ में 15.7 प्रतिशत और शुद्ध बिक्री में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हैवी इंजन निर्माता कमिंस इंडिया ब्रोकरों का पसंदीदा एक और शेयर है। इसे 17 से ‘खरीदें’ और 5 से ‘बेचें’ रेटिंग मिली हुई है। हाल की तिमाही में कमिंस को अपने निर्यात एवं स्टेशनरी पावर सेगमेंट में हुए मजबूत सुधार का फायदा मिला है।
कंपनी को जनरेटर (जेनसेट) बाजार में सीपीसीबी 4 + में बदलाव का फायदा मिला है, जिससे प्रति यूनिट अधिक मूल्य की प्राप्ति हुई है। दिसंबर 2025 में समाप्त 12 महीनों में इसका शुद्ध लाभ 11.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शुद्ध बिक्री 13.3 प्रतिशत बढ़ी।
लेकिन अमेरिका-ईरान युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान कंपनी के लिए अल्पावधि के लिहाज से चुनौतियां हैं। यह शेयर 57.5 गुना पीई और 16.3 गुना के पी/बीवी पर कारोबार कर रहा है, जो ऊंचा स्तर पर है।
खनन एवं धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांत धातु की कीमतों में लगातार वृद्धि को देखते हुए ब्रोकरेज फर्मों की पसंदीदा बनी हुई है। एल्युमीनियम, तांबा, लौह अयस्क, जस्ता, चांदी और कच्चे तेल में अपनी मजबूत उपस्थिति को देखते हुए वेदांत के पास कमाई के कई स्रोत हैं।
इसे देखते हुए, पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद ऊर्जा और औद्योगिक धातु की कीमतों में वृद्धि से उसके सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक के तौर पर उभरने की संभावना है। हाल के सप्ताहों में कमजोर बाजार के बावजूद इस शेयर में तेजी आई है और विश्लेषकों को इसमें और तेजी की उम्मीद है।
ब्रोकरेज फर्मों को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में शेयर 838 रुपये तक बढ़ जाएगा, जो मौजूदा स्तर से 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
दिसंबर 2025 को समाप्त 12 महीनों में कंपनी के शुद्ध लाभ में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसकी शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 4.4 प्रतिशत कम हुई। यह शेयर 19 गुना के पीई और 5.1 गुना के पी/बीवी पर कारोबार कर रहा है, जो उसके प्रतिस्पर्धियों से अधिक है।
रेडी-टू-ईट खाना बनाने वाली कंपनी ब्रिटानिया ने कमजोर इक्विटी बाजार में भी शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में सेंसेक्स में 5.3 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले कंपनी के शेयर में 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि यह शानदार प्रदर्शन जारी रहेगा, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशक एफएमसीजी जैसे ‘डिफेंसिव सेक्टर्स’ की ओर रुख कर रहे हैं।
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में इस शेयर की कीमत बढ़कर 6,753 रुपये तक पहुंच सकती है, जिसका मतलब है कि मौजूदा स्तरों से इसमें 24 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की संभावना है।
कंपनी ने हाल की तिमाहियों में मजबूत प्रदर्शन किया है। दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी के शुद्ध मुनाफे और शुद्ध बिक्री में 12 प्रतिशत और 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि, अल्पावधि में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से कंपनी को मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।