facebookmetapixel
Advertisement
SIP की बेस्ट डेट कौन-सी है? Market Crash में SIP रोकें या जारी रखें?राष्ट्रपति भवन, संसद बनाने वाली CPWD अब क्यों नहीं रही सरकार की पहली पसंद?Auto Sales June 2026: यात्री वाहनों की बिक्री ने जून में पकड़ी रफ्तार, 4 लाख यूनिट से ज्यादा रहने का अनुमानEdelweiss MF की बड़ी कामयाबी, इक्विटी AUM ₹1 लाख करोड़ के पार; SIP बुक ₹690 करोड़WhatsApp के नए ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की नजर, फर्जी पहचान और धोखाधड़ी का बढ़ा खतरादिल्ली को मिलेगी 6-लेन टनल, द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक सफर होगा आसान, ₹6,970 करोड़ की परियोजना मंजूरभारतीय बाजार कमजोर नहीं, SIP जारी रखें; राधिका गुप्ता ने दिया निवेश का बड़ा मंत्रक्या महिलाएं ब्रांड देखकर चुनती हैं म्युचुअल फंड? रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासेEPFO Portal Down: PF क्लेम अटका, पासबुक नहीं होगी डाउनलोड; जानें कब बहाल होंगी सेवाएंSIP की बेस्ट डेट और फ्रीक्वेंसी कौन-सी? मार्केट गिरने पर क्या करें… WhiteOak MF की रिपोर्ट में मिले जवाब

भारतीय अर्थव्यवस्था से हाल में बढ़ीं उम्मीदें: MPC सदस्य जयंत आर. वर्मा

Advertisement

MPC के सदस्य ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण बाहरी मांग कमजोर है, निजी पूंजी खर्च में पुनरुद्धार अब भी बहुत अस्थाई और धीमा है।

Last Updated- October 24, 2023 | 10:37 PM IST
S&P global rating

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य जयंत आर. वर्मा ने मंगलवार को कहा कि वह कुछ महीने पहले की तुलना में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर ‘थोड़ा अधिक’ आशावादी हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि चिंताएं बनी हुई हैं क्योंकि देश अब घरेलू खर्च पर ‘असाधारण रूप से’ निर्भर है और मांग के अन्य घटकों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्मा ने कहा कि भारत को वृद्धि के झटकों से बचने के लिए कई तिमाहियों तक 4 से 5 प्रतिशत के बीच मुद्रास्फीति को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। वर्मा ने कहा, ‘मैं दो-चार महीने पहले की तुलना में वृद्धि को लेकर थोड़ा अधिक आशावादी हूं। बेहतर उपभोक्ता विश्वास तथा विभिन्न संकेतकों के चलते मैं इसको लेकर अधिक आशावादी हूं। यह वृद्धि की गति को जारी रखने की ओर इशारा करते हैं।’ वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वैश्विक वृद्धि अनुमान को 3 प्रतिशत पर यथावत रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में अक्टूबर में भारत के लिए अपने वृद्धि अनुमान को 20 आधार अंक बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है।

प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘हालांकि अनुमान नाजुक बना हुआ है क्योंकि मांग अब असंगत रूप से घरेलू खर्च पर निर्भर है और मांग के अन्य घटकों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।’

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण बाहरी मांग कमजोर है, निजी पूंजी व्यय में पुनरुद्धार अब भी बहुत अस्थाई और धीमा है। वर्मा वर्तमान में भारतीय प्रबंधन संस्थान (अहमदाबाद) में प्रोफेसर हैं। यह पूछे जाने पर कि मुद्रास्फीति कब आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर पहुंच पाएगी, वर्मा ने कहा कि अगस्त में मुद्रास्फीति अधिक थी लेकिन सितंबर में यह सीमित दायरे में आई और अक्टूबर में मुद्रास्फीति के कम होने की उम्मीद है।

Advertisement
First Published - October 24, 2023 | 10:37 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement