वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत द्वारा अंतिम रूप दिए गए 5 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) इस साल लागू हो जाएंगे। ब्रिटेन और ओमान के साथ व्यापार समझौता अप्रैल में लागू होने की संभावना है, जबकि न्यूजीलैंड के साथ समझौता सितंबर में लागू हो सकता है। मंत्री ने 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के तहत 7 योजनाओं की शुरुआत की घोषणा करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) भी व्यापार समझौते को जल्द से जल्द लागू करना चाहता है।
ईयू के साथ समझौते को पिछले महीने अंतिम रूप दिया गया। ब्रिटेन और ओमान के साथ एफटीए पर क्रमशः मई और दिसंबर में हस्ताक्षर किए गए थे। न्यूजीलैंड के साथ एफटीए पर बातचीत के निष्कर्ष की घोषणा भी दिसंबर में की गई थी।
संदर्भ की शर्तों (टीओआर) को अंतिम रूप देने के बाद भारत और इजरायल अगले सप्ताह दिल्ली में एफटीए वार्ता शुरू करेंगे। इसके अलावा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव अगले सप्ताह भारत आ रहे हैं, जहां एफटीए वार्ता की शुरुआत की समयसीमा पर भी चर्चा की जाएगी।
ईपीएम के तहत 7 अतिरिक्त उपायों की शुरुआत करते हुए गोयल ने कहा कि मिशनों का उद्देश्य नए उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देना और भारतीय व्यवसायों को नए बाजारों तक पहुंचने में सक्षम बनाना है। मंत्री ने कहा कि ये उपाय भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने, व्यापक आधार वाले और निर्यात के समावेशी विकास को बढ़ावा देने, एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और ऋण तक पहुंच को मजबूत करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
कारोबार के लिए धन तक पहुंच बढ़ाने के लिए एमएसएमई को मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से एक्सपोर्ट फैक्टरिंग लेनदेन पर 2.5 प्रतिशत ब्याज की छूट मिलेगी। यह सालाना 50 लाख रुपये तक सीमित होगा। ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता के लिए एक डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट सुविधा 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान करेगी। निर्यात के उभरते अवसरों को सहायता प्रदान करने के लिए निर्यातक विभिन्न साझा-जोखिम और क्रेडिट उपकरणों के माध्यम से नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच सकते हैं।
निर्यातकों को बाजार पहुंच का विस्तार करने में मदद करने के लिए सरकार ने चार उपाय शुरू किए, जिनमें ट्रेड रेगुलेशंस, एक्रिडिटेशन ऐंड कंप्लायंस इनेबलमेंट (ट्रेस), फैसिलिटेटिंग लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट (फ्लो), लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशंस फॉर फ्रेट ऐंड ट्रांसपोर्ट (लिफ्ट) और इंटीग्रेटेड सपोर्ट फॉर ट्रेड इंटेलिजेंस ऐंड फैसिलिटेशन (इनसाइट) शामिल हैं।
ट्रेस 60-75 प्रतिशत योग्य परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन लागत की प्रतिपूर्ति करेगा, जो प्रति आयातक-निर्यातक कोड (आईईसी) 25 लाख रुपये तक होगा। फ्लो में कुछ शर्तों के तहत अधिकतम 3 वर्षों के लिए अनुमोदित परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तक धन मिलेगा। कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों की भौगोलिक कमियों को कम करने के लिए लिफ्ट पेश किया गया है।
सरकार द्वारा योग्य भाड़ा व्यय का 30 प्रतिशत तक आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति वित्त वर्ष प्रति आईईसी 20 लाख रुपये की सीमा के अधीन होगी। इनसाइट के तहत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता मिलेगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों और विदेशों में भारतीय मिशनों के प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100 प्रतिशत तक सहायता शामिल है।