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लॉकडाउन: कारोबारी परेशान

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Last Updated- December 15, 2022 | 4:56 AM IST

देश भर में बड़ी तादाद में बड़े व्यापार क्षेत्रों में लॉकडाउन फिर से लगाया जाना शुरू हो चुका है जिसकी वजह से कारोबारों के लिए बिक्री में कमी और कारोबार संचालन में बाधा की स्थिति बनती दिख रही है। अब तक लॉकडाउन में ढील दिए जाने से स्थिति सामान्य होती दिखने लगी थी। ऐसी स्थिति में प्रमुख उपभोक्ता वस्तु कंपनियों से लेकर ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों तक को फिर से अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले सभी तरह की बाधाओं को कम करने की दिशा में ध्यान देना पड़ रहा है।
पिछले कुछ दिनों में चेन्नई, बेंगलूरु, पुणे, ठाणे, गुवाहाटी, हैदराबाद और पटना जैसे कई प्रमुख बाजारों में अचानक लॉकडाउन फिर से लगाया गया है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में तीन दिनों के लॉकडाउन के अलावा कोलकाता, हावड़ा और मुंबई के कई इलाकों में कोविड संक्रमण के ज्यादा मामले आने पर लोगों और वस्तुओं की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। जबकि, ओडिशा, पंजाब और मध्य प्रदेश ने भी इसी तरह के उपायों पर अमल किया गया है।
 कम अवधि के नोटिस पर लॉकडाउन को फिर से शुरू करना और कई बार 24 घंटे से भी कम समय में नोटिस देने से न केवल निगरानी संचालन की टीमों में तनाव की स्थिति है बल्कि इससे कारोबार की अल्पकालिक योजनाओं में भी बाधा पहुंची है। उपभोक्ता वस्तु कंपनियां, विशेषतौर पर वैसी कंपनियां जो गैर जरूरी क्षेत्र में काम कर रही हैं मसलन जो टिकाऊ वस्तुएं या पैकेज्ड उत्पाद रखती हैं उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है।
उदाहरण के लिए, एयर कंडीशनर निर्माता कंपनियों को अब 2021 में ही सुधार की कोई उम्मीद दिखती है। ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन के अनुसार मार्च के अंत से मई के अंत के बीच लगाए गए शुरुआती लॉकडाउन की वजह से इस साल एसी बिक्री के लिए अहम मौसम गुजर गया। हाल में लगाए गए लॉकडाउन की वजह से मुंबई, चेन्नई और उत्तर भारत जैसे प्रमुख बाजारों में बिक्री प्रभावित हो रही है। उनका कहना है, ‘लोग गैर-जरूरी चीजों में जिन पैसों को खर्च करते थे उसमें काफी कमी आई है और स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लगाए जाने से आगे भी सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती है।’ उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनी के एक प्रमुख अधिकारी ने कहा, ‘जब सब कुछ सामान्य लगने लगता है ठीक उसी वक्त एक नई बाधा सामने आ जाती है। अब ऐसा लगता है कि हमें इस तरह की बाधाओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। हालांकि शुरुआत में लोगों की गतिविधि पर नजर रख रहे थे लेकिन अब यह काम काफी थकाऊ लगने लगा है।’
स्नैपडील, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और बिग बास्केट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां फिर से बाधाओं का सामना कर रही हैं। उदाहरण के लिए  स्नैपडील ने अपने डिलिवरी कर्मियों से कहा है कि जब तक प्रशासन की हरी झंडी नहीं मिलती है तब तक वे संक्रमण के लिहाज से ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहें और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जब तक संबंधित क्षेत्रों में लॉकडाउन नहीं हटाया जाता तब तक वहां डिलिवरी में देरी होगी।
वहीं जो कंपनियां जरूरी वस्तुएं मसलन राशन से जुड़ी सामग्री की डिलिवरी कर रही थीं वे लॉकडाउन क्षेत्रों में मौजूद अपने गोदामों तक पहुंच नहीं बना पा रही हैं। एक ई-कॉमर्स कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी शहर में कई समस्याएं हैं और वहां कोई गतिविधि आसान नहीं है। अगर गोदाम बंद हो जाता है तो आपूर्ति भी खत्म हो जाएगी। हालांकि अब सरकार को लगता है कि लोगों के लिए दुकानों पर सामानों के लिए भीड़ लगाना खतरनाक है ऐसे में ई-कॉमर्स कंपनियों को उन क्षेत्रों में केवल जरूरी सामानों की आपूर्ति देने की अनुमति दी गई है जहां स्थानीय लॉकडाउन लागू किया गया है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन क्षेत्रों में गोदामों को स्थानीय दिशानिर्देशों के आधार पर काम करने की अनुमति दी जाती है या नहीं।’
इसके अलावा एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन एग्रीगेटरों पर विक्रेताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। डिलिवरी में देरी होने से उनकी कार्यशील पूंजी अटक जाती है। एक ई-कॉमर्स उद्योग के अधिकारी ने बताया, ‘विक्रेताओं ने उत्पाद खरीदने के लिए कई लोगों से पैसा उधार लिया है और उनका सामान कई गोदामों में फंसा है क्योंकि कई जगहों पर अचानक स्थानीय लॉकडाउन लगाया गया है। इसके अलावा उनके सिर पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के पालन का बोझ भी मंडरा रहा है।’
नेस्ले, डाबर और पार्ले प्रोडक्ट जैसी बड़ी एफएमसीजी कंपनियों को कोई डर नहीं है। हालांकि उनके लिए भी लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परेशानियां हैं जिससे पूरी प्रक्रिया में देरी होती है। मसलन कई जगहों पर डिलिवरी और आपूर्ति वाले वाहनों को रोक दिया जाता है।

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First Published - July 12, 2020 | 10:37 PM IST

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