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बढ़ी चिंता: गर्मी और बढ़ेगी, मानसून भी होगा लेट, इस साल सिर्फ 90% बारिश का अनुमान; खेती पर संकट

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मौसम विभाग ने 2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। अल नीनो के कारण खेती पर संकट है, लेकिन सरकार अतिरिक्त बीजों के साथ तैयार है

Last Updated- May 29, 2026 | 7:47 PM IST
India Monsoon 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देशभर में इस साल बारिश को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपने अनुमानों में और कटौती कर दी है। मौसम विभाग का नया अनुमान है कि इस साल देशभर में औसतन 90 फीसदी ही बारिश होगी, जिसे ‘सामान्य से कम’ माना जाता है। इससे पहले विभाग ने 92 फीसदी बारिश की उम्मीद जताई थी, लेकिन अब हालात और बिगड़ने के आसार दिख रहे हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक, इस अनुमान में 4 फीसदी ऊपर या नीचे का अंतर (मॉडल एरर मार्जिन) हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के दौरान ‘अल नीनो’ (El Nino) की स्थिति बनने के कारण इस बार मानसून कमजोर रह सकता है। हालांकि, भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा कारक यानी ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (IOD) इस सीजन में ‘न्यूट्रल’ यानी तटस्थ रहने की उम्मीद है।

आपको बता दें कि देश में मानसून की बारिश का लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 87 सेंटीमीटर है। यह आंकड़ा 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर तय किया गया है। LPA का मतलब होता है कि किसी खास इलाके में एक महीने या पूरे सीजन के दौरान जितनी बारिश रिकॉर्ड की जाती है, उसका 30 से 50 साल का एक औसत निकाला जाता है।

खेती के मुख्य इलाकों पर सबसे बड़ा संकट

मौसम विभाग के दूसरे चरण के पूर्वानुमान ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अनुमान के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी भारत को छोड़कर देश के किसी भी हिस्से में इस साल ‘सामान्य’ बारिश होने की उम्मीद नहीं है। सबसे ज्यादा फिक्र की बात यह है कि देश का ‘मानसून कोर जोन’, जहां मुख्य रूप से खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर करती है, वहां भी मानसून सामान्य से कम यानी एलपीए के 94 फीसदी से भी नीचे रह सकता है।

इस कोर जोन में देश के मध्य और पश्चिमी हिस्से आते हैं। यहां कम बारिश होने का सीधा और बुरा असर दलहन और तिलहन की फसलों पर पड़ सकता है। इसमें मुख्य रूप से सोयाबीन, तुअर (अरहर), उड़द, कपास, गन्ना और कुछ मोटे अनाजों (सीरियल्स) का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

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राहत की बात यह है कि सरकार इस स्थिति से निपटने का दावा कर रही है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘खरीफ 2026 अभियान’ के दौरान कहा कि सरकार किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन के लिए जरूरी 1.73 मिलियन क्विंटल बीजों के अलावा, सरकार ने 174,000 क्विंटल बीजों का एक अतिरिक्त ‘वार चेस्ट’ (इमरजेंसी स्टॉक) तैयार रखा है। इसका इस्तेमाल दोबारा बुवाई करने या देर से बुवाई जैसी आपातकालीन स्थितियों में किया जाएगा। इस बार पूरे देश में खरीफ फसलों के लिए कुल 1.93 मिलियन टन बीज उपलब्ध हैं, जो जरूरत से काफी ज्यादा हैं।

जून में ही सुस्त रहेगा मानसून, बढ़ेगी तपिश

IMD के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में कम बारिश होगी। हालांकि, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ इलाकों, दक्षिणी प्रायद्वीप के पूर्वी हिस्सों, मध्य-पूर्वी भारत और पूर्वी भारत के कुछ इक्का-दुक्का इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

पूरे सीजन के अलावा अगर सिर्फ जून महीने की बात करें, तो मानसून की शुरुआत ही बेहद सुस्त रहने वाली है। जून में देशभर में औसतन सिर्फ 92 फीसदी (LPA का) ही पानी बरसने का अनुमान है। बारिश में इस देरी की वजह से खरीफ की मुख्य फसलों, खासकर धान (पैडी) और मक्के की बुवाई में देरी हो सकती है।

जून के महीने में उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्वी भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है। पानी की कमी के साथ-साथ जून में गर्मी भी लोगों को परेशान करेगी। मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

इसके अलावा, मानसून के आने में भी थोड़ी देरी हुई है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि जो मानसून पहले 26 मई को आने वाला था, अब उसके 1 जून के आसपास दस्तक देने की उम्मीद है।

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First Published - May 29, 2026 | 7:42 PM IST

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