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आसानी से दें उधार ऐसे डिजिटल ऋणदाताओं को दूर से नमस्कार

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:32 PM IST

भारत में ऑनलाइन कर्ज देने वाली करीब 1,100 ऐप काम कर रही हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के एक कार्यबल द्वारा पिछले नवंबर में प्रकाशित शोधपत्र के मुताबिक उनमें से 600 ऐप गैर कानूनी हैं। कार्य बल ने इससे जुड़े कई मसलों पर अपने सुझाव दिए हैं। रिजर्व बैंक इन सुझावों को जब अपनाएगा तब अपनाएगा, कर्ज लेने वालों को तब तक अपने हितों की सुरक्षा का ख्याल खुद ही रखना पड़ेगा। इसके लिए सबसे पहला काम है सतर्कता और जांच-पड़ताल। लुभावने वादे करने वाले किसी भी ऐप या फर्म से कर्ज लपकने के बजाय सबसे पहले उसे और उसकी पेशकश को अच्छी तरह जांचा जाए, यह पहला नियम है।

ऐप का कोई कायदा है?
ऑनलाइन कर्ज देने वाले यानी डिजिटल लेंडिंग ऐप के सही होने की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह किसी तय कायदे या प्रक्रिया का पालन करती है अथवा नहीं। किसी को भी उधार देने से पहले ऐप को केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) दस्तावेज भरवाने और लेने जरूरी होते हैं। पेमी इंडिया के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) महेश शुक्ला कहते हैं, ‘केवाईसी ऑनलाइन भी कराया जा सकता है और ऑफलाइन भी यानी ऐप से जुड़ी कंपनी का कर्मचारी आपके पास पहुंचकर कागजी दस्तावेज ले सकता है। सच्ची और ईमानदार कंपनी कर्ज देने से पहले आपसे पहचान और पते का सबूत जरूर मांगेगी। वह आपसे आय का सबूत भी मांगेगी ताकि देखा जा सके कि आप कर्ज देने के लायक हैं भी या नहीं।’
केवाईसी के बाद दूसरा अहम कदम है कर्ज की मंजूरी देने की चिट्ठी डिजिटन लेंडिंग ऐप से आपको कर्ज मंजूर होने की चिट्ठी जरूर जारी होनी चाहिए। याद रखिए कि ऐप आपको कर्ज देती नहीं है बल्कि कर्ज दिलाने में मदद करती है। पर्दे के पीछे हमेशा कोई बैंक अथवा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) होती है, जो आपको कर्ज की रकम दे रही होती है। कर्ज की मंजूरी के बारे में बताने वाली चिट्ठी में उधारी से जुड़ी अहम बातें होती हैं। इनमें कर्ज देने वाले बैंक अथवा एनबीएफसी का नाम, कर्ज की कुल राशि, ब्याज दर और प्रसंस्करण शुल्क (प्रोसेसिंग फी) शामिल हैं।
ऑनलाइन कर्ज देने वाली ऐप आपको कर्ज का समझौता यानी लोन एग्रीमेंट भी मुहैया कराएगी। यह एग्रीमेंट काफी बड़ा दस्तावेज होता है, जिसमें पांच या अधिक पृष्ठ होते हैं। शुक्ला कहते हैं, ‘लोन एग्रीमेंट को अच्छी तरह पढ़ें ताकि आपको पता चल जाए कि कर्ज के नियम और शर्तें क्या-क्या हैं तथा उसको कब तक और किस तरह चुकाना है। इसमें यह भी दिया होता है कि यदि आप कर्ज चुकाने में नाकाम रहते हैं तो कर्ज देने वाली संस्था क्या कार्रवाई कर सकती है। साथ ही दूसरा विवरण भी होता है।’
अगर आपका डिजिटल ऋणदाता इनमें से कोई भी चरण छोड़कर आगे बढ़ जाता है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।

रकम कौन दे रहा है?
उधार उन्हीं से लें, जिनमें उधार की रकम रिजर्व बैंक के कायदों के दायरे में आने वाली संस्था यानी बैंक अथवा एनबीएफसी दे रहे हों। इसका फायदा यह होगा कि यदि कर्ज में किसी भी तरह की समस्या या विवाद होता है तो आप समाधान के लिए नियामक यानी रिजर्व बैंक के पास जा सकते हैं। इंडियालेंड्स के संस्थापक और सीईओ तथा डिजिटल लेंडिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य गौरव चोपड़ा आगाह करते हैं, ‘ऋण देने वाली जो इकाइयां बैंक अथवा एनबीएफसी की मदद के बगैर कर्ज दे रही हैं, वे गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं।’
उधार लेने वालों को यह बात भी पक्की कर लेनी चाहिए कि उनके पास सीधे बैंक या एनबीएफसी से चि_ी आए। क्रेडिटबी के सह-संस्थापक और सीईओ तथा फेस (फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट) के सह-संस्थापक मधुसूदन एकांबरम कहते हैं, ‘ऐसे ऐप भी देखे गए हैं, जो बैंकों अथवा एनबीएफसी के नामों का दुरुपयोग करते हैं। इसीलिए जरूरी है कि ऐप के जरिये वास्तव में उधार दे रहे बैंक या संस्था से सीधी चि_ी आपके पास आए।’

थोक में इजाजत न दें
कोई भी ऐप डाउनलोड करने पर हमसे कुछ परमिशन यानी इजाजत ली जाती हैं। बिना सोचे-समझे थोक में इजाजत न दें। चोपड़ा का कहना है कि उधारी के लिए जो जरूरी है, केवल उसी प्रक्रिया की इजाजत दें। उदाहरण के लिए आप केवाईसी के लिए कैमरा इस्तेमाल करने की अथवा अपने फोन में स्टोर किया कोई दस्तावेज पाने के लिए गैलरी के इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं।
अगर आप किसी संदिग्ध ऐप के बजाय वैध ऐप के साथ अपनी जानकारी साझा करते हैं तो ज्यादा महफूज रहेंगे। शुक्ला ताकीद करते हैं, ‘ऐप में इजाजत या एक्सेस वापस लेने का विकल्प जरूर होना चाहिए। ऐसा विकल्प नहीं है यानी गड़बड़ है।’

बदतमीजी न सहें
रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूल करने वाले रिकवरी एजेंटों के तौर-तरीकों के स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह भी बताया है कि एजेंट क्या नहीं कर सकते हैं। यदि किसी ग्राहक को लगता है कि रिकवरी एजेंट अपनी हद से बाहर चला गया है तो उसे बैंक या एनबीएफसी के पास शिकायत करनी चाहिए।
एकांबरम बताते हैं, ‘कई बैंक या एनबीएफसी वसूली का किसी कलेक्शन एजेंसी को ठेके पर दे देते हैं और उन्हें पता ही नहीं होता कि एजेंट कैसा तरीका अपना रहे हैं।’ यदि बैंक या एनबीएफसी आपकी समस्या का समाधान नहीं करते तो लोकपाल के पास शिकायत कीजिए। पानी सिर से ऊपर चला जाए तो साइबर अपराध विभाग के पास शिकायत दर्ज कराएं।

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First Published - January 30, 2022 | 11:23 PM IST

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