भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता कम करने के लिए हाल के कदम बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अस्थायी उपाय हैं और ये किसी संरचनात्मक बदलाव के संकेत नहीं हैं। अस्थिरता कम करने के लिए हाल में केंद्रीय बैंक ने ऑनशोर डिलिवरेबल मार्केट में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
मल्होत्रा ने कहा, ‘विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप का मकसद बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव या बाधा से होने वाली अस्थिरता के दौरान बाजार को सुचारु बनाना है। इसमें विनिमय दर का कोई विशिष्ट स्तर या दायरे का लक्ष्य नहीं किया गया है। रिजर्व बैंक अपनी इस नीति पर कायम है कि बहुत ज्यादा या व्यवधान वाले उतार चढ़ाव की स्थिति में हस्तक्षेप कर उसे विवेकपूर्ण तरीके से नियंत्रित किया जाए।’
उन्होंने कहा कि ओपन पोजीशन पर 10 करोड़ डॉलर की सीमा स्थायी नहीं है, और रिजर्व बैंक रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के माध्यम से इन बाजारों के विकास, विस्तार और मजबूती के लिए दीर्घकालिक रूप से प्रतिबद्ध है। गवर्नर ने कहा, ‘बाजार की खास हलचल की स्थिति में ये प्रतिक्रया होती हैं। यह किसी भी तरीके से ढांचागत बदलाव का संकेत नहीं है। हम रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के माध्यम से दीर्घावधि विकास, बाजारों को व्यापक और गहराई से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये ऐसे उपाय नहीं हैं, जो हमेशा बने रहेंगे।’
पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद मार्च में रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई और फिर निर्देशों के लागू होने के बाद यह 2.4 प्रतिशत मबजूत हुआ है।
इस साल 27 मार्च को केंद्रीय बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया था कि वे बैंकों की रोजाना की शुद्ध ओपन फॉरेक्स पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित करें। उसने इससे पहले का ढांचा बदल दिया, जो पूंजी स्तर की सीमा से जुड़ा था। केंद्रीय बैंक ने 10 अप्रैल तक इसका अनुपालन जरूरी किया है।
इस कदम के तुरंत बाद बैंकों ने राहत की मांग करते हुए रिजर्व बैंक से संपर्क किया था, लेकिन उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया। कुछ ऋणदाताओं ने शुरू में अपने ग्राहकों को पोजीशन ट्रांसफर करके एक्सपोजर कम करने का प्रयास किया, लेकिन 1 अप्रैल को जारी स्पष्टीकरण के बाद इस पर भी रोक लगा दी गई और बैंकों को अपनी बैलेंस शीट के भीतर ही पोजीशनें खत्म करने को कहा गया।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रविशंकर ने कहा कि हाल के कदमों ने विदेशी निवेशकों को घरेलू बाजारों में हेजिंग करने से नहीं रोका है, और सभी प्रतिभागियों के पास हेजिंग के साधनों तक पूरी पहुंच है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों से रुपया मजबूती की राह पर है।
डीलरों ने बुधवार को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 0.4 प्रतिशत मजबूत हुआ। स्थानीय मुद्रा पिछले बंद भाव 92.99 प्रति डॉलर के मुकाबले 92.58 प्रति डॉलर पर बंद हुई।
डीलरों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के कारण 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में 10 मई 2022 के बाद की सबसे तेज एकदिवसीय गिरावट देखी गई। बेंचमार्क यील्ड पिछले बंद भाव 7.05 प्रतिशत के मुकाबले 6.90 प्रतिशत पर बंद हुई।