US President Donald Trump (File Photo)
Trump AI Model Testing: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों पर नजर रखने के लिए एक नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया है। इस आदेश के तहत संघीय सरकार को सबसे उन्नत AI सिस्टम के सार्वजनिक लॉन्च से पहले उनकी समीक्षा करने का ढांचा मिलेगा। हालांकि इस प्रक्रिया में भाग लेना AI कंपनियों के लिए स्वैच्छिक रहेगा।
नए आदेश में कहा गया है कि AI की उन्नत क्षमताएं अमेरिका को और मजबूत बना सकती हैं, लेकिन इसके साथ कुछ नए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जोखिम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे जोखिमों से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
आदेश के अनुसार सरकार किसी भी उन्नत AI मॉडल या सिस्टम की सार्वजनिक रिलीज से पहले अधिकतम 30 दिनों तक समीक्षा कर सकेगी। यह समयसीमा तकनीकी क्षेत्र की अपेक्षाओं से कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी समीक्षा प्रक्रिया तेजी से बदलते और प्रतिस्पर्धी AI उद्योग पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती थी।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने 21 मई को एक समान प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उस समय उनकी चिंता थी कि अत्यधिक नियमन से अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा और नवाचार की गति प्रभावित हो सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नया आदेश पहले प्रस्तावित नीति से कितना अलग है।
ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अत्याधुनिक एआई सिस्टम विकसित करने वाली कंपनियों को स्वेच्छा से अपने उन्नत साइबर मॉडल सरकार के साथ साझा करने का अवसर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करना और सरकारी साइबर रक्षा क्षमताओं को बेहतर बनाना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने पिछले महीने टेक उद्योग के शीर्ष अधिकारियों के साथ होने वाला एक ओवल ऑफिस कार्यक्रम रद्द कर दिया था क्योंकि उन्हें आदेश के शुरुआती मसौदे पर आपत्ति थी। उनका मानना था कि अमेरिका फिलहाल एआई क्षेत्र में चीन समेत अन्य देशों से आगे है और ऐसी कोई नीति नहीं होनी चाहिए जो इस बढ़त को प्रभावित करे।
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख एआई कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले थे, लेकिन अंततः ट्रंप ने बिना किसी औपचारिक समारोह के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक होगी। प्रशासन के अनुसार, सरकार सभी नए एआई मॉडलों की निगरानी नहीं कर रही है, क्योंकि ऐसा कदम नवाचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
नई व्यवस्था के तहत चुनिंदा एआई कंपनियां अपने उन्नत साइबर मॉडल सरकार के साथ साझा कर सकेंगी ताकि संभावित साइबर खतरों का समय रहते आकलन किया जा सके।
लिबर्टेरियन विचारधारा वाले थिंक टैंक कैटो इंस्टीट्यूट के नीति विश्लेषक जुआन लोंडोनो ने इस पहल को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया, लेकिन साथ ही कुछ गंभीर सवाल भी उठाए।
उनका कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन एआई मॉडलों को विशेष जांच के योग्य माना जाएगा और किन “विश्वसनीय साझेदारों” को इन मॉडलों तक शुरुआती पहुंच दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया में अत्यधिक विवेकाधिकार राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NSA) के निदेशक को दिया गया, तो भविष्य में इसका दुरुपयोग भी संभव है।
नई साइबर सुरक्षा नीति की चर्चा उस समय तेज हुई जब एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अप्रैल में अपना सबसे उन्नत मॉडल “क्लॉड मिथोस” पेश किया। दावा किया गया कि यह मॉडल दुनिया भर के सॉफ्टवेयर सिस्टम में साइबर कमजोरियों की पहचान करने की असाधारण क्षमता रखता है।
इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और तत्कालीन फेडरल रिजर्व चेयर जेरोम पॉवेल ने वॉल स्ट्रीट के प्रमुख अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक भी की थी। बैठक में इस तरह की एआई क्षमताओं से पैदा होने वाले संभावित साइबर जोखिमों पर चर्चा की गई।
फिलहाल एंथ्रोपिक ने मिथोस मॉडल की पहुंच सीमित रखी है और इसे केवल चुनिंदा तकनीकी कंपनियों, बैंकों तथा अन्य भरोसेमंद संस्थाओं तक ही उपलब्ध कराया है। कंपनी ने हाल ही में ऐसे साझेदारों की संख्या में और विस्तार किया है।
चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई ने ट्रंप प्रशासन की इस पहल का समर्थन किया है। कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे एआई की क्षमताएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे सुरक्षा ढांचे का विकास भी लोकतांत्रिक संस्थाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों की भागीदारी के साथ होना चाहिए ताकि जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखा जा सके।
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष और डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वॉर्नर ने भी इस नीति का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने पहले एआई सुरक्षा से जुड़े कई प्रावधानों को खत्म कर दिया था और अब उसी जरूरत को दोबारा महसूस किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद पर वापसी के तुरंत बाद पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा लागू किए गए एआई सुरक्षा संबंधी कई दिशा-निर्देशों को रद्द कर दिया था। अब नई नीति के जरिए प्रशासन एआई नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।