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आरबीआई के नियमों से कंपनियों को मदद

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Last Updated- December 11, 2022 | 10:01 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों के लिए निवेश मानदंडों को नए सिरे से युक्तिसंगत बनाए जाने से अंतत: कंपनियों को कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के जरिये करीब एक चौथाई ऋण जुटाने में मदद मिलेगी। सबसे पहले इन नियमों की घोषणा वित्त वर्ष 2019 के बजट में की गई थी।
उसके बाद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जुलाई 2018 में अधिसूचना जारी की कि 100 करोड़ रुपये की बकाया दीर्घावधि उधारी और एए से अधिक क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियां अपनी 25 फीसदी ऋण जरूरतों को बॉन्ड बाजार से पूरा कर सकती हैं। बाद में आरबीआई ने बैंकों के लिए नियम तैयार किए ताकि उन कंपनियों के लिए प्रावधान किया जा सके जो इस आदेश का पालन नहीं करती हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर बैंकों से कहा गया कि वे ऐसी कंपनियों पर लगाम लगाएं।

आर्थिक दरों में नरमी और प्रणाली में मौजूद पर्याप्त नकदी प्रवाह के कारण कंपनियां ऐसा कर सकती थीं लेकिन दरों में वृद्धि होने के साथ ही प्रणाली से अतिरिक्त नकदी प्रवाह खत्म हो गई। ऐसे में एए रेटिंग वाली कंपनियों को अनुपालन करने में परेशानी होने लगी क्योंकि निवेशक ऐसे पत्र में काफी सोच-समझकर निवेश करने लगे।
ऐसे में निवेशक आधार को व्यापक बनाने की आवश्यकता महसूस होने लगी। हेल्ड टु मैच्योरिटी (एचटीएम) सीमा और एचटीएम श्रेणी में वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को खत्म करते हुए एचटीएम श्रेणी के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड को अनुमति देकर दायरे को बढ़ाया गया। इसलिए बैंक अब इन बॉन्डों की कहीं अधिक खरीदारी कर सकते हैं।

इससे पहले केवल सरकार एवं राज्य सरकार की प्रतिभूतियों और कुछ बुनियादी ढांचा कंपनियों की प्रतिभूतियों को ही एचटीएम श्रेणी में रखने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा बैंकों को इस श्रेणी में 25 फीसदी से अधिक निवेश रखने की अनुमति नहीं दी गई थी।
फिलिप कैपिटल के सलाहकार (निर्धारित आय) जयदीप सेन ने कहा, ‘परिपक्वता तक बरकरार रखने के लिए 25 फीसदी की सीमा को खत्म करने का प्रस्ताव काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उसमें काफी जटिलताएं दिख रही थीं। इससे बैंकों के पीऐंडएल खाते कहीं अधिक स्थिर होंगे।’

सेन ने कहा, ‘एचटीएम के लिए कॉरपोरेट बॉन्डों को पात्रता प्रदान करना एक अन्य सकारात्मक कदम है क्योंकि इससे कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को रफ्तार मिलेगी और कंपनियों को बैंक ऋण के अलावा बॉन्डों के जरिये संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।’ इस साल 14 जनवरी तक बैंकों का एसएलआर खाता कुल जमा खाते का 28.37 फीसदी था। जबकि इसके लिए वैधानिक सीमा 18 फीसदी है। पिछले कुछ वर्षों में निवेश का हिस्सा 30 फीसदी अधिक था क्योंकि बैंकों ने दमदार ऋणा वृद्धि के अभाव में अपनी जमा रकम को सरकार एवं अन्य मान्यताप्राप्त प्रतिभूतियों में लगाया। हालांकि अर्थव्यवस्था में सुधार होने के साथ ही उधारी की रफ्तार भी बढ़ी है। प्रणाली में सालाना आधार पर उधारी में वृद्धि 14 जनवरी के अनुसार 9.2 फीसदी थी जबकि जमा में 10.3 फीसदी की वृद्धि हुई।
अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ ही कंपनियां अपनी क्षमता भी बढ़ाएंगी और उसके लिए उन्हें रकम की जरूरत होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों के लिए आरबीआई के मझौदा नियमों से कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में बदलाव आएगा। हालांकि प्रस्ताव अभी मसौदा स्तर में हैं और अंतिम प्रारूप में कुछ पाबंदियां भी दिख सकती हैं।

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First Published - January 16, 2022 | 10:33 PM IST

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