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कामत समिति तेजी से कर रही काम

Last Updated- December 15, 2022 | 3:08 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से कॉरपोरेट कर्जदारों के ऋण पुनर्गठन पर सलाह देने के लिए गठित कामत समिति 6 सितंबर की अंतिम तिथि तक अपनी रिपोर्ट देने की पुरजोर कोशिश कर रही है।
इस समिति के साथ मिलकर काम कर रहे वरिष्ठ बैंकरों ने कहा कि समिति के सभी सदस्य बैठकों में शामिल हो रहे हैं और विचार-विमर्श में पूरी सक्रियता से हिस्सा ले रहे हैं। अब तक कई बैठकें हो चुकी हैं और कई बार तो वे दिन में तीन-चार बैठक भी कर रहे हैं।  समिति के एक सदस्य दिवाकर गुप्ता 1 सितंबर को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद समिति में शामिल होंगे। हालांकि वह अनौचपारिक रूप से विचार-विमर्श में हिस्सा ले रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि यह समिति पहले ही कार्यदल बना चुकी है, जिनमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बैंक अधिकारी शामिल हैं। यह समिति बैंकों से लोगों सहित डेटा और संसाधन ले सकती है, जिसके लिए इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) सहायता मुहैया करा रहा है। इन कार्यदलों को सेक्टरों के ढांचे को देखने का जिम्मा सौंपा गया है। बैंक अधिकारियों ने कहा कि उद्योग के बहुत से संगठनों ने अपने इनपुट दिए हैं और कुछ दिग्गज उद्योगपति समिति के सामने अपनी बात रखेंगे।
यह समिति 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी ऋणों के बारे में विचार करेगी। वहीं खुदरा ऋणों का समाधान बैंक बोर्ड खुद तलाशेंगे।
समिति उद्योग विशेष से संबंधित मापदंड जारी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक मामले आएं और उन्हें तुरंत सहायता मिले।
कामत और गुप्ता के अलावा समिति के अन्य सदस्यों में चार्टर्ड अकाउंटेंट और केनरा बैंक के पूर्व चेयरमैन टी एन मनोहरन, रणनीतिक सलाहकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन के मुख्य कार्याधिकारी अश्विन पारेख शामिल हैं। एक अन्य सदस्य सुनील मेहता आईबीए के मौजूदा सीईओ हैं। आईबीए बैंकिंग उद्योग का लॉबी समूह है। यह समिति कुछ वित्तीय मानकों का सुझाव देगी। इन मापदंडों में ऋण, तरलता, कर्ज चुकाने की क्षमता आदि पहलू शामिल होंगे।  इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक बैंक कोविड-19 महामारी से पैदा हुए वित्तीय दबाव को प्रबंधित करने के लिए 8.4 लाख करोड़ रुपये के ऋणों का पुनर्गठन कर सकते हैं। इनमें कॉरपोरेट खाते 6.3 लाख करोड़ रुपये के हैं, जिन्हें पुनर्गठित किया जा सकता है।
इन 6.3 लाख करोड़ रुपये के ऋणों में से करीब 53 फीसदी के पुनर्गठन का अधिक खतरा है। वहीं 47 फीसदी खातों में सामान्य जोखिम है। इन खातों में प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि आगे कोविड-19 की स्थिति कैसी रहती है।
रियल एस्टेट, विमानन कंपनियों, होटलों और अन्य उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्रों के कर्ज के ज्यादा हिस्से का पुनर्गठन होने की संभावना है। इसमें ज्यादा हिस्सा बुनियादी ढांचा, बिजली और निर्माण क्षेत्रों का होगा।

First Published - August 21, 2020 | 11:45 PM IST

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