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RBI ने रुपये से जुड़े कुछ डेरिवेटिव ट्रेड्स पर आंशिक रूप से हटाई पाबंदियां

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यह राहत ऐसे कॉरपोरेट और संबंधित पक्षों के लेनदेन की जांच के बाद आई है, जिन पर नियमों से बचने और रुपये को सहारा देने की कोशिशों में बाधा डालने की आशंका जताई गई थी

Last Updated- April 20, 2026 | 6:17 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को रुपये से जुड़े कुछ डेरिवेटिव ट्रेड्स पर लगाए गए प्रतिबंधों में कुछ ढील दे दी है। ये प्रतिबंध अप्रैल की शुरुआत में रुपये की लगातार गिरावट को रोकने के लिए लगाए गए थे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी।

दरअसल, रुपये में उतार-चढ़ाव को बढ़ाने वाले आर्बिट्राज ट्रेड्स पर लगाम लगाने के तहत, केंद्रीय बैंक ने 1 अप्रैल को बैंकों को ग्राहकों को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) ऑफर करने से रोक दिया था। साथ ही, रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने पर भी रोक लगा दी गई थी।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर्स को अपने संबंधित पक्षों (related parties) के साथ रुपये से जुड़े किसी भी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में शामिल होने से भी रोक दिया था।

आरबीआई की सख्ती में नरमी

पहले जारी किए गए दो निर्देशों को पूरी तरह वापस ले लिया गया है, जबकि संबंधित पक्षों (related party deals) से जुड़े नियमों में आंशिक संशोधन किया गया है। अब मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने और रोलओवर की अनुमति दी गई है। साथ ही, नॉन-रेजिडेंट यूनिट्स के साथ बैक-टू-बैक आधार पर किए गए लेनदेन भी संभव होंगे।

ये राहत उपाय उन सख्त कदमों में आंशिक ढील को दर्शाते हैं, जिन्हें आरबीआई ने मार्च के अंत में रुपये के 95 के रिकॉर्ड निचले स्तर से नीचे जाने को रोकने के लिए लागू किया था।

Also Read: ‘धैर्य का खेल’: 2 साल से जीरो रिटर्न फिर भी MF निवेशकों का भरोसा कायम, क्या अब आएगा बुल रन?

रुपये में रिकवरी, कुछ पाबंदियां बरकरार

शुरुआती प्रतिबंधों का उद्देश्य बैंकों की नेट ओपन रुपया पोजिशन पर सीमा लगाकर आर्बिट्राज ट्रेड्स को नियंत्रित करना था। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये कदम रुपये को राहत देने में ज्यादा प्रभावी नहीं रहे, क्योंकि बैंकों ने अपनी पोजिशन कॉरपोरेट्स और संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करके कम कर दी थी।

अप्रैल में लागू किए गए दूसरे चरण के प्रतिबंधों के बाद रुपया में करीब 2% की रिकवरी देखने को मिली। इसके बाद हाल के सत्रों में रुपया 92.50 से 93.50 के दायरे में स्थिर बना हुआ है। हालांकि, ऑनशोर मार्केट में बैंकों की नेट ओपन रुपया पोजिशन पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा अभी भी बरकरार है।

हेजिंग बहाल, सट्टेबाजी पर लगाम

एक निजी बैंक के विदेशी मुद्रा ट्रेडर ने कहा, “इन पाबंदियों में ढील से संकेत मिलता है कि आरबीआई सामान्य हेजिंग गतिविधियों को बहाल करना चाहता है, जबकि उन सट्टात्मक ट्रेड्स पर लगाम बनाए रखना चाहता है जो रुपये को कमजोर बनाते हैं।”

यह राहत ऐसे कॉरपोरेट और संबंधित पक्षों के लेनदेन की जांच के बाद आई है, जिन पर नियमों से बचने और रुपये को सहारा देने की कोशिशों में बाधा डालने की आशंका जताई गई थी।

इससे पहले, महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि बैंकों की विदेशी मुद्रा पोजिशन पर लगाए गए प्रतिबंध स्थायी नहीं रहेंगे।

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First Published - April 20, 2026 | 6:17 PM IST

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